सावधान! कहीं आप तो नहीं खा रहे यह चॉकलेट? FSSAI की छापेमारी में फैक्ट्री में मिला बिल्ली का मल और सीवेज का पानी, तुरंत लाइसेंस सस्पेंड
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और स्थानीय खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन दल ने आम उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाली एक प्रमुख चॉकलेट निर्माण इकाई पर कड़ा प्रहार किया है। औचक निरीक्षण के दौरान टीम जब कारखाने के भीतर दाखिल हुई, तो वहां का खौफनाक और अस्वच्छ मंजर देखकर वरिष्ठ अधिकारी भी दंग रह गए। जांच में पाया गया कि जिस परिसर में बच्चों और युवाओं के पसंदीदा कन्फेक्शनरी और चॉकलेट उत्पाद तैयार किए जा रहे थे, वहां खुलेआम जानवरों की आवाजाही थी, कच्चे माल के पास बिल्ली की विष्ठा (मल) बिखरी पड़ी थी और उत्पादन प्रक्रिया में सीवेज व दूषित जल का उपयोग हो रहा था।
मामले की गंभीरता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आसन्न खतरे को देखते हुए खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर उक्त निर्माण इकाई का विनिर्माण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इसके अलावा कारखाने में मौजूद तैयार स्टॉक, अर्ध-निर्मित माल और पैकेजिंग सामग्री को मौके पर ही सील कर दिया गया है ताकि बाजार में यह जहरीला उत्पाद न पहुंच सके।
नाले के पानी का इस्तेमाल और कच्चे माल के भंडारण में घोर लापरवाही
जांच रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री परिसर में बुनियादी स्वच्छता नियमों (Good Manufacturing Practices - GMP) की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। जिस पानी का इस्तेमाल कोको पाउडर, लिक्विड ग्लूकोज और चॉकलेट बेस को प्रोसेस करने के लिए किया जा रहा था, वह पास के गंदे सीवेज पाइपलाइन के रिसाव से अत्यधिक संदूषित पाया गया। प्रयोगशाला जांच के लिए पानी और तैयार चॉकलेट के कई नमूने एकत्र किए गए हैं, जिनकी प्राथमिक जांच में खतरनाक बैक्टीरिया और ई-कोलाई (E. coli) की मौजूदगी के संकेत मिले हैं।
इतना ही नहीं, जिस गोदाम में चॉकलेट बनाने के लिए आवश्यक फ्लेवर, पाम ऑयल, चीनी और मिल्क पाउडर को स्टोर करके रखा गया था, वहां कोई कीट-नियंत्रण (Pest Control) व्यवस्था नहीं थी। चारों ओर आवारा बिल्लियों और चूहों की मौजूदगी के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। तैयार चॉकलेट को बिना किसी एयरटाइट सील के फर्श पर खुले में रखा गया था, जहां मलमूत्र और कीड़े-मकौड़ों का सीधा संपर्क हो रहा था। इस स्तर की लापरवाही से तैयार उत्पाद सीधे तौर पर फूड पॉइजनिंग, टायफाइड और पेट के गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
बाजारों से माल वापस मंगाने का आदेश और कानूनी शिकंजा
FSSAI ने संबंधित मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर बाजार में वितरित किए जा चुके सभी बैचों को तत्काल रिकॉल (वापस मंगाने) का सख्त आदेश दिया है। विभाग की कई टीमों ने स्थानीय थोक व्यापारियों, किराना दुकानों और सुपरमार्केट्स में भी जांच अभियान शुरू कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस फैक्ट्री का कोई भी उत्पाद आम ग्राहकों, विशेषकर छोटे बच्चों तक न पहुंचे।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम (Food Safety and Standards Act) की गैर-जमानती धाराओं के तहत फैक्ट्री संचालक और संबंधित प्रबंधकों के खिलाफ प्राथमिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को भारी आर्थिक जुर्माने के साथ-साथ कठोर कारावास का सामना करना पड़ेगा।
उपभोक्ता कैसे बरतें सावधानी और लोकल स्तर पर कहां करें शिकायत
त्योहारों और आम दिनों में चॉकलेट, बिस्कुट और मिठाई जैसे कन्फेक्शनरी उत्पादों की भारी मांग रहती है, जिसका फायदा उठाकर कई गैर-लाइसेंसशुदा और घटिया इकाइयां कम लागत में जहरीला सामान तैयार करती हैं। विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना मान्यता प्राप्त ब्रांड, अत्यंत सस्ती या खुली बिकने वाली चॉकलेट खरीदने से पूरी तरह बचें। पैकेज्ड फूड खरीदते समय पैकेट पर वैध FSSAI 14-अंकों का लाइसेंस नंबर, मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट और बैच नंबर की जांच अवश्य करें।
यदि किसी उपभोक्ता को स्थानीय बाजार में बिकने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता, स्वाद या रंग-रूप पर संदेह होता है, तो वे तुरंत FSSAI के ऑनलाइन पोर्टल 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' (Food Safety Connect App) या टोल-फ्री नंबर पर सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। स्थानीय जिला खाद्य सुरक्षा प्रशासन को भी ऐसे संदिग्ध ठिकानों की सूचना दी जा सकती है, जिससे समय रहते मिलावटखोरों पर अंकुश लगाया जा सके और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।