चलती ट्रेन में आग या धुआं: घबराहट नहीं, सही समय पर सही एक्शन ही बचाएगा जान
भारतीय रेल देश की जीवनरेखा है, जिसमें प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक यात्री सफर करते हैं। सफर के दौरान सुरक्षा रेलवे और यात्रियों दोनों की पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन कभी-कभी तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट, पैंट्री कार में चूल्हा जलने, सिगरेट की चिंगारी या यात्रियों द्वारा ले जाए गए ज्वलनशील पदार्थों की वजह से ट्रेन के कोच में आग लगने या जहरीला धुआं भरने जैसी अप्रत्याशित आपात स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसी किसी भी आकस्मिक दुर्घटना के समय सबसे बड़ा दुश्मन आग नहीं, बल्कि बोगी के भीतर फैलने वाली 'अंधी घबराहट' (Panic) और भगदड़ होती है। बोगी के बंद वातावरण में जब अचानक सायरन बजता है या धुआं भरता है, तो लोग दिशा भूल जाते हैं और एक-दूसरे पर गिरकर जान गंवा बैठते हैं। भारतीय रेलवे और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगने के शुरुआती 3 से 5 मिनट 'गोल्डन मिनट्स' होते हैं। यदि यात्री संयम बनाए रखते हुए सही और वैज्ञानिक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करें, तो न केवल अपनी जान बचा सकते हैं बल्कि सैकड़ों सह-यात्रियों को भी सुरक्षित बाहर निकाल सकते हैं।
अलार्म चेन पुलिंग (ACP): कब, कैसे खींचें और पुल या सुरंग में ट्रेन रोकने से क्यों बचें?
जैसे ही कोच में आग की लपटें या घना धुआं दिखाई दे, पहला और सबसे बुनियादी कदम ट्रेन को तुरंत रोकने का प्रयास करना होता है। हर बोगी में खिड़कियों के पास और कोच के दोनों सिरों पर लाल रंग की आपातकालीन अलार्म चेन (Alarm Chain) लगी होती है। इसे नीचे की ओर पूरी ताकत से खींचें। अलार्म चेन खींचते ही ट्रेन के ब्रेक पाइप का प्रेशर रिलीज होता है और लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) व ट्रेन मैनेजर (गार्ड) को केबिन में ऑडियो-विजुअल अलर्ट मिल जाता है, जिससे ट्रेन अपने आप रुकने लगती है।
हालांकि, चेन खींचते समय एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी सावधानी बरतनी चाहिए। यदि ट्रेन किसी लंबी नदी के पुल (Railway Bridge), संकरे वायडक्ट या गहरी सुरंग (Tunnel) के भीतर से गुजर रही हो, तो वहां चेन खींचने से बचें। पुल या सुरंग के अंदर ट्रेन रुकने पर दोनों तरफ निकलने का रास्ता नहीं होता और बचाव कार्य लगभग असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में ट्रेन को पहले पुल या सुरंग से बाहर निकलने दें और खुले मैदान या किसी स्टेशन के नजदीक आते ही तुरंत चेन खींचें। यदि आग विकराल हो, तो तुरंत कोच अटेंडेंट या टीटीई के जरिए गार्ड तक वॉकी-टॉकी से संदेश पहुंचाएं।
हर कोच में मौजूद अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher): जानिए कहां रखा होता है और 'PASS' फॉर्मूले से कैसे चलाएं
भारतीय रेलवे के सभी वातानुकूलित (AC) कोचों, पैंट्री कार, ब्रेक वैन और गार्ड के डिब्बे में अनिवार्य रूप से ड्राई केमिकल पाउडर (DCP) या आधुनिक एबीसी (ABC) टाइप फायर एक्सटिंग्विशर लगाए जाते हैं। स्लीपर और जनरल कोचों में भी ये दोनों सिरों पर टॉयलेट के पास या कोच अटेंडेंट की सीट के ऊपर लगे होते हैं। यदि आग शुरुआती दौर में हो—जैसे किसी चार्जर सॉकेट, पर्दे या सीट के नीचे छोटी सी चिंगारी—तो बिना समय गंवाए कांच तोड़कर या ब्रैकेट खोलकर इस लाल रंग के सिलेंडर को निकालें।
अग्निशामक यंत्र को चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य 'PASS' फॉर्मूले का पालन करें:
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P (Pull): सिलेंडर के हैंडल पर लगी सुरक्षा पिन और सील को जोर से खींचकर निकालें।
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A (Aim): नोजल या पाइप के मुंह को आग की लपटों के ऊपर नहीं, बल्कि आग की जड़ यानी आधार (Base of the fire) की तरफ तानें।
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S (Squeeze): सिलेंडर के ऊपरी लीवर या हैंडल को पूरी ताकत से दबाएं ताकि रासायनिक पाउडर बाहर निकले।
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S (Sweep): नोजल को आग की जड़ पर झाड़ू की तरह दाएं-बाएं (Side to Side) घुमाते हुए छिड़काव करें। याद रखें कि बिजली के उपकरणों या तारों में लगी आग पर कभी भी पानी न डालें, हमेशा केमिकल पाउडर या रेत की बाल्टी का ही उपयोग करें।
