रेस्टोरेंट बिल में जबरन सर्विस चार्ज वसूलना पड़ा भारी, ग्राहक की शिकायत पर CCPA का कड़ा एक्शन

रेस्टोरेंट बिल में जबरन सर्विस चार्ज वसूलना पड़ा भारी, ग्राहक की शिकायत पर CCPA का कड़ा एक्शन

देशभर के होटल और रेस्तरां उद्योग के लिए एक बहुत बड़ी और चेतावनी भरी खबर सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि जब लोग परिवार या दोस्तों के साथ बाहर डिनर या लंच करने जाते हैं, तो खाने के बिल में खाने-पीने के सामान के दाम पर वैट और जीएसटी के अलावा एक अतिरिक्त राशि 'सर्विस चार्ज' (Service Charge) के रूप में जोड़ दी जाती है। कई बार ग्राहक इस छिपे हुए चार्ज को बिना समझे भुगतान कर देते हैं, लेकिन अब ऐसा करना रेस्तरां संचालकों को बहुत भारी पड़ने लगा है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक ऐसे ही मामले में सख्त रुख अपनाया है। एक रेस्तरां द्वारा खाने के बिल में जबरन सर्विस चार्ज वसूले जाने के खिलाफ जब एक जागरूक ग्राहक ने आवाज उठाई और आधिकारिक मंच पर शिकायत दर्ज कराई, तो सीसीपीए ने इस मामले की गहन जांच की। जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित रेस्तरां पर पूरे 10,000 रुपये का तगड़ा जुर्माना ठोक दिया गया है। इस ऐतिहासिक और सख्त फैसले के बाद से होटल और रेस्तरां इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह मामला देश के सभी खाने-पीने के कारोबारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उपभोक्ताओं की जेब पर जबरन डाका नहीं डाला जा सकता।

क्या कहता है कानून? जानें सर्विस चार्ज वसूलने पर सरकार और सीसीपीए के कड़े नियम

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, देश का कोई भी होटल या रेस्तरां अपने ग्राहकों से बिल में सर्विस चार्ज या सेवा शुल्क देने के लिए अपनी मर्जी से दबाव नहीं बना सकता है। कानून के मुताबिक, रेस्तरां में मिलने वाली सेवा (Service) पूरी तरह से वैकल्पिक होती है और यह पूरी तरह से ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करती है कि वह वेटर या स्टाफ की सर्विस से खुश होकर अपनी स्वेच्छा से टिप या टिप जैसा कोई शुल्क देना चाहता है या नहीं। रेस्तरां संचालक बिल में इस शुल्क को अपने आप (Pre-added) जोड़कर ग्राहकों से वसूल नहीं सकते हैं। अगर कोई रेस्तरां बिल जनरेट करते समय उसमें पहले से ही सर्विस चार्ज जोड़कर भेजता है, तो इसे उपभोक्ताओं के अधिकारों का सीधा उल्लंघन और अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) माना जाता है। इससे पहले भी सरकार और उपभोक्ता आयोग कई बार सार्वजनिक रूप से चेतावनी जारी कर चुके हैं कि होटल और रेस्तरां अपने मैन्यू कार्ड या बिलिंग सिस्टम में इस तरह के मनमाने शुल्क को शामिल नहीं कर सकते। इसके बावजूद कई जगहों पर नियमों को ताक पर रखकर ग्राहकों को चूना लगाने का काम किया जा रहा था, जिस पर अब लगाम कसने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

ग्राहक ने दिखाई हिम्मत, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर ऐसे दर्ज कराई अपनी शिकायत

