पूर्व OFB कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब क्या है नया नियम?

पूर्व OFB कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब क्या है नया नियम?

देशभर की 41 आयुध निर्माणियों (Ordnance Factories) में कार्यरत लगभग 70 हजार से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए रक्षा मंत्रालय के स्तर पर एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्री समूह (Empowered Group of Ministers - EGoM) ने पूर्व ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) के कर्मचारियों के सेवा नियमों और पेंशन अधिकारों को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। सरकार के ताजा आदेश के अनुसार, पूर्व ओएफबी के जो कर्मचारी नवगठित 7 डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) में शामिल या विलीन (Absorb) नहीं होना चाहते, उन्हें जबरन कंपनी कैडर में नहीं भेजा जाएगा। वे अपनी सेवानिवृत्ति (Superannuation/Retirement) की अंतिम तिथि तक "डीम्ड डेपुटेशन" (Deemed Deputation) पर बने रहकर अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।

यह फैसला उन तमाम कर्मचारियों के लिए जीवनदान की तरह है जो 1 अक्टूबर 2021 को ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण (Corporatisation) के बाद से ही अपने भविष्य, सेवा शर्तों और सबसे बढ़कर अपनी पेंशन सुरक्षा को लेकर गहरी अनिश्चितता में जी रहे थे। अब तक सरकार कर्मचारियों के डेपुटेशन की अवधि को दो-दो साल के अंतराल पर आगे बढ़ा रही थी, जिससे कर्मचारियों के सिर पर हमेशा यह तलवार लटकी रहती थी कि समय सीमा समाप्त होने के बाद उनका क्या होगा। नए फैसले ने इस असमंजस को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

बिना DPSU विलय के भी सुरक्षित रहेगा केंद्रीय कर्मचारी का दर्जा: जानिए प्रमुख अधिकार

सरकार के आधिकारिक आदेश में यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया गया है कि जो कर्मचारी डीपीएसयू में विलय का विकल्प नहीं चुनेंगे, उनकी मूल सेवा शर्तों और कानूनी दर्जे में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। वे तकनीकी और प्रशासनिक रूप से उसी तरह केंद्र सरकार के नियमित कर्मचारी (Central Government Servants) बने रहेंगे, जैसे वे निगमीकरण से पहले थे।

इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले सुरक्षा कवच इस प्रकार हैं:

वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि (Pay Scale & Increments): कर्मचारियों का वेतन 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th CPC) के पे-मैट्रिक्स और आने वाले समय में लागू होने वाले केंद्रीय वेतन आयोगों के तहत ही निर्धारित होता रहेगा। उन्हें डीपीएसयू के औद्योगिक वेतनमान (IDA) पर जाने की कोई बाध्यता नहीं होगी, बल्कि वे केंद्र सरकार के महंगाई भत्ते (CDA) के पूर्ण हकदार रहेंगे।

पदोन्नति और करियर प्रगति (Career Progression & MACP): केंद्रीय सेवा के तय नियमों के अनुसार कर्मचारियों को समयबद्ध पदोन्नति (MACP) का लाभ मिलता रहेगा। डीपीएसयू की आंतरिक कंपनी प्रमोशन पॉलिसी उन कर्मचारियों पर थोपी नहीं जाएगी जो डीम्ड डेपुटेशन पर कार्यरत हैं।

चिकित्सा एवं आवास सुविधाएं: कर्मचारी केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) अथवा आयुध निर्माणी अस्पतालों की मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे में बने रहेंगे। इसके अलावा उन्हें डिफेंस पूल या फैक्ट्री एस्टेट के सरकारी क्वार्टर में रहने का वही अधिकार हासिल होगा जो अन्य रक्षा सिविलियन कर्मचारियों को प्राप्त है।

छुट्टियां और सेवा शर्तें: अर्जित अवकाश (EL), हाफ पे लीव (HPL), अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामले पूरी तरह से केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली यानी CCS (CCA) Rules के तहत ही संचालित होंगे।

पेंशन, ग्रेच्युटी और ओपीएस (OPS) पर क्या पड़ेगा असर? समझिए पूरा कानूनी गणित

ऑर्डनेंस फैक्ट्री कर्मचारियों के आंदोलन और चिंताओं का सबसे संवेदनशील केंद्र बिंदु पेंशन सुरक्षा ही रहा है। नए दिशा-निर्देशों ने पेंशन से जुड़े तमाम संशयों को पूरी तरह निर्मूल कर दिया है।

आधिकारिक प्रावधानों के तहत जो कर्मचारी 1 जनवरी 2004 से पहले सेवा में नियुक्त हुए थे, वे सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स के तहत पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme - OPS) के पात्र बने रहेंगे। डीम्ड डेपुटेशन पर रहते हुए सेवानिवृत्त होने पर उनकी पेंशन का भुगतान सीधे भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से रक्षा लेखा महानियंत्रक (CGDA) के माध्यम से सरकारी खजाने से किया जाएगा। इसमें डीपीएसयू के मुनाफे, घाटे या वित्तीय सक्षमता का कोई दखल नहीं होगा।

इसी प्रकार, 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारी केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) अथवा हालिया एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के केंद्रीय नियमों के तहत कवर्ड रहेंगे। सेवानिवृत्ति के समय देय ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा, डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) के नियम और पारिवारिक पेंशन (Family Pension) के सभी लाभ भी पूरी तरह केंद्र सरकार के रक्षा सिविलियन कर्मचारियों के अनुरूप ही देय होंगे।

7 नई रक्षा कंपनियों में विलय का विकल्प: क्या है कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज?