जहरीले धुएं से कैसे बचें? जमीन पर रेंगें और गीले कपड़े से ढकें नाक-मुंह
ट्रेन हादसों के वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि आग लगने की घटनाओं में 80 प्रतिशत मौतें जलने से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं (Toxic Smoke) और दम घुटने (Asphyxiation) से होती हैं। ट्रेनों की सीटों में इस्तेमाल होने वाला रेक्सिन, फोम, प्लास्टिक पैनल्स और इंसुलेशन मटीरियल जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी घातक गैसें छोड़ते हैं।
इस स्थिति में जान बचाने के लिए दो अचूक नियम याद रखें:
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हमेशा जमीन के करीब रहें (Crawl Low): भौतिक विज्ञान के नियम के अनुसार गर्म हवा और जहरीला धुआं तेजी से ऊपर की ओर उठकर कोच की छत पर जमा होता है। फर्श से 1 से 2 फीट की ऊंचाई पर ताजी ऑक्सीजन की परत सबसे ज्यादा समय तक बनी रहती है। इसलिए सीधे खड़े होकर दौड़ने के बजाय झुककर चलें या घुटनों और कोहनियों के बल रेंगते हुए आगे बढ़ें।
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गीले कपड़े का मास्क बनाएं: अपनी पानी की बोतल से रुमाल, गमछा, तौलिया, दुपट्टा या टी-शर्ट का कोई हिस्सा पूरी तरह गीला कर लें और उसे अपनी नाक और मुंह पर मजबूती से दबा लें। गीला कपड़ा एक प्राकृतिक एयर फिल्टर का काम करता है, जो गर्म कालिख, धुएं के जहरीले कणों और फेफड़ों को झुलसाने वाली गर्म गैसों को रोक लेता है।
इमरजेंसी विंडो (Emergency Window) का इस्तेमाल: लाल निशान वाली खिड़की को कैसे खोलें?
जब कोच के दोनों मुख्य दरवाजे धुएं या आग के कारण ब्लॉक हो जाएं, तो बाहर निकलने का एकमात्र सुरक्षित जीवनरक्षक रास्ता 'इमरजेंसी एग्जिट विंडो' होता है। भारतीय रेलवे के हर कोच में 4 आपातकालीन खिड़कियां होती हैं, जिन्हें लाल रंग के फ्लोरोसेंट पेंट और लाल स्टिकर से चिह्नित किया जाता है।
आपातकालीन खिड़की से बाहर निकलने का सही तरीका:
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लाल निशान वाली खिड़की के पास जाएं। खिड़की के नीचे एक लाल रंग का हैंडल या लीवर लगा होता है, जो वायर सील से बंधा होता है।
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इस सुरक्षा सील को झटके से तोड़ें और हैंडल को ऊपर की ओर खींचें।
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हैंडल खींचते ही खिड़की की जाली या लोहे की ग्रिल बाहर या ऊपर की तरफ खुल जाती है।
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यदि एसी कोच है और खिड़की भारी शीशे से सील है, तो बोगी के कोने में लगे इमरजेंसी हैमर (Emergency Hammer) से शीशे के चारों कोनों पर वार करके उसे तोड़ दें।
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खिड़की से कूदने से पहले सुनिश्चित करें कि ट्रेन पूरी तरह रुक चुकी है। चलती ट्रेन से कभी न कूदें।
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खिड़की से उतरते समय पहले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को बाहर निकालें और पटरियों के दोनों तरफ आने-जाने वाली अन्य ट्रेनों पर नजर रखें ताकि किसी दूसरी पटरी पर आ रही ट्रेन की चपेट में न आएं।
वेस्टिब्यूल दरवाजे बंद करें और 139 पर दें सूचना: आग को दूसरे डिब्बे में फैलने से रोकें
आग को पूरी ट्रेन में फैलने से रोकने के लिए सबसे प्रभावी कदम 'कंपार्टमेंटलाइजेशन' (Compartmentalization) होता है। यदि आग किसी एक बोगी में बेकाबू हो रही है, तो दोनों कोचों को जोड़ने वाले वेस्टिब्यूल (गलियारे) के भारी धातुई दरवाजे को तुरंत बंद कर दें और उसकी कुंडी लगा दें। यह दरवाजा एक फायर-बैरियर की तरह काम करता है, जिससे आग की लपटें और धुआं अगले कोच में नहीं घुस पाता। इसके साथ ही, कोच में मौजूद ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS), टिकट परीक्षक (Tट्रेन यात्रा के दौरान आग या धुआं दिखे तो क्या करें? जानें भारतीय रेलवे के जरूरी लाइफ-सेविंग सेफ्टी टिप्स और इमरजेंसी प्रोटोकॉल
Meta Description: ट्रेन में सफर के दौरान आग या धुआं दिखने पर घबराएं नहीं। रेलवे के जरूरी सेफ्टी नियमों, अलार्म चेन खींचने के सही तरीके, हेल्पलाइन 139 और इमरजेंसी विंडो के इस्तेमाल से जुड़ी पूरी गाइड। (Indian Railways Fire Safety Tips)
