E20 पेट्रोल पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार का बड़ा बयान: माइलेज घटने की असली वजह आई सामने
देशभर के पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित यानी E20 पेट्रोल की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही वाहन चालकों के बीच माइलेज में गिरावट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर कई वाहन मालिकों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से उनकी कार और बाइक का माइलेज पहले के मुकाबले कम हो गया है। इस विषय पर उठ रही चिंताओं और संसद में पूछे गए सवालों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) और पेट्रोलियम राज्य मंत्री ने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन से कुछ वाहनों के माइलेज में मामूली अंतर आता जरूर है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं और केवल ईंधन को ही माइलेज में भारी गिरावट का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
माइलेज कम होने का असली वैज्ञानिक कारण: कैलोरीफिक वैल्यू और एनर्जी डेंसिटी का अंतर
सरकार और ऑटोमोबाइल शोध संस्थानों (ARAI व IIT कानपुर) के अनुसार, एथेनॉल और पारंपरिक शुद्ध पेट्रोल की रासायनिक संरचना में बुनियादी अंतर होता है। शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की 'एनर्जी डेंसिटी' (Energy Density) यानी ऊर्जा घनत्व और कैलोरीफिक वैल्यू लगभग 30 से 33 प्रतिशत कम होती है। इसका सीधा मतलब यह है कि एक लीटर शुद्ध पेट्रोल के जलने से जितनी ऊर्जा निकलती है, एक लीटर शुद्ध एथेनॉल से उससे कम ऊर्जा पैदा होती है।
जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है, तो समग्र ईंधन की कुल ऊर्जा क्षमता में करीब 6 प्रतिशत की कमी आ जाती है। गाड़ी का इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) और इंजन उसी गति और शक्ति (Power) को बनाए रखने के लिए कंबशन चैंबर में थोड़ी अधिक मात्रा में ईंधन इंजेक्ट करता है। हालांकि, एथेनॉल का रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) शुद्ध पेट्रोल से काफी ज्यादा होता है, जिससे इंजन में नॉकिंग कम होती है और पिकअप स्मूथ रहता है, लेकिन ऊर्जा घनत्व कम होने की वजह से प्रति लीटर दूरी में थोड़ी कमी दर्ज होती है।
संसद में सरकार का आधिकारिक आंकड़ा: 2% से 6% तक का हो सकता है माइलेज पर असर
संसद के पटल पर सरकार द्वारा पेश किए गए ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के संयुक्त परीक्षण आंकड़ों के अनुसार, E20 पेट्रोल के उपयोग से वाहनों के प्रकार और उनकी तकनीक के आधार पर माइलेज में औसतन 2 प्रतिशत से लेकर 6 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है:
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E20 अनुरूप नए वाहन (E20 Tuned Vehicles): अप्रैल 2023 के बाद निर्मित BS6 फेज-2 और E20 ट्यून्ड इंजनों में माइलेज में केवल 1% से 2% का मामूली और नगण्य अंतर आता है।
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पुराने गैर-अनुरूप वाहन (E10 / Older BS4 & BS3 Vehicles): 2016 या उससे पहले के वाहनों में, जिन्हें E10 या सामान्य पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किया गया था, माइलेज में 3% से 5% या अधिकतम 6% तक की गिरावट दर्ज हो सकती है।
मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि यदि कोई वाहन सामान्यतः 20 किमी/लीटर का माइलेज देता है, तो E20 ईंधन से उसका माइलेज घटकर 19 से 19.4 किमी/लीटर के आसपास रहेगा, जो दैनिक उपयोग में बहुत बड़ा अंतर नहीं है।
'माइलेज घटने के लिए केवल E20 पेट्रोल जिम्मेदार नहीं': पेट्रोलियम मंत्रालय ने गिनाए अन्य कारक
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक परिस्थितियों में किसी भी वाहन का माइलेज केवल फ्यूल टैंक में डाले गए पेट्रोल से तय नहीं होता। वास्तविक ड्राइविंग में माइलेज घटने के पीछे कई अन्य व्यावहारिक और मैकेनिकल कारक भी समान रूप से जिम्मेदार होते हैं:
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ड्राइविंग आदतें (Driving Habits): बार-बार अचानक एक्सीलरेटर दबाना, तेज गति में अचानक ब्रेक लगाना और अनावश्यक गियर बदलना माइलेज को 15 से 20 प्रतिशत तक गिरा देता है।
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ट्रैफिक और आइडलिंग (Traffic Conditions): भारी ट्रैफिक जाम में बार-बार गाड़ी का रुकना, चलना और रेड लाइट पर इंजन चालू रखने से बिना चले ही भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता है।
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टायर प्रेशर में कमी: टायरों में अनुशंसित (Recommended) हवा के दबाव से कम प्रेशर होने पर रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ता है, जिससे माइलेज 3% से 5% तक कम हो जाता है।
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एयर कंडीशनिंग (AC) का लगातार भारी इस्तेमाल: अत्यधिक गर्मी के मौसम में फुल ब्लोअर पर एसी चलाने से इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
