CHARGEZONE को मिला ₹10,500 करोड़ का मेगा एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट, देश भर के हाईवे पर लगेंगे 1,000 नए सुपरचार्जिंग स्टेशन

 CHARGEZONE को मिला ₹10,500 करोड़ का मेगा एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट, देश भर के हाईवे पर लगेंगे 1,000 नए सुपरचार्जिंग स्टेशन

भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक व्यावसायिक समझौता सामने आया है। देश के प्रमुख ईवी सुपरचार्जिंग नेटवर्क CHARGEZONE ने इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसों, हैवी कमर्शियल ट्रकों और फ्लीट कारों के लिए 1 बिलियन डॉलर यानी लगभग ₹10,500 करोड़ से अधिक मूल्य के दीर्घकालिक एनर्जी अनुबंध (Long-Term Energy Contracts) हासिल किए हैं। इस ऐतिहासिक सौदे के दम पर कंपनी भारत के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों (National Highway Corridors) पर 1,000 नए अत्याधुनिक सुपरचार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की महा-योजना पर काम शुरू कर रही है। इस रणनीतिक कदम से देश में इंटरसिटी माल ढुलाई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विद्युतीकरण को अभूतपूर्व रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

हाईवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों का सफर होगा आसान, 1000 नए सुपरचार्जिंग स्टेशन नेटवर्क में जुड़ेंगे

चार्जजोन द्वारा की जाने वाली इस भारी-भरकम तैनाती का मुख्य केंद्र बिंदु देश के व्यस्ततम नेशनल हाईवे कॉरिडोर होंगे। वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक कार या बस चालकों के मन में रेंज एंग्जायटी यानी रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर सबसे बड़ी बाधा बना रहता है। कंपनी का लक्ष्य दिल्ली-मुंबई, मुंबई-अहमदाबाद, बेंगलुरु-चेन्नई, दिल्ली-अमृतसर और कोलकाता-वाराणसी जैसे प्रमुख एक्सप्रेसवे और व्यापारिक रूट्स पर हर 50 से 100 किलोमीटर के दायरे में हाई-स्पीड सुपरचार्जिंग हब तैयार करना है। नए 1,000 चार्जिंग स्टेशनों के लाइव होने के बाद हाईवे पर चलने वाली अंतरराज्यीय इलेक्ट्रिक बसों और लंबी दूरी के ट्रकों को बिना किसी देरी के त्वरित चार्जिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे शहरों के बीच लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक परिवहन का समय बचेगा।

फ्लीट-आधारित मांग पर केंद्रित रणनीति: रोज 15,000 से अधिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी चार्ज

आमतौर पर सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद उस पर पर्याप्त ट्रैफिक आएगा या नहीं। चार्जजोन ने इस पारंपरिक मॉडल को बदलते हुए 'डिमांड-फर्स्ट' अप्रोच अपनाया है। यह ₹10,500 करोड़ का एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट कमर्शियल फ्लीट ऑपरेटरों, अंतरराज्यीय बस सेवाओं और डिलीवरी कंपनियों के साथ हुआ है, जिनके रूट्स तय हैं और दैनिक बिजली की खपत सुनिश्चित है। कंपनी का आकलन है कि इन अनुबंधित फ्लीट्स के जरिए नए स्टेशनों पर प्रतिदिन 15,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग की जाएगी। इससे स्टेशनों का औसत नेटवर्क उपयोग (Utilisation Rate) वर्तमान के 14 फीसदी से बढ़कर सीधे 30 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।

नेटवर्क क्षमता में भारी उछाल: 120 मेगावाट से बढ़कर 300 मेगावाट होगी कुल पावर क्षमता

इस बड़े विस्तार अभियान के पूरा होने के बाद चार्जजोन के चार्जिंग नेटवर्क की कुल क्षमता में 180 मेगावाट (MW) की भारी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही कंपनी की कुल नेटवर्क क्षमता वर्तमान के 120 मेगावाट से बढ़कर सीधे 300 मेगावाट के स्तर पर पहुंच जाएगी। पूरी तरह सक्रिय होने पर यह पूरा नेटवर्क सालाना लगभग 700 गीगावाट-घंटे (GWh) ऊर्जा वितरित करेगा और रोजाना 15,000 से अधिक चार्जिंग सेशन को आसानी से हैंडल करने में सक्षम होगा। इतनी बड़ी ऊर्जा क्षमता से देश में लाखों लीटर डीजल की खपत पर रोक लगेगी और भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

