2 गलतियां करते पकड़ा गया को-ऑपरेटिव बैंक: नोटिस पर दी लंबी-चौड़ी सफाई, लेकिन RBI ने खारिज की दलीलें और ठोक दी पेनाल्टी

2 गलतियां करते पकड़ा गया को-ऑपरेटिव बैंक: नोटिस पर दी लंबी-चौड़ी सफाई, लेकिन RBI ने खारिज की दलीलें और ठोक दी पेनाल्टी

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार सख्त कदम उठा रहा है। खासकर शहरी और जिला सहकारी बैंकों (Co-operative Banks) की कार्यप्रणाली पर केंद्रीय बैंक की पैनी नजर बनी हुई है। इसी कड़ी में नियमों का उल्लंघन करने और अनिवार्य गाइडलाइंस का पालन न करने पर महाराष्ट्र स्थित जय भवानी सहकारी बैंक लिमिटेड (Jai Bhawani Sahakari Bank Ltd, Pune) पर आरबीआई ने मौद्रिक जुर्माना (Monetary Penalty) ठोक दिया है।

आरबीआई द्वारा बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड और कामकाज के वैधानिक निरीक्षण (Statutory Inspection) के दौरान दो गंभीर नियामकीय विफलताएं पकड़ी गई थीं। इसके बाद जब बैंक को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया, तो बैंक प्रबंधन ने अपनी सफाई में कई दलीलें दीं, लेकिन रिजर्व बैंक ने इन जवाबों को असंतोषजनक पाते हुए सीधे जुर्माने की कार्रवाई कर दी।

बैंक ने की थीं ये 2 बड़ी गलतियां: जांच में खुली पोल

रिजर्व बैंक की जांच रिपोर्ट के अनुसार, सहकारी बैंक में पाई गई दोनों कमियां सीधे तौर पर बैंकिंग सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ी हुई थीं:

  • 1. क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CICs) को डेटा न भेजना:

    आरबीआई के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी बैंकों को अपने कर्जदारों (Borrowers) के लोन और रीपेमेंट का पूरा डेटा अनिवार्य रूप से सभी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (जैसे CIBIL, Experian, Equifax, CRIF High Mark) के साथ साझा करना होता है। जांच में सामने आया कि बैंक अपने उधारकर्ताओं की क्रेडिट जानकारी सभी सीआईसी को तय समय पर रिपोर्ट करने में पूरी तरह विफल रहा।

  • 2. केवाईसी नियमों और खातों की रिस्क कैटेगराइजेशन में लापरवाही:

    केवाईसी (Know Your Customer) गाइडलाइंस के तहत बैंकों के लिए ग्राहकों के खातों की जोखिम श्रेणी (Low, Medium, High Risk Categorisation) की समय-समय पर आवधिक समीक्षा (Periodic Review) करना अनिवार्य होता है। जय भवानी सहकारी बैंक ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर खातों के रिस्क प्रोफाइल की समीक्षा नहीं की थी, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध लेन-देन का खतरा बढ़ सकता था।

नोटिस मिलने पर बैंक ने दी सफाई, लेकिन क्यों खारिज हुई दलील?

आरबीआई ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (Banking Regulation Act, 1949) की धारा 47A(1)(c) और 46(4)(i) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बैंक को नोटिस थमाया था।

नोटिस के जवाब में बैंक की ओर से लिखित स्पष्टीकरण भेजा गया और व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) के दौरान मौखिक दलीलें भी पेश की गईं। बैंक का तर्क था कि तकनीकी अपग्रेडेशन और स्टाफ की कमी के चलते यह प्रक्रियागत देरी हुई थी और इसे जानबूझकर नहीं किया गया। हालांकि, सभी दस्तावेजों और तथ्यों की समीक्षा के बाद आरबीआई इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि नियमों के गैर-अनुपालन (Non-Compliance) के आरोप पूरी तरह साबित होते हैं और यह एक मौद्रिक दंड लगाने के लिए पर्याप्त आधार है। इसके बाद बैंक पर पेनाल्टी लगाने का आदेश जारी कर दिया गया।

क्या ग्राहकों के पैसों पर पड़ेगा कोई असर? जानिए आरबीआई का रुख

सहकारी बैंकों पर जब भी केंद्रीय बैंक पेनाल्टी लगाता है, तो आम खाताधारकों के मन में अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने हर बार की तरह इस बार भी स्थिति स्पष्ट की है:

  • नियामकीय अनुपालन की कमी: यह पेनाल्टी केवल बैंक द्वारा रेगुलेटरी कंप्लायंस में की गई कमियों के आधार पर लगाई गई है।

  • लेन-देन पूरी तरह वैध: आरबीआई की इस कार्रवाई का उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी वैध लेन-देन या समझौतों को अमान्य ठहराना नहीं है।

  • ग्राहकों की जमा पूंजी सुरक्षित: बैंक का सामान्य कामकाज पहले की तरह जारी रहेगा और खाताधारकों के जमा पैसे, एफडी या सामान्य लेन-देन पर इस जुर्माने का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सहकारी बैंकों को आरबीआई की यह सीधी चेतावनी है कि खाताधारकों के वित्तीय डेटा और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।