उड़ान से ठीक पहले एयर इंडिया का को-पायलट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव, तुरंत सस्पेंड; DGCA सख्त

उड़ान से ठीक पहले एयर इंडिया का को-पायलट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव, तुरंत सस्पेंड; DGCA सख्त

नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील घटना में एयर इंडिया के एक को-पायलट को प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर (BA) टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विमानन सुरक्षा नियमों के अनुसार, किसी भी कमर्शियल फ्लाइट के टेकऑफ से पहले कॉकपिट क्रू और केबिन क्रू का अनिवार्य मेडिकल परीक्षण किया जाता है। नियमित जांच के दौरान को-पायलट के शरीर में अल्कोहल की मात्रा दर्ज की गई, जिसके तुरंत बाद एयरलाइन प्रबंधन ने उड़ान सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कड़ा कदम उठाते हुए उसे रोस्टर से बाहर कर दिया और सस्पेंड करने की कार्रवाई की।

उड़ान संचालन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह घटना तब सामने आई जब संबंधित पायलट अपनी निर्धारित फ्लाइट के लिए ड्यूटी रिपोर्ट करने एयरपोर्ट पहुंचा था। सुरक्षा मानकों से कोई भी समझौता न करने की नीति के तहत संबंधित पायलट की जगह तुरंत दूसरे बैकअप पायलट को तैनात कर फ्लाइट का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया गया, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की बड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

DGCA के कड़े दिशानिर्देश और जीरो टॉलरेंस नीति

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत उड़ान ड्यूटी पर तैनात चालक दल के सदस्यों के लिए अल्कोहल सेवन को लेकर 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' लागू है। डीजीसीए के सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) नियमों के अनुसार, किसी भी चालक दल के सदस्य को उड़ान भरने से पहले 12 घंटे तक किसी भी प्रकार की शराब, मादक पेय या अल्कोहल युक्त कफ सिरप व माउथवॉश का सेवन करने की पूरी तरह मनाही होती है।

यदि कोई पायलट या क्रू मेंबर पहली बार प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में फेल होता है, तो सुरक्षा नियमों के तहत उसका फ्लाइंग लाइसेंस तीन महीने की अवधि के लिए स्वतः निलंबित कर दिया जाता है। दूसरी बार इसी तरह की गलती दोहराए जाने पर लाइसेंस निलंबन की अवधि बढ़ाकर तीन साल कर दी जाती है, जबकि तीसरी बार टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर डीजीसीए संबंधित पायलट का कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL/ATPL) हमेशा के लिए रद्द कर देता है।

एयरलाइन का आधिकारिक रुख और जांच प्रक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए एयर इंडिया प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों और विमान की सुरक्षा एयरलाइन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रबंधन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और प्रारंभिक प्राथमिक परीक्षण के बाद अब विस्तृत मेडिकल असेसमेंट और फाइनल कंफर्मेटरी रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है।

नियमों के मुताबिक, ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पहला रीडिंग पॉजिटिव आने के 15 से 20 मिनट बाद दूसरा टेस्ट (कंफर्मेटरी टेस्ट) उसी कैमरे की निगरानी में दोहराया जाता है। यदि दोनों टेस्ट में रीडिंग सीमा से अधिक आती है, तो पूरी रिपोर्ट तैयार कर डीजीसीए को भेजी जाती है। एयर इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार, जांच रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्षों और नियामक दिशा-निर्देशों के आधार पर संबंधित पायलट के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई पूरी की जाएगी।

उड्डयन सुरक्षा पर सख्त निगरानी और क्रू मॉनिटरिंग

हाल के वर्षों में भारतीय एविएशन सेक्टर में सुरक्षा को लेकर काफी कड़े उपाय किए गए हैं। देश के सभी हवाई अड्डों पर संचालित होने वाली उड़ानों के 100 प्रतिशत पायलटों और केबिन क्रू का अनिवार्य प्री-फ्लाइट बीए टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा लैंडिंग के बाद रैंडम पोस्ट-फ्लाइट टेस्टिंग भी की जाती है ताकि किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे।

यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से कॉकपिट क्रू का पूरी तरह सजग और शारीरिक-मानसिक रूप से फिट होना अनिवार्य है। ऐसे मामलों में तत्काल निलंबन की कार्रवाई यह संदेश देती है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।