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अनियमित मेंटेनेंस: गंदे एयर फिल्टर, पुराने स्पार्क प्लग और खराब इंजन ऑयल के कारण इंजन को सांस लेने और पावर जनरेट करने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है, जो सीधे तौर पर माइलेज को नुकसान पहुंचाता है।
इंजन खराब होने और जंग लगने की अफवाहों पर सरकार और ऑटो कंपनियों का रुख
सोशल मीडिया पर चल रही उन भ्रामक खबरों को भी सरकार और ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं ने सिरे से खारिज किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि E20 पेट्रोल से इंजन सीज हो रहे हैं या उनमें जंग लग रही है। संसद में सरकार ने देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के सर्विसिंग डेटा का हवाला दिया। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष के दौरान सर्विस की गई 2.84 करोड़ गाड़ियों में से 1.5 करोड़ ऐसी पुरानी गाड़ियां थीं जो E20 सर्टिफाइड नहीं थीं, लेकिन उनमें से किसी भी गाड़ी में एथेनॉल की वजह से इंजन फेलियर, रस्टिंग या फ्यूल लाइन डैमेज होने का कोई पुख्ता मामला सामने नहीं आया है।
सभी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां अपने E20 अनुरूप वाहनों पर स्टैंडर्ड वारंटी प्रदान कर रही हैं। ऑटो कंपनियों का कहना है कि E20 पेट्रोल को देश भर में लागू करने से पहले विभिन्न लैब्स और फील्ड ट्रायल्स में लाखों किलोमीटर तक परखा गया है।
E20 पेट्रोल के बड़े राष्ट्रीय लाभ: प्रदूषण में भारी कटौती और आर्थिक सुरक्षा
पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के राष्ट्रीय और पर्यावरण संबंधी फायदों को रेखांकित करते हुए बताया कि E20 ईंधन से देश को बहुआयामी लाभ मिल रहे हैं:
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कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी: एथेनॉल में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने के कारण इंजन में ईंधन का दहन (Combustion) अधिक पूर्ण और स्वच्छ होता है। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर (PM) के जहरीले धुएं में 30% से 50% तक की भारी कमी आती है।
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कच्चे तेल के आयात बिल में बचत: भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। 20% एथेनॉल मिलाने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार की सालाना ₹50,000 करोड़ से अधिक की बचत हो रही है।
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किसानों को सीधा आर्थिक संबल: एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे, मक्के और अधिशेष अनाजों से किया जाता है, जिसका सीधा भुगतान देश के गन्ना और अनाज उत्पादक किसानों को हो रहा है।
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वैश्विक तेल संकट से आम जनता की सुरक्षा: सरकार के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $135 प्रति बैरल के करीब पहुंचा था, तब घरेलू एथेनॉल ब्लेंडिंग के दम पर ही देश में पेट्रोल की कीमतों को ₹125 प्रति लीटर तक जाने से रोका जा सका और कीमतें स्थिर बनी रहीं।
E20 पेट्रोल के साथ गाड़ी का माइलेज बेहतर रखने के 5 आसान उपाय
यदि आप अपनी गाड़ी से अधिकतम माइलेज और बेहतर इंजन लाइफ हासिल करना चाहते हैं, तो इन 5 बुनियादी बातों का पालन जरूर करें:
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स्मूथ और स्थिर गति में ड्राइव करें: हाईवे और शहर की सड़कों पर 50 से 70 किमी/घंटे की स्थिर गति बनाए रखें और अचानक रेस देने या हार्ड ब्रेकिंग से बचें।
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टायर प्रेशर की नियमित जांच: हर 10 से 15 दिन में टायरों में निर्माता द्वारा बताई गई सही हवा (PSI) सुनिश्चित करें।
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समय पर सर्विसिंग और फिल्टर की सफाई: हर 5,000 से 10,000 किमी पर इंजन ऑयल बदलें और एयर फिल्टर को साफ या रिप्लेस करवाएं।
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आइडलिंग कम करें: 30 सेकंड से ज्यादा लंबे सिग्नल या जाम में गाड़ी का इंजन बंद करने की आदत डालें।
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अधिकृत और प्रतिष्ठित पेट्रोल पंप से ही ईंधन लें: हमेशा विश्वसनीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के पंपों से ही पेट्रोल भरवाएं ताकि फ्यूल की शुद्धता और गुणवत्ता पर कोई संदेह न रहे।
सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का यह स्पष्ट संदेश है कि E20 पेट्रोल आधुनिक स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कदम है। माइलेज में होने वाला 2 से 5 प्रतिशत का मामूली अंतर स्वच्छ हवा, मजबूत अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि के व्यापक लाभों के सामने बेहद छोटा है। थोड़ी सी समझदारी भरी ड्राइविंग अपनाकर वाहन चालक इस अंतर को भी आसानी से संतुलित कर सकते हैं।