HDFC Bank Loan Relief: HDFC बैंक ने घटाई MCLR दरें, 10 बेसिस प्वाइंट तक सस्ती हुईं उधारी दरें; जानिए आपकी लोन EMI कब और कितनी घटेगी
देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, HDFC Bank (एचडीएफसी बैंक) ने अपने लाखों कर्जदारों को बड़ी राहत दी है। बैंक ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट्स (MCLR) में 5 से 10 बेसिस प्वाइंट (0.05% से 0.10%) तक की कटौती का ऐलान किया है। नई संशोधित दरें प्रभावी हो चुकी हैं। त्योहारों और आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले बैंक द्वारा लोन बेंचमार्क दरों को घटाने के इस फैसले से फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले करोड़ों मौजूदा और नए ग्राहकों की मासिक किस्त (EMI) या लोन की अवधि कम होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, इस कटौती का फायदा हर ग्राहक को तुरंत और एक समान रूप से नहीं मिलेगा, क्योंकि यह पूरी तरह से लोन के रीसेट क्लॉज और बेंचमार्क प्रकार पर निर्भर करता है।
क्या है HDFC Bank की नई MCLR दरों की पूरी सूची?
एचडीएफसी बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी विवरण के अनुसार, बैंक ने विभिन्न अवधियों (Tenures) के लिए अपनी उधारी दरों में 0.05% से लेकर 0.10% तक की कमी की है। इस संशोधन के बाद बैंक की समग्र MCLR दरें अब 7.90 प्रतिशत से लेकर 8.60 प्रतिशत के दायरे में आ गई हैं, जो पहले 8.00 प्रतिशत से 8.65 प्रतिशत के बीच थीं।
ओवरनाइट और 1 महीने की अवधि वाली एमसीएलआर को 10 बेसिस प्वाइंट घटाकर 8.00% से सीधे 7.90% कर दिया गया है। 3 महीने की अवधि के लिए दर 8.15% से घटकर 8.05% हो गई है। वहीं, 6 महीने की एमसीएलआर में 5 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है, जिससे यह दर 8.30% से कम होकर 8.25% पर आ गई है। रिटेल होम लोन और ऑटो लोन के लिए सबसे अहम मानी जाने वाली 1 साल की MCLR को 8.40% से घटाकर 8.35% किया गया है। 2 साल की एमसीएलआर में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती हुई है और यह 8.55% से गिरकर 8.45% हो गई है, जबकि 3 साल की दर 8.65% से घटकर 8.60% पर आ गई है।
क्या तुरंत घट जाएगी आपकी होम लोन या ऑटो लोन की EMI?
अधिकांश कर्जदारों के मन में यह सवाल उठता है कि बैंक द्वारा दरों में कटौती का ऐलान करते ही क्या अगले महीने से कटने वाली ईएमआई की रकम अपने आप कम हो जाएगी? इसका सीधा उत्तर है: नहीं। एमसीएलआर से जुड़े कर्जों में 'रीसेट डेट' (Reset Date) का नियम लागू होता है। जब आप किसी बैंक से फ्लोटिंग रेट पर लोन लेते हैं, तो आपके लोन एग्रीमेंट में एक रीसेट क्लॉज होता है, जो आमतौर पर एक साल, छह महीने या तीन महीने का होता है।
मान लीजिए कि आपका होम लोन 1 साल की एमसीएलआर से जुड़ा है और आपकी रीसेट डेट हर साल दिसंबर महीने में आती है। ऐसी स्थिति में सितंबर में की गई इस कटौती का लाभ आपको तुरंत नहीं मिलेगा, बल्कि दिसंबर में जब आपका लोन रीसेट होगा, तब उस समय लागू एमसीएलआर के आधार पर आपकी ब्याज दर घटेगी। यदि किसी ग्राहक की रीसेट डेट सितंबर महीने में ही पड़ रही है, तो उसे नई दरों का फायदा इसी महीने से मिलना शुरू हो जाएगा।
किन ग्राहकों को मिलेगा इस कटौती का सीधा लाभ?
