म्यूचुअल फंड में निवेशकों का भरोसा मजबूत: इक्विटी फंड्स में आया 29,329 करोड़ का भारी निवेश, डेट से निकले 8,127 करोड़ रुपये

 म्यूचुअल फंड में निवेशकों का भरोसा मजबूत: इक्विटी फंड्स में आया 29,329 करोड़ का भारी निवेश, डेट से निकले 8,127 करोड़ रुपये

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय खुदरा निवेशकों का भरोसा घरेलू शेयर बाजार और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर लगातार मजबूत बना हुआ है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी-उन्मुख म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश (Net Inflow) 19 प्रतिशत उछलकर 29,329 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले चार महीनों में इक्विटी फंड्स में दर्ज किया गया सबसे बड़ा इनफ्लो है। इसके ठीक उलट, फिक्स्ड इनकम और सुरक्षित माने जाने वाले डेट ओरिएंटेड फंड्स (Debt Funds) से निवेशकों ने 8,127 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है।

स्मॉल और मिड-कैप फंड्स में बंपर खरीदारी, लार्ज-कैप से दूरी

इक्विटी सेगमेंट में आए 29,329 करोड़ रुपये के इनफ्लो का सबसे बड़ा हिस्सा स्मॉल-कैप और मिड-कैप कैटेगरीज की झोली में गया है। आंकड़ों के मुताबिक:

  • स्मॉल-कैप फंड्स (Small-Cap): इस कैटेगरी में सबसे अधिक 7,973 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जिससे साफ है कि निवेशक उच्च रिटर्न के लिए जोखिम उठाने को तैयार हैं।

  • मिड-कैप फंड्स (Mid-Cap): मिड-कैप योजनाओं में 6,989 करोड़ रुपये का तगड़ा निवेश दर्ज हुआ, जो इस चक्र का अब तक का सबसे मजबूत मासिक स्तर है।

  • फ्लेक्सी-कैप फंड्स (Flexi-Cap): डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो वाले फ्लेक्सी-कैप फंड्स में भी 5,059 करोड़ रुपये का सकारात्मक प्रवाह देखने को मिला।

  • लार्ज-कैप फंड्स (Large-Cap): इसके विपरीत, देश की शीर्ष कंपनियों में निवेश करने वाले लार्ज-कैप फंड्स पर बिकवाली का दबाव रहा और इस श्रेणी से 1,147 करोड़ रुपये का शुद्ध आउटफ्लो दर्ज किया गया।

एसआईपी (SIP) ने बनाया नया कीर्तिमान, 32,297 करोड़ का ऐतिहासिक स्तर

भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग की रीढ़ बन चुकी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। खुदरा निवेशकों द्वारा मासिक एसआईपी के जरिए होने वाला योगदान रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

इसके साथ ही देश में कुल एक्टिव एसआईपी खातों (SIP Accounts) की संख्या ने 10 करोड़ (10.02 करोड़) का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। खुदरा निवेशकों की यह अनुशासित बचत ही घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) को विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के सामने मजबूती से टिके रहने की ताकत दे रही है।

डेट फंड्स से 8,127 करोड़ रुपये की निकासी क्यों हुई?

जहां इक्विटी फंड्स में जोरदार तेजी रही, वहीं फिक्स्ड इनकम यानी डेट फंड्स से 8,127 करोड़ रुपये बाहर निकल गए। बाजार जानकारों के अनुसार:

  1. कॉरपोरेट और संस्थागत नकदी चक्र: डेट फंड्स से निकासी का मुख्य कारण कॉरपोरेट्स और वित्तीय संस्थानों द्वारा टैक्स भुगतान, तिमाही एडवांस टैक्स देनदारियों और तरलता की जरूरतों के चलते लिक्विड व ओवरनाइट फंड्स से पैसा निकालना है।

  2. इक्विटी की ओर रुझान: ब्याज दरों के स्थिर रहने और शेयर बाजार में बेहतर रिटर्न की उम्मीद के चलते कई एचएनआई (HNI) और खुदरा निवेशक फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स से मुनाफावसूली कर इक्विटी व हाइब्रिड फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं।

इंडस्ट्री का कुल एयूएम 87 लाख करोड़ के पार

इक्विटी में लगातार 66वें महीने सकारात्मक इनफ्लो बने रहने और बाजार में उछाल के दम पर भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 1.5 प्रतिशत बढ़कर 87.08 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। कुल फोलियो की संख्या भी बढ़कर 28.35 करोड़ हो चुकी है। यह डेटा स्पष्ट करता है कि उतार-चढ़ाव भरे बाजार में भी खुदरा निवेशक घबराने के बजाय हर गिरावट में लंबी अवधि के लिए वेल्थ क्रिएशन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।