ट्रेन में लोअर बर्थ के नीचे सामान रखने का हक किसका? मिडिल या अपर वाले ने कब्जाया तो क्या करें; जानें रेलवे का आधिकारिक नियम
भारतीय रेल के स्लीपर, 3-टियर एसी या 2-टियर एसी कोच में यात्रा करते समय सबसे आम विवादों में से एक होता है—लोअर बर्थ (Lower Berth) के नीचे सामान रखने की जगह। लंबी दूरी की ट्रेनों में अक्सर देखा जाता है कि मिडिल या अपर बर्थ वाले यात्री चढ़ते ही अपने बड़े-बड़े ट्रॉली बैग, सूटकेस और बोरियां लोअर सीट के नीचे ठूंस देते हैं। जब निचली सीट का यात्री अपनी सीट पर पहुंचता है, तो उसे अपना सामान रखने के लिए जगह ही नहीं मिलती।
अक्सर इस बात पर कहासुनी और तकरार शुरू हो जाती है कि "सीट मेरी है तो नीचे की जगह भी मेरी ही होगी।" लेकिन क्या वाकई लोअर बर्थ के नीचे की पूरी खाली जगह पर केवल लोअर बर्थ वाले यात्री का ही एकाधिकार होता है? इस पर भारतीय रेलवे के आधिकारिक कमर्शियल मैनुअल और लगेज रूल्स स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हैं।
रेलवे का आधिकारिक नियम: क्या केवल लोअर बर्थ वाले का है हक?
भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, किसी भी कूपे या कम्पार्टमेंट में लोअर बर्थ के नीचे का खाली स्थान किसी एक यात्री की निजी संपत्ति नहीं होता।
-
साझा अधिकार (Shared Right): उस विशेष बे (Bay) में आवंटित सीटों—यानी लोअर (LB), मिडिल (MB) और अपर बर्थ (UB)—के तीनों यात्रियों को अपना-अपना तय सीमा का सामान रखने का समान और साझा अधिकार होता है।
-
पारस्परिक सहमति और व्यवस्था: रेलवे के कमर्शियल नियमों के तहत यह अपेक्षा की जाती है कि तीनों यात्री अपने सामान को इस तरह व्यवस्थित रखें कि किसी दूसरे यात्री के पैरों को रखने में बाधा न पहुंचे और रास्ता (पैसेज) पूरी तरह खुला रहे।
-
सीट के नीचे जगह न होने पर: यदि किसी यात्री का बैग अधिक बड़ा है और सीट के नीचे नहीं आ पा रहा है, तो उसे कोच में बने ओवरहेड लगेज रैक (Luggage Rack) पर सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है।
रेलवे में यात्री कितना वजन और सामान ले जा सकते हैं?
ट्रेन में सफर के दौरान यात्री असीमित सामान नहीं ले जा सकते। रेलवे ने प्रत्येक श्रेणी (Class) के लिए मुफ्त सामान ले जाने की तय सीमा (Free Luggage Allowance) निर्धारित की है:
| यात्रा श्रेणी (Coach Class) | मुफ्त सामान की सीमा (Free Allowance) | अधिकतम सीमा (Marginal Allowance) |
| AC फर्स्ट क्लास (1st AC) | 70 किलोग्राम | 150 किलोग्राम |
| AC 2-टियर (2nd AC) | 50 किलोग्राम | 100 किलोग्राम |
| AC 3-टियर / चेयर कार (3rd AC / CC) | 40 किलोग्राम | 40 किलोग्राम |
| स्लीपर क्लास (Sleeper Class) | 40 किलोग्राम | 80 किलोग्राम |
| जनरल/द्वितीय श्रेणी (Second Class) | 35 किलोग्राम | 70 किलोग्राम |
यदि कोई यात्री तय सीमा से अधिक या बहुत बड़े आकार का सामान (100 सेमी x 60 सेमी x 25 सेमी से बड़ा) लेकर कोच में प्रवेश करता है, तो उसे लगेज ब्रेक वैन में बुक कराना अनिवार्य होता है। कोच में भारी और गैर-मानक सामान रखने पर धारा 164 के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।
विवाद होने पर क्या करें? टीटीई और रेल मदद का सहारा
यदि कोई सह-यात्री जबरन सारी जगह घेर लेता है और बातचीत से समस्या का समाधान नहीं निकलता, तो विवाद करने के बजाय यात्री इन कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
-
ऑन-ड्यूटी टीटीई (TTE) से संपर्क: कोच में मौजूद टीटीई का यह कर्तव्य है कि वह यात्रियों के बीच सामान के उचित समायोजन को सुनिश्चित करे। यदि किसी यात्री के पास सीमा से अधिक सामान है, तो टीटीई उस पर पेनल्टी लगाकर उसे ब्रेक वैन में शिफ्ट करवा सकता है।
-
रेल मदद हेल्पलाइन (139): अपने मोबाइल से तुरंत 139 डायल करें या RailMadad ऐप पर पीएनआर (PNR) दर्ज कर शिकायत दर्ज कराएं। अगले प्रमुख स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या ट्रेन सुपरवाइजर पहुंचकर समस्या का निस्तारण करवाएंगे।
-
रास्ता ब्लॉक करने पर जुर्माना: रेलवे एक्ट के अनुसार, कोच के गलियारे (Aisle) या दरवाजे के सामने सामान रखकर रास्ता रोकना दंडनीय है, क्योंकि यह आपात स्थिति में यात्रियों की निकासी में बाधा बनता है।