ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स पर बिक रहा था जानलेवा धतूरा, FSSAI ने लिया कड़ा एक्शन; अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो-ब्लिंकिट समेत 5 बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों पर शिकंजा

ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स पर बिक रहा था जानलेवा धतूरा, FSSAI ने लिया कड़ा एक्शन; अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो-ब्लिंकिट समेत 5 बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों पर शिकंजा

नई दिल्ली। देश के शीर्ष ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खाद्य सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा नियामक यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जहरीले और प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की खुलेआम बिक्री के खिलाफ बड़ा कानूनी हंटर चला दिया है। नियामक ने देश की पांच दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों—अमेजन इंडिया (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart), बिगबास्केट (BigBasket) और जेप्टो (Zepto) के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSS Act, 2006) के तहत दंडात्मक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस सख्त कदम के पीछे सबसे गंभीर वजह इंसानों के लिए बेहद घातक माने जाने वाले पौधे धतूरा (Datura) के फल और बीजों को खाद्य उत्पाद के रूप में प्रदर्शित कर ऑनलाइन बेचना पाया गया है।

यह पूरा मामला तब गरमाया जब जांच में पाया गया कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर धार्मिक अनुष्ठानों या जंगली औषधियों के नाम पर बिकने वाले जहरीले धतूरे को बाकायदा खाद्य पदार्थों की श्रेणी (Food Category) में लिस्ट किया गया था। कुछ जगहों पर तो यह ग्राहकों के कार्ट में एडिबल प्रोडक्ट की तरह ऑफर किया जा रहा था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, धतूरा एक अत्यंत विषैला पौधा है जिसके बीज और फल में एट्रोपिन और स्कोपोलामाइन जैसे खतरनाक एल्कलॉइड होते हैं। इसका मामूली सा सेवन भी इंसान के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को पंगु बना सकता है, जिससे मतिभ्रम, दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना और समय पर इलाज न मिलने पर मौत तक हो सकती है। ऐसे विषैले पदार्थ को बिना किसी चेतावनी और खाद्य लाइसेंस की आड़ में बेचना जनस्वास्थ्य के साथ सीधा और गंभीर खिलवाड़ था।

प्रतिबंधित पदार्थ और भ्रामक दावों की लंबी फेहरिस्त पर FSSAI का कड़ा प्रहार

नियामक द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, कंपनियों के खिलाफ यह कार्रवाई केवल जहरीले धतूरे की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि प्लेटफॉर्म्स पर खुलेआम किए जा रहे भ्रामक दावों और मिसब्रांडिंग (Misbranding) को लेकर भी की गई है। FSSAI ने जांच में पाया कि अमेजन सेलर सर्विसेज, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट पर धतूरे के फल और बीज खुले तौर पर डिस्प्ले किए जा रहे थे। इसके साथ ही, पांचों बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों पर लोकप्रिय पैकेज्ड फूड 'हैपिलो प्रीमियम डेट बाइट्स - जेस्टी ऑरेंज' (Happilo Premium Date Bites) को लेकर उत्पाद के लेबल और विज्ञापनों में झूठे व भ्रामक दावे करने का आरोप सिद्ध हुआ है।

इसके अलावा, स्विगी इंस्टामार्ट और टाटा समूह के बिगबास्केट पर 'मिल्की मिस्ट' (Milky Mist) ब्रांड के कई डेयरी उत्पादों के बारे में नियमों के विपरीत और भ्रामक जानकारी प्रसारित करने पर भी अलग से कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें मिल्की मिस्ट फ्रेश लो फैट क्रीम, फार्म फ्रेश कर्ड और ग्रीक योगर्ट जैसे दैनिक उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों पर उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावे किए गए थे जो खाद्य सुरक्षा नियमों के मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते थे। नियामक ने स्पष्ट किया है कि क्विक कॉमर्स के तेजी से बढ़ते दौर में 10 मिनट में डिलीवरी का दावा करने वाली कंपनियां मुनाफे की होड़ में बेसिक क्वालिटी चेक और सुरक्षा मानकों को ताक पर नहीं रख सकती हैं।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर सख्त हुआ नियामक

विगत कुछ समय में क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी का बाजार भारत के टियर-1 और टियर-2 शहरों में अभूतपूर्व रफ्तार से बढ़ा है। लाखों उपभोक्ता अपनी रोजमर्रा की दाल, आटा, फल, सब्जियां और दवाएं इन ऐप्स के जरिए ऑर्डर कर रहे हैं। ऐसे में मध्यस्थ (Intermediary) होने की आड़ लेकर ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। FSSAI ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया है कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हर खाद्य वस्तु के लिए संबंधित प्लेटफॉर्म भी समान रूप से जवाबदेह है। इससे पहले राज्य स्तर पर कर्नाटक फूड सेफ्टी विभाग ने भी इन ऐप्स पर धतूरे की बिक्री पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उनके लाइसेंस पर सवाल उठाए थे। अब केंद्रीय नियामक द्वारा सीधे FSS Act, 2006 के तहत कानूनी मामला दर्ज किए जाने के बाद इन कंपनियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।

FSSAI के इस सख्त कदम से पूरे ई-कॉमर्स सेक्टर में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में ऑनलाइन बिकने वाले न्यूट्रास्युटिकल्स, बेबी फूड और ऑर्गेनिक दावों वाले उत्पादों पर भी डिजिटल ऑडिट तेज किया जाएगा। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे कंपनी कितनी भी बड़ी या लोकप्रिय क्यों न हो। दोषी पाए जाने पर संबंधित प्लेटफॉर्म्स और वेंडर्स पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके फूड ऑपरेटिंग लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक मुकदमा चलाने तक के कड़े प्रावधान मौजूद हैं।