पशु आहार की गुणवत्ता पर सरकार का सख्त एक्शन, अब BIS मानक और ISI मार्क अनिवार्य; मिलावट की तो रद्द होगा लाइसेंस और होगी जेल
देश के करोड़ों पशुपालकों, डेयरी किसानों और दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने बाजार में बिकने वाले सभी प्रकार के कंपाउंडेड कैटल फीड (पशु आहार) और मिनरल मिक्सचर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस (Bureau of Indian Standards - BIS) के मानकों का पालन और वैध लाइसेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया है। अब कोई भी निर्माता, वितरक या थोक व्यापारी बिना बीआईएस सर्टिफिकेशन और बिना वैध आईएसआई (ISI) मार्क के पशु आहार का निर्माण, भंडारण या बिक्री नहीं कर सकेगा। खुले बाजार में बिकने वाले घटिया, फफूंदयुक्त और मिलावटी चारे से दुधारू पशुओं की सेहत पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव और दूध में खतरनाक रसायनों की मौजूदगी की शिकायतों के बाद सरकार ने यह सख्त रुख अख्तियार किया है।
मिलावटी पशु आहार से पशुओं की सेहत और डेयरी उद्योग को हो रहा था भारी नुकसान
पिछले कई वर्षों से देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बिना किसी गुणवत्ता जांच के नकली और घटिया पशु आहार बेचे जाने की शिकायतें मिल रही थीं। कई गैर-पंजीकृत इकाइयां मुनाफा कमाने के चक्कर में चोकर और खल में घटिया भूसी, अखाद्य रसायन, अत्यधिक यूरिया और सड़े हुए अनाज की मिलावट कर रही थीं। इस प्रकार का दूषित आहार खाने से गाय और भैंसों में बांझपन, पाचन विकार, थनैला (मैस्टाइटिस) और गंभीर मेटाबॉलिक बीमारियां बढ़ रही थीं, जिससे उनका दूध उत्पादन अचानक गिर जाता था। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह थी कि दूषित चारे में मौजूद एफ्लाटॉक्सिन (Aflatoxin) और भारी धातुएं (Heavy Metals) पशु के दूध के जरिए इंसानी शरीर में पहुंच रही थीं, जो बच्चों और वयस्कों में कैंसर और लिवर की बीमारियों का कारण बन सकती हैं। सरकार के नए आदेश का सीधा उद्देश्य इस पूरी आपूर्ति श्रृंखला को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
क्या हैं पशु आहार के लिए तय BIS मानक (IS 2052 और IS 1664)
भारतीय मानक ब्यूरो ने पशु आहार के लिए विस्तृत वैज्ञानिक मानक निर्धारित किए हैं, जिनका पालन करना हर उत्पादक के लिए अनिवार्य होगा। कंपाउंडेड कैटल फीड के लिए मानक IS 2052 लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत चारे में क्रूड प्रोटीन (Crude Protein), क्रूड फाइबर, क्रूड फैट, नमी (Moisture) और कुल राख (Total Ash) की न्यूनतम व अधिकतम सीमा तय की गई है। इसके अलावा, चारे में जहरीले कवक से पैदा होने वाले एफ्लाटॉक्सिन बी1 (Aflatoxin B1) की अधिकतम स्वीकार्य सीमा बेहद सख्त (अधिकतम 20 से 50 पीपीबी) रखी गई है। वहीं पशुओं के लिए बनने वाले मिनरल मिक्सचर (खनिज मिश्रण) के लिए मानक IS 1664 का पालन अनिवार्य किया गया है, ताकि पशुओं को कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक, तांबा, आयोडीन और आयरन का सही अनुपात मिल सके। नए नियमों के तहत हर बोरी पर पोषण तत्व, बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी और बीआईएस लाइसेंस नंबर स्पष्ट रूप से प्रिंट होना चाहिए।
बिना लाइसेंस और मानक तोड़ा तो होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCO) का उल्लंघन करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। बीआईएस अधिनियम, 2016 (BIS Act, 2016) की धाराओं के तहत बिना वैध लाइसेंस या फर्जी आईएसआई मार्क का उपयोग कर पशु आहार बेचने को एक गंभीर संज्ञेय अपराध माना गया है। यदि कोई मिल मालिक या व्यापारी घटिया या गैर-प्रमाणित पशु आहार बेचते पकड़ा जाता है, तो उसकी निर्माण इकाई को तत्काल प्रभाव से सील किया जा सकता है। दोषियों के खिलाफ भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ दो साल तक की जेल की सजा का कड़ा कानूनी प्रावधान है। इसके अलावा, जिला स्तर पर पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त प्रवर्तन टीमें समय-समय पर गोदामों और दुकानों पर छापेमारी कर औचक नमूने (रैंडम सैंपलिंग) लेंगी। लैब टेस्टिंग में गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए जाने वाले माल को तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।