यह कटौती मुख्य रूप से उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद है जिनके लोन एमसीएलआर व्यवस्था (MCLR Regime) के तहत स्वीकृत हुए थे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2016 में एमसीएलआर व्यवस्था लागू की थी। इसलिए, जिन ग्राहकों ने 2016 से अक्टूबर 2019 के बीच लोन लिया था और उन्होंने अपने लोन को रेपो-लिंक्ड एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) में स्विच नहीं कराया है, वे सीधे तौर पर इस कटौती के दायरे में आते हैं। इसके अलावा कई कॉरपोरेट कर्जदार, एमएसएमई बिजनेस लोन धारक और पर्सनल व कमर्शियल व्हीकल लोन ग्राहक जो एमसीएलआर से जुड़े हैं, उनकी उधारी लागत में राहत देखने को मिलेगी।
रेपो रेट से जुड़े लोन (EBLR) ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा?
अक्टूबर 2019 के बाद रिजर्व बैंक के नियमों के तहत सभी वाणिज्यिक बैंकों के लिए नए फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन (जैसे होम लोन, ऑटो लोन और एमएसएमई लोन) को किसी बाहरी बेंचमार्क, खासकर आरबीआई के रेपो रेट से जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया था। यदि आपने अक्टूबर 2019 के बाद होम लोन लिया है और आपका लोन रेपो रेट लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR / EBLR) पर आधारित है, तो HDFC बैंक की इस एमसीएलआर कटौती का आपके लोन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। रेपो-लिंक्ड लोन की ब्याज दरें केवल तभी घटती या बढ़ती हैं जब भारतीय रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आधिकारिक रेपो दर में फेरबदल करता है।
ईएमआई घटेगी या लोन की अवधि कम होगी: बैंक कैसे देता है फायदा?
जब भी किसी फ्लोटिंग रेट लोन पर ब्याज दरों में कटौती होती है, तो बैंक आमतौर पर दो तरह से इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। पहली व्यवस्था में बैंक आपकी मासिक ईएमआई राशि को जस का तस रखते हुए लोन के कुल टेन्योर यानी भुगतान की बची हुई अवधि (Months) को कम कर देते हैं, जिससे आपका लोन तय समय से पहले चुकता हो जाता है और ब्याज की बचत होती है। दूसरी व्यवस्था में ग्राहक बैंक शाखा में आवेदन देकर या नेट बैंकिंग के जरिए अपने लोन का टेन्योर समान रखते हुए मासिक ईएमआई की राशि घटवा सकते हैं। यदि आप अपनी मासिक बचत बढ़ाना चाहते हैं, तो आप ईएमआई घटवाने का विकल्प चुन सकते हैं।
बेस रेट और फिक्स्ड डिपॉजिट दरों की वर्तमान स्थिति क्या है?
बैंक ने स्पष्ट किया है कि एमसीएलआर में किया गया यह बदलाव आंतरिक लागत व्यवस्था के आधार पर है। बैंक की बेस रेट वर्तमान में 8.70 प्रतिशत और बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) 17.20 प्रतिशत प्रति वर्ष के स्तर पर बनी हुई है। इसके साथ ही, बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए यह राहत की बात है कि लेंडिंग बेंचमार्क में कटौती से जमा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है। सामान्य नागरिकों को एफडी पर 2.75% से 6.50% और वरिष्ठ नागरिकों को 3.25% से 7.00% तक का आकर्षक ब्याज मिलना जारी रहेगा।
लोन धारकों को अब क्या कदम उठाना चाहिए?
यदि आपके पास HDFC बैंक का कोई भी फ्लोटिंग रेट लोन चल रहा है, तो सबसे पहले अपने लोन अकाउंट स्टेटमेंट या सैंक्शन लेटर की जांच करें। उसमें यह देखें कि आपका लोन एमसीएलआर, बेस रेट या ईबीएलआर में से किससे लिंक्ड है। यदि आपका लोन अभी भी पुराने एमसीएलआर सिस्टम में है, तो अपने बैंक रिलेशनशिप मैनेजर से संपर्क करके यह पता करें कि आपकी रीसेट तारीख कब है। साथ ही यह भी कैलकुलेट करें कि क्या आपके लोन को एक्सटर्नल रेपो-लिंक्ड बेंचमार्क में स्विच कराना अधिक किफायती रहेगा, क्योंकि वर्तमान वित्तीय परिदृश्य में पारदर्शी ब्याज ट्रांसमिशन के लिए रेपो-लिंक्ड लोन को अक्सर अधिक गतिशील माना जाता है।