फंडिंग का पुख्ता बंदोबस्त: बैंकों से मिला ₹250 करोड़ का कर्ज, $100 मिलियन अतिरिक्त जुटाने की तैयारी

इस पूंजी-सघन बुनियादी ढांचा परियोजना को वित्तीय गति देने के लिए कंपनी ने अपने फंड जुटाने के चरण को भी मजबूत कर लिया है। चार्जजोन ने भारतीय प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों से ऋण वित्तपोषण (Debt Financing) के माध्यम से ₹250 करोड़ ($25 मिलियन) की राशि सुरक्षित कर ली है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनी इक्विटी और अतिरिक्त ऋण के जरिए 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹830 करोड़ से अधिक) की नई पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में है। यह समूची पूंजी नए सुपरचार्जिंग स्टेशनों के निर्माण, माइक्रो-ग्रिड अवसंरचना, आधुनिक ऊर्जा प्रबंधन सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर तकनीकों के विकास में निवेश की जाएगी।

ग्रीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज (BESS) का अनोखा तालमेल

केवल चार्जिंग पॉइंट लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करना भी एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। चार्जजोन अपने नए हाई-स्पीड सुपरचार्जिंग स्टेशनों पर सौर ऊर्जा (Solar Power) और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को सीधे ग्रिड से जोड़ रहा है। इसका फायदा यह होगा कि पीक ऑवर्स के दौरान जब एक साथ कई हैवी बसें और ट्रक चार्जिंग के लिए प्लग-इन करेंगे, तब स्थानीय ग्रिड पर अत्यधिक लोड नहीं पड़ेगा। दिन के समय सोलर पैनल्स द्वारा बनाई गई बिजली को इन बीईएसएस बैटरियों में स्टोर किया जाएगा और रात में भारी वाहनों की सुपरफास्ट चार्जिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे यह पूरा इकोसिस्टम पर्यावरण के अनुकूल और नेट-जीरो कार्बन लक्ष्यों के अनुरूप बनेगा।

भारत के कमर्शियल लॉजिस्टिक्स और ट्रक सेक्टर में आएगा क्रांतिकारी बदलाव

अब तक भारत में इलेक्ट्रिक क्रांति का प्रभाव मुख्य रूप से दोपहिया, तिपहिया और इंट्रा-सिटी कारों तक सीमित था। लंबी दूरी के ट्रकों और भारी मालवाहक वाहनों को ईवी में बदलना एक दूर का सपना माना जाता था, क्योंकि उनके लिए मेगावाट स्तर के हाई-पावर चार्जर्स की दरकार होती है। ₹10,500 करोड़ के इस ऐतिहासिक कॉन्ट्रैक्ट से यह साफ हो गया है कि बड़े लॉजिस्टिक्स बेड़े अब डीजल से इलेक्ट्रिक की ओर रुख करने के लिए तैयार हैं। भारी ट्रकों के विद्युतीकरण से माल ढुलाई की परिचालन लागत में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, जिसका सीधा सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा।

पीएम ई-ड्राइव और राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मिलेगा जबरदस्त संबल

केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना और नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन के तहत सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। चार्जजोन की यह ₹10,500 करोड़ की निजी क्षेत्र की पहल सरकारी नीतियों को जमीन पर उतारने में उत्प्रेरक का काम करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी देश में राजमार्गों पर भरोसेमंद और सुपरफास्ट चार्जिंग का नेटवर्क तैयार हो जाता है, तो ऑटोमोबाइल निर्माता भी बड़े पैमाने पर भारी इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियां बाजार में उतारने के लिए प्रेरित होते हैं। चार्जजोन का यह विस्तार भारत को वैश्विक ईवी क्रांति में एक प्रमुख लीडर के रूप में स्थापित करेगा।