Semicon India 2026: पीएम मोदी ने किया सेमीकॉन इंडिया 2026 का भव्य उद्घाटन, बोले- दुनिया के भरोसेमंद सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभरा नया भारत!

Semicon India 2026: पीएम मोदी ने किया सेमीकॉन इंडिया 2026 का भव्य उद्घाटन, बोले- दुनिया के भरोसेमंद सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभरा नया भारत!

देश की राजधानी क्षेत्र में आयोजित वैश्विक सम्मेलन 'सेमीकॉन इंडिया 2026' का औपचारिक उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक तकनीकी जगत के दिग्गजों, वैज्ञानिकों और निवेशकों को संबोधित किया। सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी की तकनीकी प्रगति की रीढ़ सिलिकॉन चिप्स हैं और भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक चिप निर्माण और डिजाइनिंग का एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा चुका है। देश के विभिन्न तकनीकी केंद्रों जैसे बेंगलुरु, नोएडा, हैदराबाद, धोलेरा और साणंद के साथ मिलकर भारत ने इस दिशा में एक एकीकृत इकोसिस्टम तैयार करने की रणनीति बनाई है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी कई गुना बढ़ सके।

वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में भारत की रणनीति

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में आए दुनिया भर के उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि जब दुनिया आपूर्ति श्रृंखला में लचीलेपन और विश्वसनीयता की तलाश कर रही है, तब भारत एक स्थिर, पारदर्शी और नवाचार-अनुकूल माहौल पेश करता है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत सरकार ने डिजाइन, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) से लेकर पूर्ण स्तर के फैब्रिकेशन यूनिट्स की स्थापना के लिए ठोस नीतियां बनाई हैं। भारत की विशाल युवा आबादी, लाखों की संख्या में प्रशिक्षित सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर्स और अनुकूल सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं वैश्विक चिप निर्माताओं के लिए भारत को सबसे आकर्षक गंतव्य बनाती हैं। देश का लक्ष्य वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करना है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा और एआई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता को न्यूनतम किया जा सके।

बुनियादी ढांचा, नीतियां और वैश्विक निवेश का प्रवाह

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक के विकास के लिए केवल नीतियां ही नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का होना भी उतना ही आवश्यक है। गुजरात के धोलेरा और असम के मोरीगांव जैसे उभरते सेमीकंडक्टर पार्कों में अल्ट्रा-प्योर वॉटर, अनइंटरप्टेड ग्रीन पावर सप्लाई और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी जैसी अनिवार्य आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया गया है। केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और वित्तीय सब्सिडी योजनाओं के चलते दुनिया भर की अग्रणी चिप निर्माता कंपनियां भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर प्लांट स्थापित करने के लिए आगे आ रही हैं। भारत का ध्यान केवल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू स्तर पर जटिल चिप डिजाइनिंग और बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने पर भी केंद्रित है।

कुशल मानव संसाधन और भारत का सेमीकंडक्टर टैलेंट पूल

प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सेमीकंडक्टर उद्योग की सबसे बड़ी पूंजी अत्यधिक कुशल मानव संसाधन है। भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग स्नातकों को तैयार करता है और सरकार ने देशभर के प्रमुख संस्थानों, आईआईटी, एनआईटी और तकनीकी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर विशेष सेमीकंडक्टर पाठ्यक्रम लागू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। चिप डिजाइनिंग की दुनिया में भारतीय प्रतिभा पहले से ही अपनी छाप छोड़ चुकी है और अब देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग फैब स्थापित होने से इन युवाओं को स्वदेश में ही अत्याधुनिक अनुसंधान और उत्पादन से जुड़ने के अभूतपूर्व अवसर मिल रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक तकनीकी भविष्य में भारत की भूमिका

आधुनिक दौर में स्मार्टफोन से लेकर हाई-स्पीड ट्रेनों, इलेक्ट्रिक वाहनों, मेडिकल डिवाइसेज और सुपरकंप्यूटर तक हर उन्नत उपकरण की कार्यप्रणाली सेमीकंडक्टर चिप पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण पूरी दुनिया के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने आश्वस्त किया कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा, मजबूत कानूनी व्यवस्था और स्थिर नीतियां वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक स्थिरता की गारंटी देती हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 न केवल देश की तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि भारत चिप निर्माण के क्षेत्र में दुनिया का अगला बड़ा केंद्र बनने की दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।