E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा खुलासा: 'सिर्फ ईंधन नहीं घटाता गाड़ियों का माइलेज', जानिए माइलेज गिरने के असली कारण और गाड़ी का एवरेज बढ़ाने के आसान फॉर्मूले
देशभर के पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही वाहन चालकों के बीच माइलेज को लेकर एक नई बहस छिड़ गई थी। सोशल मीडिया से लेकर ऑटोमोबाइल फोरम तक यह दावा किया जा रहा था कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज 15 से 20 प्रतिशत तक गिर गया है। इन दावों और उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंताओं के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने तकनीकी साक्ष्यों के साथ स्थिति स्पष्ट कर दी है।
सरकार की ओर से जारी तकनीकी विश्लेषण और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के अध्ययनों में यह साफ किया गया है कि E20 पेट्रोल अकेले किसी भी वाहन के माइलेज में भारी गिरावट के लिए जिम्मेदार नहीं है। वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों में माइलेज गिरने के पीछे कई अन्य यांत्रिक, पर्यावरणीय और मानवीय कारक मुख्य रूप से काम करते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
क्या है E20 पेट्रोल और इससे माइलेज पर कितना असर पड़ता है?
E20 ईंधन में 80 प्रतिशत पारंपरिक गैसोलीन (पेट्रोल) और 20 प्रतिशत जैव-एथेनॉल (बायो-एथेनॉल) का मिश्रण होता है। एथेनॉल एक नवीकरणीय ईंधन है जिसे गन्ने, मक्का और अतिरिक्त खाद्यान्नों से तैयार किया जाता है। भारत सरकार द्वारा इस नीति को तेजी से लागू करने का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कटौती करना, विदेशी मुद्रा बचाना और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करके पर्यावरण को स्वच्छ बनाना है।
ऊर्जा घनत्व (Energy Density) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो शुद्ध एथेनॉल का ऊर्जा घनत्व सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग एक-तिहाई कम होता है। जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है, तो समग्र मिश्रण के ऊर्जा घनत्व में केवल 3 से 6 प्रतिशत की मामूली कमी आती है। ऑटोमोबाइल परीक्षणों से प्रमाणित हुआ है कि यदि कोई वाहन विशेष रूप से E20 के लिए कैलिब्रेटेड नहीं भी है, तब भी उसके माइलेज में अधिकतम 2 से 5 प्रतिशत का ही अंतर आ सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कार 20 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो E20 के कारण यह घटकर 19 या 19.2 किमी ही हो सकता है, न कि 14 या 15 किमी। ऐसे में माइलेज में 20 से 30 प्रतिशत की भारी गिरावट के पीछे अन्य प्रमुख कारण होते हैं।
सिर्फ ईंधन नहीं, इन 5 बड़ी वजहों से अचानक गिरता है गाड़ियों का माइलेज
वाहन का माइलेज केवल टैंक में डाले जाने वाले तेल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि वाहन के रख-रखाव और उसे चलाने के तरीके से सीधे जुड़ा होता है। विशेषज्ञों ने उन 5 मुख्य वजहों को रेखांकित किया है जो माइलेज को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं:
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आक्रामक ड्राइविंग और गलत गियर शिफ्टिंग: बार-बार अचानक एक्सीलेटर दबाना (हार्ड एक्सीलरेशन), तेज गति में अचानक ब्रेक लगाना और गलत गियर में गाड़ी खींचना माइलेज गिरने का सबसे बड़ा कारण है। कम स्पीड में ऊंचा गियर या तेज रफ्तार में निचला गियर इस्तेमाल करने से इंजन पर अत्यधिक लोड पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
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टायरों में कम हवा का दबाव (Under-inflated Tyres): यदि टायरों में अनुशंसित पीएसआई (PSI) से केवल 2 से 3 पाउंड हवा कम हो, तो सड़क और टायर के बीच रोलिंग रेजिस्टेंस (घर्षण) बढ़ जाता है। इसके चलते इंजन को पहियों को घुमाने के लिए दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है, जिससे सीधे तौर पर 5 से 10 प्रतिशत माइलेज कम हो जाता है।
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बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक और अत्यधिक आइडलिंग: बड़े शहरों में भारी ट्रैफिक जाम के दौरान गाड़ी का लगातार स्टार्ट रहना (आइडलिंग) और बार-बार पहले-दूसरे गियर में चलना भारी मात्रा में पेट्रोल फूंकता है। ट्रैफिक सिग्नल पर या जाम में 1 मिनट से अधिक समय तक बिना गाड़ी बंद किए एसी चालू रखने से प्रति घंटे लगभग 0.8 से 1.2 लीटर पेट्रोल व्यर्थ जलता है।
