केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: इस महीने 5 दिन पहले ही बैंक खातों में आ जाएगी पूरी सैलरी, केंद्र सरकार ने अचानक जारी किया आदेश; जानिए वजह

केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: इस महीने 5 दिन पहले ही बैंक खातों में आ जाएगी पूरी सैलरी, केंद्र सरकार ने अचानक जारी किया आदेश; जानिए वजह

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी और बेहद जरूरी खबर सामने आई है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग और कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए इस महीने के वेतन और पेंशन भुगतान की तारीख में महत्वपूर्ण बदलाव कर दिया है। सामान्य तौर पर सरकारी नियमों के मुताबिक कर्मचारियों की तनख्वाह और पेंशनर्स की मासिक राशि महीने के अंतिम कार्य दिवस को खाते में क्रेडिट की जाती है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तय किया है कि इस बार कर्मचारियों को अपनी सैलरी के लिए महीने के आखिरी दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि 5 दिन पहले यानी 25 तारीख को ही वेतन और पेंशन का पूरा भुगतान खातों में ट्रांसफर कर दिया जाए।

इस फैसले के बाद देशभर के लाखों केंद्रीय सिविल कर्मचारियों, रक्षा कर्मियों, डाक व दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों और सम्मानित बुजुर्ग पेंशनर्स के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है। अमूमन त्योहारों या विशेष अवसरों पर ही इस प्रकार का पूर्व भुगतान देखने को मिलता है, लेकिन इस बार का निर्णय पूरी तरह से सुगम वित्तीय प्रबंधन और कर्मचारियों को किसी भी संभावित असुविधा से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। वित्त मंत्रालय के इस कदम की सराहना कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों द्वारा भी की जा रही है, क्योंकि यदि समय पर यह कदम नहीं उठाया जाता तो लाखों परिवारों का घरेलू बजट महीने के अंत में प्रभावित हो सकता था।

बैंक हड़ताल और क्लोजिंग का संकट: आखिर सरकार को क्यों लेना पड़ा यह बड़ा फैसला

सरकारी तंत्र में वित्तीय लेनदेन और वेतन निकासी की एक बेहद सटीक और निर्धारित समयसीमा होती है। इस महीने के अंतिम दिनों में बैंकिंग प्रणाली के सामने एक बड़ा व्यवधान खड़ा होने की पूरी आशंका बनी हुई थी। बैंक कर्मचारी यूनियनों के संयुक्त मंच (यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस - UFBU) द्वारा 5-डे बैंकिंग और अन्य सेवा शर्तों को लेकर महीने के अंतिम तीन दिनों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही महीने की अंतिम तारीख को बैंकों की अर्धवार्षिक क्लोजिंग का काम भी निर्धारित होता है, जिस दौरान सामान्य जनता और सरकारी विभागों के नियमित वित्तीय लेन-देन अक्सर सीमित या पूरी तरह से स्थगित रहते हैं।

अगर बैंक हड़ताल और वित्तीय क्लोजिंग के दौरान वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाती, तो चेक क्लीयरेंस, एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS) और नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियां बुरी तरह लड़खड़ा सकती थीं। इसका सीधा नतीजा यह होता कि 30 तारीख को आने वाला वेतन कई दिनों के लिए लटक जाता और कर्मचारियों को अगले महीने के पहले हफ्ते तक अपनी गाढ़ी कमाई का इंतजार करना पड़ता। इसी गंभीर समस्या को भांपते हुए वित्त मंत्रालय ने सक्रियता दिखाई और वेतन बिलों की प्रोसेसिंग को तय समय से एक हफ्ते पहले ही पूरा करने का आदेश पारित कर दिया, ताकि 25 तारीख तक हर हाल में पैसा कर्मचारियों के बैंक खातों में सुरक्षित पहुंच जाए।

किन-किन कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा इस फैसले का सीधा फायदा

केंद्र सरकार द्वारा जारी यह विस्तृत आदेश किसी एक विशेष वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बेहद व्यापक रखा गया है। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार के सभी सिविल मंत्रालयों, सचिवालयों और उनसे जुड़े अधीनस्थ कार्यालयों में काम करने वाले नियमित सरकारी सेवकों को शामिल किया गया है। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले तीनों सेनाओं के असैन्य और सैन्य कर्मी, डाक विभाग (India Post) के हजारों कर्मचारी तथा दूरसंचार विभाग के सभी कर्मचारी इस त्वरित भुगतान के दायरे में आएंगे।

इतना ही नहीं, केंद्र सरकार के अधीन कारखानों, आयुध निर्माणियों और उपक्रमों में काम करने वाले औद्योगिक कर्मचारियों (Industrial Employees) को भी इसका पूरा लाभ दिया जाएगा। सरकार ने सबसे अधिक संवेदनशीलता अपने सेवानिवृत्त बुजुर्ग पेंशनर्स के प्रति दिखाई है। पे एंड अकाउंट्स ऑफिस (PAO) और केंद्रीय पेंशन प्रसंस्करण केंद्रों (CPPC) को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि पेंशनभोगियों की मासिक पेंशन किसी भी हाल में 25 तारीख के बाद लंबित न रहे। देश के दूर-दराज के इलाकों, ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए यह फैसला बड़ी राहत साबित होगा क्योंकि महीने के अंत में उन्हें अपनी दवाओं और रोजमर्रा के जरूरी खर्चों के लिए पैसे की तंगी से नहीं जूझना पड़ेगा।

एडवांस पेमेंट नियम और आगामी महीनों में सैलरी एडजस्टमेंट का पूरा गणित

वित्त मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन में इस बात की भी तकनीकी व्याख्या की गई है कि इस पूर्व भुगतान को वित्तीय नियमों के तहत किस प्रकार दर्ज किया जाएगा। नियमों के अनुसार, महीने की समाप्ति से पांच दिन पहले किए जाने वाले इस भुगतान को सरकारी खातों में 'अग्रिम वेतन' यानी एडवांस पेमेंट के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए की जाती है ताकि लेखा परीक्षा (Audit) और कैग (CAG) के नियमों का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस शुरुआती भुगतान से उनके भत्तों या कटौतियों पर कोई असर पड़ेगा। इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमित मासिक वेतन, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) पूरी तरह से सामान्य रूप से ही क्रेडिट होगा। हालांकि, यदि 25 तारीख के बाद महीने के शेष दिनों में किसी कर्मचारी की अनधिकृत अनुपस्थिति, आकस्मिक अवकाश या अन्य किसी कारणवश वेतन में कोई कटौती या बदलाव की आवश्यकता पड़ती है, तो उस छोटे-मोटे अंतर का आवश्यक समायोजन (Adjustment) अगले महीने यानी अक्टूबर के नियमित वेतन बिल के माध्यम से सुचारू रूप से कर दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों के मौजूदा मासिक बजट पर रत्ती भर भी नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस दूरदर्शी फैसले ने बैंकिंग संकट और हड़ताल से उत्पन्न होने वाली एक बहुत बड़ी प्रशासनिक व मानवीय समस्या को समय रहते टाल दिया है। कर्मचारियों को अपने हाथ में 5 दिन पहले तनख्वाह मिलने से वे अपनी जरूरी वित्तीय जिम्मेदारियों, ईएमआई (EMI), बच्चों की स्कूल फीस और आगामी त्योहारी खरीदारी की योजनाएं बिना किसी तनाव या रुकावट के समय पर पूरी कर सकेंगे।