टैक्स ऑडिट रिपोर्ट पर CBDT का 'सक्षम नज' अभियान: 12 हजार प्रोफेशनल्स को भेजे ईमेल अलर्ट, 21 अक्टूबर है सुधार की अंतिम तारीख

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट पर CBDT का 'सक्षम नज' अभियान: 12 हजार प्रोफेशनल्स को भेजे ईमेल अलर्ट, 21 अक्टूबर है सुधार की अंतिम तारीख

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष के टैक्स ऑडिट अनुपालन को लेकर एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान को 'सक्षम नज' (Saksham Nudge Campaign) नाम दिया गया है। विभाग के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स टूल्स ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट्स में व्यापक स्तर पर तकनीकी और तथ्यात्मक खामियां पकड़ी हैं। इसके आधार पर देश भर के 12,000 से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs), टैक्स प्रोफेशनल्स और संबंधित करदाताओं को सीधे ईमेल संदेश और ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'कम्युनिकेशन अलर्ट' भेजे गए हैं। विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज ब्योरे और वास्तविक वित्तीय लेन-देन के बीच के अंतर को तुरंत सुधारने के लिए 21 अक्टूबर 2026 की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है।

क्या है 'सक्षम नज' अभियान और आयकर विभाग की यह पहल

पारंपरिक रूप से आयकर विभाग किसी भी विसंगति पर सीधे कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) या धारा 148 के तहत जांच शुरू करता रहा है। हालांकि, 'नज थ्योरी' (Nudge Theory) के तहत विभाग ने एक सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई से पहले करदाताओं और पेशेवरों को एक मौका देने का फैसला किया है। 'सक्षम' अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऑडिट रिपोर्ट में अनजाने में हुई लिपिकीय गलतियों, गलत कॉलम में डेटा भरने या विवरण छूट जाने की स्थिति में प्रोफेशनल खुद आगे आकर इसे संशोधित कर लें। सीबीडीटी का यह संदेश स्पष्ट है कि यदि निर्धारित तारीख तक डेटा का मिलान दुरुस्त नहीं किया गया, तो विभाग संबंधित मामलों को स्क्रूटनी और भारी पेनाल्टी के दायरे में लाएगा।

किन रिपोर्ट्स में पाई गईं सबसे बड़ी गड़बड़ियां: फॉर्म 10B और 10BB पर फोकस

आयकर विभाग द्वारा जारी ईमेल अलर्ट मुख्य रूप से धर्मार्थ, धार्मिक ट्रस्टों, शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सा संस्थाओं और धारा 12A/12AB या 10(23C) के तहत पंजीकृत गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) के ऑडिट से जुड़े हैं।

विभाग के अनुसार गड़बड़ियां मुख्य रूप से इन दो फॉर्म्स में सामने आई हैं:

  • फॉर्म 10B (Form 10B): उन बड़े ट्रस्टों और संस्थाओं के लिए जिनकी वार्षिक आय ₹5 करोड़ से अधिक है, या जिन्होंने वित्त वर्ष के दौरान विदेश से कोई अंशदान (Foreign Contribution) प्राप्त किया है, अथवा जिन्होंने भारत से बाहर किसी फंड का उपयोग किया है।

  • फॉर्म 10BB (Form 10BB): उन ट्रस्टों और संस्थानों के लिए जिनकी कुल आय ₹5 करोड़ तक है और जिन्होंने कोई विदेशी चंदा या विदेशी खर्च नहीं किया है।

विभाग के विश्लेषण में पाया गया कि कई संस्थाओं ने अपनी आय और विदेशी योगदान की सीमा के आधार पर गलत फॉर्म का चयन कर लिया। इसके अतिरिक्त, टीडीएस (TDS) कटौती के नियमों के अनुपालन, धारा 40A(3) के तहत ₹10,000 से अधिक के नकद भुगतानों के प्रकटीकरण (Disclosure) और निर्धारित 85% आय के धर्मार्थ कार्यों में उपयोग के विवरण में कई विसंगतियां दर्ज की गई हैं।