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खराब मेंटेनेंस और गंदे स्पार्क प्लग या एयर फिल्टर: इंजन का एयर फिल्टर धूल और गंदगी से जाम होने पर इंजन को दहन (कम्बशन) के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके कारण इंजन 'रिच फ्यूल मिक्स' पर काम करने लगता है, यानी हवा कम और पेट्रोल ज्यादा जलता है। इसके अलावा पुराने इंजन ऑयल और खराब स्पार्क प्लग के कारण कम्बशन साइकिल अधूरी रह जाती है, जिससे माइलेज में सीधी गिरावट आती है।
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गाड़ी पर अतिरिक्त वजन और एसी का अत्यधिक इस्तेमाल: गाड़ी की डिग्गी में लगातार भारी गैर-जरूरी सामान लेकर चलने और रूफ रैक लगाने से एयरोडायनामिक ड्रैग बढ़ता है। साथ ही, भीषण गर्मी में एयर कंडीशनर को लगातार न्यूनतम तापमान पर चलाने से इंजन कंप्रेसर पर अत्यधिक लोड डालता है, जिससे माइलेज 10 से 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
पुराने वाहनों (BS4 और शुरुआती BS6) पर E20 का प्रभाव
उपभोक्ताओं के मन में यह भी सवाल था कि क्या E20 पेट्रोल उनके पुराने वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है। ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स के अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद निर्मित सभी नए वाहन (BS6 Phase 2 / RDE नॉर्म्स) पूरी तरह से E20 मैटेरियल-कम्पैटिबल हैं।
पुराने वाहनों (BS4 या उससे पहले के मॉडल) में रबर होज, फ्यूल लाइन्स और गास्केट पारंपरिक पेट्रोल के अनुसार डिजाइन किए गए थे। एथेनॉल में नमी सोखने (Hygroscopic nature) की प्रवृत्ति होती है, जो पुराने वाहनों के कुछ रबर पार्ट्स को लंबे समय में प्रभावित कर सकती है। हालांकि, आधुनिक ऑटोमोबाइल उद्योग ने स्पष्ट किया है कि नियमित रूप से गाड़ी चलाने और समय पर फ्यूल फिल्टर व पाइप्स की जांच करवाते रहने से पुराने वाहनों में भी किसी गंभीर खराबी का खतरा नगण्य हो जाता है।
गाड़ी का माइलेज 20 से 25% तक बढ़ाने के 4 आसान प्रैक्टिकल टिप्स
यदि आप अपने वाहन से अधिकतम ईंधन दक्षता (फ्यूल इकोनॉमी) हासिल करना चाहते हैं, तो इन आसान और प्रभावी ड्राइविंग आदतों को अपना सकते हैं:
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इकोनोमी स्पीड (45 से 60 किमी/घंटा) मेंटेन करें: हाईवे और शहर की खुली सड़कों पर गाड़ी को स्थिर गति में चलाएं। क्रूज कंट्रोल का समझदारी से उपयोग करें और गैर-जरूरी ओवरटेकिंग से बचें।
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सप्ताह में एक बार टायर प्रेशर की जांच: हमेशा ठंडे टायरों में (गाड़ी चलने से पहले) कंपनी द्वारा सुझाए गए मानक के अनुसार हवा भरवाएं। नाइट्रोजन का उपयोग टायर प्रेशर को स्थिर रखने में मददगार होता है।
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समय पर सर्विसिंग और सही ग्रेड का इंजन ऑयल: इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर और एयर फिल्टर को निर्माता द्वारा तय की गई समय-सीमा पर जरूर बदलें। सही विस्कोसिटी ग्रेड का सिंथेटिक ऑयल घर्षण कम करके माइलेज बढ़ाता है।
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ट्रैफिक में स्मार्ट ड्राइविंग: लाल बत्ती पर यदि 30 सेकंड से ज्यादा का इंतजार हो, तो इंजन बंद कर दें। ऑटो स्टार्ट-स्टॉप तकनीक वाले वाहनों में इस फीचर को हमेशा ऑन रखें।
हरित भविष्य और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम केवल एक वैकल्पिक ईंधन रणनीति नहीं है, बल्कि यह देश के कृषि क्षेत्र को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने वाला एक क्रांतिकारी कदम है। एथेनॉल खरीद से देश के लाखों गन्ना और अनाज उत्पादक किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।
सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि उपभोक्ता E20 पेट्रोल को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम या भ्रामक प्रचार में न आएं। वाहन की सही देखभाल, संतुलित ड्राइविंग व्यवहार और नियमित तकनीकी जांच अपनाकर E20 ईंधन के साथ भी बेहतरीन माइलेज और स्मूथ ड्राइविंग अनुभव हासिल किया जा सकता है।