भारतीय रेल (Indian Railways) में सफर के दौरान किसी कोच में अचानक धुआं उठना या आग लगना एक बेहद संवेदनशील आपात स्थिति है। ऐसी स्थिति में घबराने या भगदड़ मचाने के बजाय त्वरित और सही कदम उठाना ही यात्रियों की जान बचा सकता है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के अनुसार, आपात स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत इन सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए।
धुआं या आग दिखते ही तुरंत उठाएं ये 5 जरूरी कदम
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अलार्म चेन खींचकर ट्रेन रोकें (Alarm Chain Pulling - ACP): डिब्बे में धुआं या चिंगारी देखते ही बिना देर किए अलार्म चेन खींचें। हालांकि, यदि संभव हो तो ध्यान रखें कि ट्रेन किसी लंबी सुरंग (tunnel) या ऊंचे पुल (bridge) पर न रुके, क्योंकि खुले ट्रैक पर रेस्क्यू और इवैक्यूएशन (निकास) अधिक सुरक्षित तरीके से हो पाता है।
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कोच में मौजूद फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करें: सभी एसी (AC) और नए एलएचबी (LHB) कोचों में दरवाजों के पास या अटेंडेंट केबिन में ड्राई केमिकल पाउडर (DCP) अग्निशामक यंत्र लगे होते हैं। इसकी सील तोड़कर पिन निकालें और नोजल को आग की लपटों के निचले हिस्से (base) की तरफ रखकर लीवर दबाएं।
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इमरजेंसी विंडो (Emergency Window) खोलें: यदि आग या धुएं के कारण कोच के मुख्य दरवाजे तक पहुंचना संभव न हो, तो कोच के मध्य में स्थित लाल रंग से चिह्नित इमरजेंसी खिड़की का उपयोग करें। इसका हैंडल खींचकर या पास में लगे सेफ्टी हैमर से शीशा तोड़कर सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है।
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फर्श के करीब झुककर चलें (Crawl Low): आग की लपटों से ज्यादा खतरनाक जहरीला धुआं (toxic smoke) और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस होती है। धुआं हमेशा ऊपर की ओर उठता है, इसलिए सांस लेने के लिए फर्श के करीब झुकें या रेंगते हुए आगे बढ़ें। मुंह और नाक को गीले रुमाल या पानी से भीगे कपड़े से अच्छी तरह ढकें।
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विद्युत आपूर्ति (Power Supply) कटवाएं: शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग को तेजी से फैलने से रोकने के लिए ऑन-बोर्ड स्टाफ या टीटीई (TTE) से कहकर कोच का मुख्य सर्किट ब्रेकर (MCB) तुरंत ट्रिप करवाएं।
हेल्पलाइन 139 और रेलमदद पर तुरंत दें सूचना
घटना की जानकारी तत्काल ट्रेन में मौजूद टिकट चेकर, कोच अटेंडेंट या गार्ड को दें। इसके साथ ही तकनीकी और मेडिकल सहायता के लिए इन माध्यमों का प्रयोग करें:
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डायल 139: रेलवे की 24x7 ऑल-इन-वन हेल्पलाइन 139 पर कॉल करके अपनी ट्रेन संख्या, बोगी नंबर और वर्तमान लोकेशन साझा करें।
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रेलमदद (RailMadad): रेलमदद ऐप या वेब पोर्टल के माध्यम से तुरंत 'Security/Medical Emergency' का अलर्ट भेजें, जिससे अगले स्टेशन पर फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीम पहले से तैयार रहे।
सफर के दौरान क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)
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सामान का मोह न करें: आपात स्थिति में सूटकेस या भारी बैग निकालने के चक्कर में कीमती समय बर्बाद न करें; जीवन बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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भगदड़ (Stampede) से बचें: कोच के संकरे गलियारे में चिल्लाने या धक्का-मुक्की करने से निकास द्वार जाम हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को पहले निकलने दें।
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ज्वलनशील वस्तुएं साथ न ले जाएं: रेलवे अधिनियम की धारा 164 (Section 164 of Railways Act) के तहत ट्रेन में गैस सिलेंडर, पेट्रोल, केरोसिन, तेजाब या पटाखे ले जाना दंडनीय अपराध है, जिसके तहत 3 साल तक की जेल हो सकती है।
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कोच या टॉयलेट में धूम्रपान न करें: ट्रेन में बीड़ी, सिगरेट पीना या जलती तीली/माचिस कचरे में फेंकना सख्त प्रतिबंधित है। ऐसा करते पाए जाने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाती है।
रेल यात्रा के दौरान यात्रियों की सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी अनहोनी की आशंका होते ही समय रहते सही कदम उठाने से बड़े हादसों को टाला जा सकता है।