विदेश जाने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: देश के 7 प्रमुख एयरपोर्ट पर Digi Yatra का ट्रायल शुरू, जानिए कैसे मिलेगा बिना लाइन वाला फायदा
भारत के हवाई अड्डों पर लगने वाली लंबी कतारों और सिक्योरिटी जांच के लंबे इंतजार से अब अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलने जा रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डिजि यात्रा फाउंडेशन ने मिलकर देश के सात प्रमुख हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए डिजि यात्रा सुविधा का आधिकारिक ट्रायल शुरू कर दिया है। अब तक घरेलू उड़ानों तक सीमित रहने वाली यह फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक अब सीमा पार की यात्राओं को भी पूरी तरह से पेपरलेस और आसान बनाने की दिशा में बढ़ चुकी है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, अहमदाबाद और चेन्नई जैसे व्यस्ततम टर्मिनल्स पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है। एयरपोर्ट पर कदम रखते ही टिकट और पासपोर्ट की बार-बार जांच के झंझट से मुक्ति दिलाने वाली यह पहल भारतीय विमानन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का एक नया मानक स्थापित कर रही है।
किन 7 प्रमुख हवाई अड्डों पर शुरू हुआ यह विशेष ट्रायल
शुरुआती चरण में उन हवाई अड्डों को चुना गया है जहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या और यात्रियों की आवाजाही सबसे अधिक दर्ज की जाती है। नई दिल्ली स्थित आईजीआई एयरपोर्ट, मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेंगलुरु का केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हैदराबाद का राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, कोच्चि एयरपोर्ट, अहमदाबाद का सरदार वल्लभभाई पटेल एयरपोर्ट और चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान टर्मिनल पर ई-गेट्स स्थापित किए गए हैं। इन सभी हवाई अड्डों पर विदेश जाने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए अलग से डिजि यात्रा कॉरिडोर और बायोमेट्रिक गेट्स तैयार किए गए हैं ताकि सामान्य यात्रियों की कतार से अलग होकर वे मिनटों में औपचारिकताएं पूरी कर सकें। ग्राउंड स्टाफ को भी इस नई प्रणाली के संचालन और यात्रियों की तकनीकी सहायता के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।
विदेश यात्रा में यात्रियों को कैसे मिलेगा इसका सीधा लाभ
अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा समय चेक-इन, सिक्योरिटी होल्ड एरिया में प्रवेश और इमिग्रेशन काउंटरों पर लगता है। इस नए सिस्टम के तहत यात्री का चेहरा ही उसका बोर्डिंग पास और पहचान पत्र बन जाता है। जैसे ही कोई यात्री एयरपोर्ट के डिपार्चर गेट पर पहुंचेगा, फेशियल रिकॉग्निशन कैमरा उसके चेहरे को स्कैन करेगा और कुछ ही सेकंड में गेट खुल जाएगा। इससे न केवल टर्मिनल के अंदर प्रवेश तेज होगा, बल्कि सीआईएसएफ सिक्योरिटी जांच पॉइंट पर भी बार-बार बोर्डिंग पास दिखाने और स्टैंप लगवाने की जरूरत खत्म हो जाएगी। ट्रायल के दौरान दर्ज आंकड़ों के अनुसार, जहां एक यात्री को सामान्य प्रक्रिया में एंट्री गेट पार करने में दो से तीन मिनट का समय लगता था, वहीं डिजि यात्रा के जरिए यह काम मात्र तीन से पांच सेकंड में पूरा हो रहा है। इससे यात्रियों का कीमती समय बचेगा और उड़ानों से पहले होने वाली मानसिक थकान भी काफी हद तक कम होगी।
पासपोर्ट और वीजा लिंकिंग की आधुनिक प्रक्रिया कैसे करेगी काम
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए डिजि यात्रा का उपयोग करने की प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित और सहज बनाया गया है। इसके लिए यात्रियों को अपने स्मार्टफोन में डिजि यात्रा ऐप को नवीनतम वर्जन में अपडेट करना होगा। ऐप में लॉग इन करने के बाद आधार बेस्ड वेरिफिकेशन के साथ-साथ अब भारतीय पासपोर्ट के विवरण को जोड़ने का विकल्प दिया गया है। यात्री को अपने पासपोर्ट के बायो-डेटा पेज को स्कैन करना होगा और चिप युक्त ई-पासपोर्ट होने की स्थिति में एनएफसी तकनीक के जरिए डेटा तुरंत सिंक हो जाता है। इसके बाद जिस अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जाना है, उसका बोर्डिंग पास या पीएनआर नंबर ऐप में अपलोड करना होगा। सिस्टम संबंधित एयरलाइन और एयरपोर्ट डेटाबेस के साथ विवरण का मिलान करेगा, जिसके बाद एक सुरक्षित डिजिटल टोकन जनरेट हो जाएगा जो पूरी यात्रा के दौरान हवाई अड्डे पर पहचान के रूप में मान्य रहेगा।
डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम
यात्रियों के मन में डिजिटल डेटा और चेहरे की पहचान को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रणाली सेल्फ-सोवरेन आइडेंटिटी मॉडल पर आधारित है। इसका अर्थ यह है कि यात्री का कोई भी निजी डेटा या बायोमेट्रिक जानकारी किसी केंद्रीय सर्वर पर स्थायी रूप से स्टोर नहीं की जाती है। जब यात्री अपनी यात्रा की जानकारी साझा करता है, तो डेटा पूरी तरह से एनक्रिप्टेड फॉर्मेट में केवल संबंधित डिपार्चर एयरपोर्ट के सिस्टम को अस्थायी रूप से भेजा जाता है। उड़ान के प्रस्थान करने के 24 घंटे के भीतर वह डेटा एयरपोर्ट के लोकल स्टोरेज से अपने आप पूरी तरह मिटा दिया जाता है। इस व्यवस्था से डेटा चोरी या दुरुपयोग की संभावना शून्य हो जाती है और यह तकनीक वैश्विक स्तर के सुरक्षा मानकों को पूरा करती है।
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए ट्रायल के दौरान जरूरी दिशा-निर्देश
हालांकि यह सुविधा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू हो चुकी है, लेकिन ट्रायल फेज में होने के कारण यात्रियों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी। नागरिक उड्डयन विभाग ने साफ किया है कि डिजि यात्रा गेट केवल टर्मिनल में प्रवेश और सुरक्षा जांच को तेज बनाता है, इसलिए यात्रियों को अपना मूल पासपोर्ट और संबंधित देश का वैध वीजा साथ रखना अनिवार्य होगा। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के नियमों के अनुसार इमिग्रेशन क्लियरेंस के अंतिम पड़ाव पर अधिकारियों द्वारा फिजिकल पासपोर्ट का सत्यापन कानूनन आवश्यक रहेगा। इसके अलावा, वर्तमान में यह सुविधा केवल भारतीय पासपोर्ट धारकों और चुनिंदा एयरलाइनों की उड़ानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, जिसे ट्रायल के सफल परिणामों के बाद आने वाले समय में अन्य सभी विदेशी एयरलाइनों और कनेक्टिंग फ्लाइट्स के लिए भी पूरी तरह खोल दिया जाएगा।