पशु आहार निर्माताओं को कैसे मिलेगा BIS लाइसेंस और सर्टिफिकेशन
पशु आहार बनाने वाली सभी कंपनियों और स्थानीय मिलों को तय समय सीमा के भीतर बीआईएस पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और बहु-स्तरीय रखी गई है:
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दस्तावेजीकरण व आवेदन: निर्माता को अपनी फैक्ट्री रजिस्ट्रेशन, मशीनरी का विवरण, रॉ मैटेरियल की सूची और क्वालिटी कंट्रोल प्लान बीआईएस के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
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फैक्ट्री का भौतिक निरीक्षण: बीआईएस के अधिकृत तकनीकी अधिकारी निर्माण इकाई का दौरा करेंगे और वहां स्वच्छता, कच्चे माल के भंडारण और इन-हाउस टेस्टिंग सुविधाओं का ऑडिट करेंगे।
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लैब टेस्टिंग: उत्पादन इकाई से पशु आहार के नमूने सील कर बीआईएस-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे, जहां सभी रासायनिक व पोषण मानकों की जांच होगी।
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लाइसेंस और आईएसआई मार्क आवंटन: प्रयोगशाला रिपोर्ट में सभी पैरामीटर पास होने पर ही निर्माता को आईएसआई मार्क का उपयोग करने का वैध लाइसेंस जारी किया जाएगा।
किसानों और डेयरी पालकों को सीधे तौर पर क्या होगा फायदा
सरकार के इस कदम से देश के करोड़ों छोटे और सीमांत डेयरी किसानों को सीधा आर्थिक लाभ होगा। जब पशुओं को बीआईएस प्रमाणित और संतुलित पोषक तत्वों से भरपूर आहार मिलेगा, तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और वे बार-बार बीमार नहीं पड़ेंगे, जिससे किसानों का पशु चिकित्सा (डॉक्टर और दवाइयों) पर होने वाला अनावश्यक खर्च घट जाएगा। संतुलित पोषण मिलने से गाय और भैंसों के दूध की गुणवत्ता, फैट और एसएनएफ (SNF) में सुधार होगा, जिससे डेयरी सोसायटियों और निजी कंपनियों से किसानों को दूध का बेहतर भाव मिलेगा। इसके साथ ही, पशुओं का प्रजनन चक्र नियमित रहेगा और बांझपन की समस्या काफी हद तक खत्म होगी।
पशुपालक खरीदारी करते समय कैसे पहचानें असली और नकली पशु आहार
पशुपालन विभाग ने सभी किसानों और पशुपालकों से अपील की है कि वे बाजार से पशु आहार खरीदते समय सतर्कता बरतें और केवल अधिकृत व प्रमाणित उत्पाद ही खरीदें। खरीदारी करते समय इन बिंदुओं का विशेष ध्यान रखें:
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ISI मार्क और CM/L नंबर जांचें: पशु आहार की हर बोरी पर बीआईएस का मानक चिन्ह (ISI मार्क) और उसके ठीक नीचे सात या आठ अंकों का लाइसेंस नंबर (CM/L नंबर) अनिवार्य रूप से अंकित होना चाहिए।
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BIS Care App से सत्यापन: किसान अपने स्मार्टफोन में मुफ्त सरकारी 'BIS Care' मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप में 'Verify License Details' विकल्प में जाकर बोरी पर लिखे लाइसेंस नंबर को डालकर यह जांच सकते हैं कि कंपनी का लाइसेंस असली और सक्रिय है या नहीं।
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सील और लेबलिंग: खुली या बिना ब्रांड वाली बोरियों में बिकने वाले सस्ते चारे को खरीदने से बचें। बोरी पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी, प्रोटीन व फैट का प्रतिशत और निर्माता का पूरा पता अवश्य चेक करें। यदि कोई दुकानदार गैर-प्रमाणित या संदिग्ध आहार बेचता मिले, तो किसान सीधे बीआईएस पोर्टल या जिला पशुपालन अधिकारी को इसकी गोपनीय शिकायत दर्ज करा सकते हैं।