21 अक्टूबर तक सुधार न करने पर क्या होगा कानूनी नुकसान

आयकर विभाग ने प्रोफेशनल्स और ट्रस्टों को सचेत किया है कि 21 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा समाप्त होने के बाद संशोधित ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने का यह त्वरित विकल्प बंद हो जाएगा। यदि कोई संस्था या ऑडिटर इस ईमेल अलर्ट को नजरअंदाज करता है, तो उसे निम्नलिखित गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:

  1. टैक्स छूट (Exemption) रद्द होना: धारा 11 और 12 के तहत मिलने वाली कर छूट केवल तभी मान्य होती है जब वैध ऑडिट रिपोर्ट समय पर दाखिल की जाए। गलत या अधूरी रिपोर्ट के चलते ट्रस्ट की संपूर्ण सकल प्राप्तियों (Gross Receipts) को सामान्य व्यावसायिक आय मानकर 30% की अधिकतम सीमांत दर (MMR) से भारी टैक्स लगाया जा सकता है।

  2. धारा 271B के तहत भारी जुर्माना: आयकर अधिनियम की धारा 271B के अनुसार निर्धारित समय पर सही ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर कुल बिक्री, टर्नओवर या सकल प्राप्तियों का 0.5% या अधिकतम ₹1,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

  3. संशोधित आईटीआर दाखिल करने में अड़चन: टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (TAR) का यूडीआईएन (UDIN) और पावती संख्या आयकर रिटर्न (ITR-7) के साथ सीधे मैप होती है। गलत ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दाखिल रिटर्न को 'दोषपूर्ण रिटर्न' (Defective Return under Section 139(9)) घोषित कर दिया जाएगा।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए जरूरी कदम

सीबीडीटी द्वारा ईमेल प्राप्त करने वाले प्रोफेशनल्स को बिना घबराए निम्नलिखित प्रक्रियात्मक कदम उठाने की सलाह दी गई है:

  • ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'Compliance Portal' जांचें: अपने ई-फाइलिंग क्रेडेंशियल्स के साथ लॉगिन करें और 'Pending Actions' के तहत 'Compliance Portal' या 'e-Campaign' टैब पर जाएं। वहां विभाग द्वारा फ्लैग की गई विशिष्ट विसंगति (Mismatch) का विवरण देखें।

  • फॉर्म के चयन का पुनर्मूल्यांकन: जांच लें कि क्या ट्रस्ट की कुल प्राप्तियां ₹5 करोड़ की सीमा के भीतर थीं या बाहर, और क्या कोई एफसीआरए (FCRA) या विदेशी अंशदान था। यदि फॉर्म 10BB के स्थान पर 10B की आवश्यकता थी, तो सही फॉर्म को नए सिरे से अपलोड करें।

  • इंस्टीट्यूट (ICAI) के यूडीआईएन पोर्टल पर अपडेट: नई संशोधित ऑडिट रिपोर्ट जारी करने से पहले आईसीएआई के यूडीआईएन पोर्टल पर पुरानी रिपोर्ट के संबंध में कारण दर्ज करें और नई संशोधित रिपोर्ट के लिए नया यूडीआईएन (UDIN) जनरेट कर उसे आयकर पोर्टल पर 15 दिनों के भीतर प्रमाणित करें।

  • जवाब (Response) सबमिट करें: यदि सीए या करदाता का मानना है कि उनकी मूल रिपोर्ट में दी गई जानकारी नियमों के अनुसार पूर्णतः सही है, तो वे पोर्टल पर 'Disagreement' का विकल्प चुनकर दस्तावेजों के साथ अपना विधिवत स्पष्टीकरण दर्ज कर सकते हैं।

डेटा मिलान पर एआई (AI) का सख्त पहरा

यह अभियान दर्शाता है कि आयकर विभाग अब कागजी या औपचारिकता वाले अनुपालन से आगे बढ़कर पूरी तरह डेटा-ड्रिवन सिस्टम पर काम कर रहा है। एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS), जीएसटी रिटर्न और बैंकिंग लेन-देन का ऑडिट फॉर्म में दर्ज आंकड़ों से सीधा क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है। प्रोफेशनल्स और ट्रस्ट प्रबंधन को 21 अक्टूबर तक इन त्रुटियों को सुधारकर अपने अनुपालन को शत-प्रतिशत त्रुटिहीन बना लेना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई और कर नोटिस से बचा जा सके।