यह पूरा मामला एक ऐसे सजग ग्राहक से जुड़ा है जिसने रेस्तरां की मनमानी और जबरन वसूली के खिलाफ चुप बैठने के बजाय कानूनी रास्ता चुना। जब उस ग्राहक ने डिनर के बाद रेस्तरां का फाइनल बिल देखा, तो उसने पाया कि खाने और टैक्स के अलावा उसमें सर्विस चार्ज भी जोड़ दिया गया है। ग्राहक ने जब इसका विरोध किया और रेस्तरां प्रबंधन से इसे हटाने के लिए कहा, तो उन्होंने इसे अनिवार्य शुल्क बताकर हटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद ग्राहक ने बिना घबराए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) और सीसीपीए के ऑनलाइन पोर्टल का सहारा लिया। ग्राहक ने रेस्तरां के उस बिल की कॉपी और अन्य पुख्ता सबूतों के साथ पूरी शिकायत दर्ज कराई। सीसीपीए ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक्शन लिया और मामले की फाइल खोल दी। जांच के दौरान रेस्तरां प्रबंधन को दोषी पाया गया क्योंकि वे यह साबित नहीं कर पाए कि उन्होंने ग्राहक की सहमति से यह चार्ज लिया था। इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि यदि उपभोक्ता जागरूक हो जाए और सही मंच पर अपनी आवाज उठाए, तो बड़ी से बड़ी मनमानी करने वाले संस्थानों को भी कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सकता है।

सीसीपीए की सख्त चेतावनी, बिल में सर्विस चार्ज जोड़ने पर अब भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने इस मामले में केवल एक रेस्तरां पर जुर्माना लगाकर ही इतिश्री नहीं की है, बल्कि देश के समस्त होटल, रेस्तरां, ढाबा और फूड चेन संचालकों को एक बेहद कड़ी चेतावनी भी जारी कर दी है। सीसीपीए ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में देश के किसी भी हिस्से में कोई भी रेस्तरां अपने ग्राहकों के खाने के बिल में बिना उनकी स्पष्ट सहमति के सर्विस चार्ज जोड़ते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ और भी अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस तरह के मामलों में न केवल भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वाले संस्थानों के लाइसेंस रद्द करने या उनके खिलाफ कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का यह कदम देश के करोड़ों आम उपभोक्ताओं को राहत देने वाला है जो अक्सर रेस्तरां में जाने पर इस तरह की छुपी हुई लूट का शिकार हो जाते थे। प्राधिकरण ने सभी रेस्तरां मालिकों को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे अपने काउंटर और मेन्यू कार्ड पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें कि सर्विस चार्ज देना पूरी तरह से वैकल्पिक है और यह ग्राहकों की मर्जी पर निर्भर करता है।

उपभोक्ताओं के लिए खास सलाह: कैसे करें सर्विस चार्ज के खिलाफ विरोध और कहां करें शिकायत

यदि आप भी अक्सर परिवार या दोस्तों के साथ बाहर रेस्तरां में खाना खाने जाते हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि अपने अधिकारों की रक्षा कैसे की जाए। अगर आपके भी किसी रेस्तरां के बिल में सर्विस चार्ज जोड़कर दिया जाता है, तो आपको चुपचाप उसका भुगतान करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। आप तुरंत रेस्तरां के मैनेजर या मालिक से बात करें और उन्हें शालीनता से बताएं कि सीसीपीए के नियमों के अनुसार सर्विस चार्ज देना अनिवार्य नहीं है और वे इसे तुरंत बिल से हटाएं। अधिकांश रेस्तरां इस विरोध के बाद बिल को ठीक कर देते हैं और सर्विस चार्ज हटा लेते हैं। लेकिन यदि रेस्तरां प्रबंधन आपकी बात मानने से इनकार कर देता है और जबरन भुगतान की मांग करता है, तो आप उस बिल की फोटो खींच लें और डिजिटल पेमेंट का रिकॉर्ड सुरक्षित रख लें। इसके बाद आप भारत सरकार के नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पोर्टल, 'राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन' ऐप या सीधे सीसीपीए (CCPA) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आपकी एक छोटी सी शिकायत और जागरूकता देश भर में हो रही इस तरह की उपभोक्ता लूट को रोकने में बहुत बड़ा योगदान दे सकती है।