ईजीओएम ने सभी 7 नवगठित डीपीएसयू—म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVANI), एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWE India), यंत्रा इंडिया लिमिटेड (YIL), ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (TCL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (GIL)—के लिए एक 'कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज' को भी स्वीकृति दी है।

इस पैकेज के तहत प्रत्येक कर्मचारी को यह स्वतंत्र विकल्प (Option) दिया जाएगा कि वह चाहे तो डीपीएसयू में विधिवत समाहित (Absorb) हो सकता है या फिर डीम्ड डेपुटेशन पर बना रह सकता है। जो कर्मचारी स्वेच्छा से डीपीएसयू में स्थायी विलय चुनेंगे:

उन्हें डीपीएसयू के औद्योगिक महंगाई भत्ते (IDA) पैटर्न वाले पे-स्केल, कैफेटेरिया अलाउंस, परफॉर्मेंस रिलेटेड पे (PRP) और कंपनी की कॉर्पोरेट प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मिलेगा।

डीपीएसयू में जाने वाले कर्मचारियों की पूर्व की केंद्रीय सेवा को पेंशन गणना, ग्रेच्युटी और लीव बैलेंस के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।

हालांकि, जो कर्मचारी डीपीएसयू में विलय का विकल्प नहीं भरेंगे, वे डिफ़ॉल्ट रूप से रिटायरमेंट तक डीम्ड डेपुटेशन पर केंद्र सरकार के कर्मचारी के तौर पर कार्य करते रहेंगे। सरकार ने किसी भी कर्मचारी के लिए विलय को अनिवार्य या बाध्यकारी नहीं बनाया है।

कानपुर, जबलपुर, पुणे से लेकर अवादी तक: देश के रक्षा औद्योगिक केंद्रों में राहत

इस नीतिगत बदलाव का सीधा और सकारात्मक प्रभाव देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण शहरों पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी (OEF), फील्ड गन फैक्ट्री (FGK), स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (SAF) और ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री में हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ), गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) और ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (OFK) के रक्षा कामगारों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।

महाराष्ट्र के पुणे, खड़की (Ammunition Factory Khadki), देहू रोड और नागपुर की अंबाझरी फैक्ट्री; तमिलनाडु के चेन्नई स्थित अवादी हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) और तिरुचिरापल्ली; पश्चिम बंगाल के ईशापुर राइफल फैक्ट्री और दमदम; उत्तराखंड के देहरादून (ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री); तथा तेलंगाना के मेदक ऑर्डनेंस फैक्ट्री जैसे रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों के बीच फैली अनिश्चितता अब हमेशा के लिए दूर हो गई है।

कर्मचारी यूनियनों का लंबा संघर्ष और ऐतिहासिक अदालती पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वर्ष 2021 में जब केंद्र सरकार ने 220 साल पुराने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के 41 कारखानों को सात अलग-अलग सार्वजनिक उपक्रमों में विभाजित किया था, तब तीनों प्रमुख रक्षा महासंघों—ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF), भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) और इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन (INDWF)—ने इसका तीखा विरोध किया था।

कर्मचारियों का मुख्य तर्क यह था कि भर्ती के समय उनसे भारत के राष्ट्रपति के नाम पर केंद्रीय सरकारी सेवक के रूप में सेवा अनुबंध किया गया था, जिसे एकतरफा तरीके से कॉरपोरेट ढांचे में नहीं बदला जा सकता। मामला संसद से लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक पहुंचा था।

अदालतों ने भी सरकार से कर्मचारियों की पेंशन और सेवा सुरक्षा को लेकर ठोस हलफनामा मांगा था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने इन सभी वैधानिक, विधिक और मानवीय पहलुओं की गहन समीक्षा करने के बाद आखिरकार कर्मचारियों के हित में यह स्थायी समाधान लागू किया है।

कर्मचारियों के लिए आगे की राह: विकल्प पत्र भरने से पहले क्या सावधानी बरतें?

रक्षा उत्पादन विभाग (DDP) जल्द ही सभी 41 निर्माणियों में औपचारिक ऑप्शन फॉर्म (Option Form) जारी करने की अंतिम रूपरेखा अधिसूचित करेगा। कर्मचारियों को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर अपने विकल्प का चयन करना होगा:

  • यदि आपकी प्राथमिकता केंद्रीय सेवा सुरक्षा, सुनिश्चित ओपीएस पेंशन और सरकारी नियमों की निरंतरता है, तो 'डीम्ड डेपुटेशन' पर बने रहना सबसे सुरक्षित मार्ग माना जा रहा है।

  • यदि आप अपेक्षाकृत युवा हैं, डीपीएसयू की भविष्य की वित्तीय वृद्धि, कॉर्पोरेट इंसेंटिव और पीआरपी (PRP) का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आप वित्तीय विश्लेषकों और अपने सेवा रिकॉर्ड की गणना के आधार पर एब्जॉर्प्शन पैकेज का मूल्यांकन कर सकते हैं।

  • किसी भी विकल्प पत्र पर हस्ताक्षर करने से पूर्व अपनी अर्हक सेवा (Qualifying Service), संचित अवकाश और पेंशन नियमों की प्रमाणित जानकारी अपने प्रशासनिक कार्यालय से अवश्य सत्यापित करें।