ATF Price Hike: 1 सितंबर को हवाई यात्रियों की जेब पर लगा झटका! ATF के दाम ₹6.28 प्रति लीटर बढ़े, क्या महंगा होगा फ्लाइट का किराया?
1 सितंबर 2026 से आम जनता और हवाई यात्रियों की जेब पर एक और बड़ा झटका लगा है। देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs - जैसे IOCL, BPCL, HPCL) ने विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF / Jet Fuel) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी कर दी है। घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ के दाम में ₹6.28 प्रति लीटर (लगभग 5.46%) का भारी इजाफा किया गया है।
1 अगस्त को हुई ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद यह लगातार दूसरा महीना है जब हवाई ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया है। त्योहारी सीजन (गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली) से ठीक पहले हुई इस बढ़ोतरी ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है कि क्या अब हवाई सफर करना भी महंगा हो जाएगा।
एयरलाइंस की लागत में ईंधन का कितना बड़ा हिस्सा?
विमानन उद्योग (Aviation Industry) में किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) का सबसे बड़ा हिस्सा जेट फ्यूल ही होता है:
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35% से 45% हिस्सेदारी: किसी भी एयरलाइन की कुल ऑपरेशनल कॉस्ट में 35% से लेकर 45% तक का खर्च सिर्फ एटीएफ पर होता है।
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सीधा दबाव: जब भी अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और रिफाइनिंग मार्जिन के चलते एटीएफ के दाम बढ़ते हैं, तो एयरलाइंस का प्रॉफिट मार्जिन सीधे दबाव में आ जाता है।
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लागत पास करने की मजबूरी: अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और कम मार्जिन वाले इस सेक्टर में एयरलाइंस के पास बढ़ती इनपुट लागत का बोझ अंततः यात्रियों (Pass-through) पर डालने के अलावा बहुत कम विकल्प बचते हैं।
क्या अब बढ़ जाएगा फ्लाइट का किराया (Airfare)?
एटीएफ की कीमतों में ₹6.28 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का असर टिकटों की कीमतों पर इन 3 तरीकों से देखने को मिल सकता है:
1. फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) में संशोधन
एयरलाइंस सामान्यतः बेस फेयर बढ़ाने के बजाय सीधे टिकट पर लगने वाले 'फ्यूल सरचार्ज' में संशोधन करती हैं। इससे छोटी दूरी (Short-haul) और लंबी दूरी (Long-haul) दोनों तरह के घरेलू रूट्स पर प्रति टिकट ₹200 से लेकर ₹800 तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
2. त्योहारी सीजन और डायनामिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing)
सितंबर से लेकर नवंबर तक भारत में त्योहारी और हॉलिडे सीजन के कारण घरेलू उड़ानों की मांग चरम पर होती है। एयरलाइंस का टिकटिंग सिस्टम 'डायनामिक प्राइसिंग' पर काम करता है। ईंधन की ऊंची लागत और उच्च मांग (High Demand) मिलकर पीक रूट्स (जैसे दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु, पटना, कोलकाता) पर लास्ट-मिनट टिकटों को 15% से 25% तक महंगा कर सकते हैं।
3. बजट एयरलाइंस पर सबसे ज्यादा असर
इंडिगो, स्पाइसजेट और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी लो-कॉस्ट कैरियर्स (LCCs) की प्रॉफिटेबिलिटी सीधे ईंधन की कीमतों पर टिकी होती है। लगातार दूसरे महीने जेट फ्यूल महंगा होने से बजट एयरलाइंस अपने डिस्काउंटेड और प्रमोशनल फेयर्स में कटौती कर सकती हैं।
यात्रियों के लिए क्या है समझदारी भरा कदम?
यदि आप आगामी त्योहारों—दशहरा, दिवाली या छठ पूजा—में घर जाने या छुट्टियों की प्लानिंग कर रहे हैं:
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समय से पहले बुकिंग: लास्ट-मिनट बुकिंग के बजाय कम से कम 30 से 45 दिन पहले टिकट बुक करें, क्योंकि त्योहारी तारीखों के नजदीक आते-आते डायनामिक फेयर काफी ऊपर जा सकता है।
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क्रेडिट कार्ड और बैंक डिस्काउंट्स: बुकिंग पोर्टल्स पर उपलब्ध बैंक रिवॉर्ड्स, नो-कॉस्ट ईएमआई या कैशबैक ऑफर्स का लाभ उठाएं ताकि बढ़े हुए फ्यूल चार्ज का असर कम हो सके।