CBG Price Support ₹105/Kg: कंप्रेस्ड बायोगैस के लिए ₹105 प्रति किलो का भाव तय, 10 साल तक प्राइस सपोर्ट देगी सरकार; ₹23,731 करोड़ की योजना मंजूर
देश में स्वच्छ ऊर्जा, सतत कृषि और पराली व कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने जैव ईंधन (बायोगैस) क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। गोवर्धन (GOBARdhan - Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) पहल के अंतर्गत सरकार ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG / Bio-CNG) का एडमिनिस्टर्ड खरीद मूल्य ₹2,110 प्रति मीट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) निर्धारित किया है। 95% मीथेन शुद्धता के आधार पर यह दर लगभग ₹105 प्रति किलोग्राम के बराबर बैठती है। सबसे खास बात यह है कि केंद्र सरकार इस मूल्य पर कम से कम 10 वर्षों (वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36) तक मूल्य स्थिरता और सरकारी प्राइस सपोर्ट प्रदान करेगी।
₹23,731 करोड़ का विशाल आउटले: 10 गुना तक CBG उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित इस समग्र नीतिगत ढांचे के तहत कुल ₹23,731 करोड़ के बजटीय आवंटन को हरी झंडी दी गई है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य आगामी दशक में घरेलू स्तर पर कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन को 10 गुना तक बढ़ाना है। इस योजना को आगामी 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें बायोमास एकत्रीकरण, बुनियादी ढांचे का निर्माण, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन को एक ही राष्ट्रीय नीतिगत फ्रेमवर्क के तहत लाया गया है।
ग्राहकों पर बोझ रोकने के लिए ₹10 प्रति किलो का अफोर्डेबिलिटी सपोर्ट
उत्पादकों को आकर्षक रिटर्न देने के साथ-साथ सरकार ने आम जनता और अंतिम उपभोक्ताओं के हितों का भी पूरा ध्यान रखा है:
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₹10/किग्रा का सरकारी अनुदान: उत्पादकों को ₹105/किग्रा का पारिश्रमिक मूल्य सुनिश्चित कराने के बावजूद आम वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक भार न पड़े, इसके लिए सरकार अपनी तरफ से ₹10 प्रति किलोग्राम का 'अफोर्डेबिलिटी सपोर्ट' (Affordability Support) प्रदान करेगी।
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संतुलित प्राइसिंग मॉडल: यह व्यवस्था CBG निर्माताओं के लिए प्लांट की व्यावसायिक व्यवहार्यता (Commercial Viability) बनाए रखेगी और खुदरा बाजार में इसे पारंपरिक सीएनजी और पीएनजी के मुकाबले किफायती विकल्प बनाए रखेगी।
नए ग्रीनफील्ड CBG प्लांट्स को ₹2 करोड़ प्रति TPD तक की कैपिटल सब्सिडी
बायो-सीएनजी उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने पूंजीगत सहायता (Capital Subsidy) का भी प्रावधान किया है:
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ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को इंसेंटिव: योग्य नए (Greenfield) प्रोजेक्ट्स को उनकी स्थापित क्षमता के आधार पर ₹2 करोड़ प्रति टन प्रतिदिन (TPD) तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
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एग्रीगेशन और वैल्यू एडिशन कवर: यह आर्थिक सहायता केवल प्लांट मशीनरी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि कृषि अवशेष व गोबर इकट्ठा करने के लॉजिस्टिक्स और जैविक खाद (FOM/LFOM) की प्रोसेसिंग व पैकेजिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी मान्य होगी।
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ब्राउनफील्ड प्लांट्स को अवसर: क्षमता विस्तार (Capacity Expansion) करने वाले मौजूदा बायोगैस प्लांट्स को भी शर्तों के साथ इस योजना में शामिल किया जाएगा।
100% खरीद की गारंटी: सिटी गैस कंपनियों के लिए ब्लेंडिंग अनिवार्य
बायोगैस उत्पादकों की सबसे बड़ी चिंता उत्पादित गैस की नियमित और गारंटीड बिक्री को लेकर रहती थी। सरकार ने इस जोखिम को दूर करने के लिए अनिवार्य ब्लेंडिंग व्यवस्था लागू की है:
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सिटी गैस कंपनियों द्वारा अनिवार्य खरीद: सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को ऑटोमोबाइल सीएनजी (CNG Transport) और घरेलू पाइप नेचुरल गैस (Domestic PNG) में अनिवार्य रूप से CBG मिलाना होगा।
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ब्लेंडिंग का चरणबद्ध लक्ष्य:
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FY 2026-27: 3 प्रतिशत ब्लेंडिंग अनिवार्य
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FY 2027-28: 4 प्रतिशत ब्लेंडिंग अनिवार्य
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FY 2028-29 से आगे: 5 प्रतिशत या उससे अधिक ब्लेंडिंग अनिवार्य
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पाइपलाइन कनेक्टिविटी: ग्रिड के पास स्थित प्लांट्स से गैस को सीधे मुख्य गैस ग्रिड में इंजेक्ट करने की तकनीकी सुविधा दी जाएगी।
किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को होंगे ये बहुआयामी फायदे
सरकार के इस कदम को ग्रामीण भारत के लिए 'गेम-चेंजर' माना जा रहा है:
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पराली और वेस्ट से आमदनी: धान की पराली (Paddy Straw), गन्ने की खोई (Press Mud), मवेशियों का गोबर और शहरों का गीला कचरा अब फेंका या जलाया नहीं जाएगा, जिससे किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को अतिरिक्त आमदनी होगी।
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जैविक खाद का उत्पादन: CBG निर्माण के उप-उत्पाद के रूप में भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली फेर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) निकलेगी, जो खेतों में रासायनिक उर्वरकों (यूरिया/डीएपी) पर निर्भरता घटाएगी।
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विदेशी मुद्रा की बचत और डीकार्बोनाइजेशन: भारत अपनी जरूरत की लगभग 50% प्राकृतिक गैस आयात करता है। घरेलू बायोगैस का उत्पादन बढ़ने से क्रूड ऑयल और एलएनजी आयात बिल में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होगी।