परिवार में किसी की मृत्यु के बाद आधार का क्या करें? जानिए डीएक्टिवेशन, मृत्यु की रिपोर्ट और दुरुपयोग रोकने की पूरी कानूनी प्रक्रिया
परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद शोकाकुल परिवार को कई प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियों से गुजरना पड़ता है। इनमें से एक सबसे अहम दस्तावेज होता है मृतक का आधार कार्ड। देश में पहचान और वित्तीय लेन-देन के लिए आधार सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है, इसलिए मृत्यु के बाद इसके दुरुपयोग (मिसयूज), पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) या फर्जी लोन व बैंक खातों जैसी धोखाधड़ी की संभावना बनी रहती है। कई लोग यह सोचते हैं कि मृत्यु के बाद आधार कार्ड को नष्ट कर देना चाहिए या इसे सीधे यूआईडीएआई को लौटाना होता है। हालांकि, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और भारत सरकार के नियमों के तहत इसके निस्तारण और रिपोर्टिंग की एक स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है।
क्या मृत्यु के बाद आधार कार्ड को पूरी तरह 'डिलीट' या सरेंडर किया जा सकता है?
यूआईडीएआई के मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का 12 अंकों का आधार नंबर किसी अन्य व्यक्ति को कभी आवंटित नहीं किया जाता और न ही डेटाबेस से डेटा को तकनीकी रूप से स्थायी डिलीट किया जाता है। हालांकि, इसे निष्क्रिय (Deactivate) या मृत्यु चिन्हित (Marked Deceased) किया जाता है, ताकि उस नंबर के जरिए कोई भी नया प्रमाणीकरण (Authentication), ई-केवाईसी या वित्तीय लेन-देन न किया जा सके। इसलिए परिवार को कभी भी कार्ड को जलाना या फेंकना नहीं चाहिए, बल्कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने तक इसके रिकॉर्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र को सुरक्षित रखना चाहिए।
सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) और UIDAI का ऑटोमेटेड इंटीग्रेशन
भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) और UIDAI के बीच एकीकृत व्यवस्था के तहत अब मृतक का आधार डीएक्टिवेशन काफी हद तक स्वचालित रूप से होता है:
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मृत्यु पंजीकरण के समय आधार का विवरण: जब परिवार नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत में मृत्यु दर्ज कराने के लिए फॉर्म भरता है, तो वहां मृतक का आधार विवरण और परिवार के मुख्य सदस्य का पहचान पत्र मांगा जाता है।
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CRS पोर्टल से डेटा सिंक: सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पर जैसे ही आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) जारी होता है, डेटाबेस से यह सूचना यूआईडीएआई को भेजी जाती है।
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ऑटो-डीएक्टिवेशन: सत्यापन के बाद यूआईडीएआई केंद्रीय डेटाबेस में उस आधार नंबर को ब्लॉक/डीएक्टिवेट कर देता है, जिससे किसी भी तरह की बायोमेट्रिक या ओटीपी आधारित क्लोनिंग की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
परिवार को तत्काल क्या कदम उठाने चाहिए? दुरुपयोग रोकने का सुरक्षा चक्र
यदि किसी कारणवश स्वतः लिंकिंग में समय लग रहा हो, तो परिवार को तुरंत निम्नलिखित सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए:
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mAadhaar ऐप से बायोमेट्रिक्स तुरंत लॉक करें: यदि परिवार के पास मृतक के आधार से जुड़ा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर सक्रिय है, तो वे यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट या mAadhaar ऐप पर लॉगिन करके मृतक के बायोमेट्रिक्स (फिंगरप्रिंट और आईरिस) को हमेशा के लिए लॉक कर दें। इससे कोई भी व्यक्ति क्लोन फिंगरप्रिंट से पैसे निकालने या सिम कार्ड जारी कराने में सफल नहीं हो सकेगा।
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वर्चुअल आईडी (VID) का प्रयोग रोकें: पोर्टल पर जाकर ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मृत्यु के बाद कोई अनधिकृत गतिविधि तो नहीं हुई।
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निकटतम आधार सेवा केंद्र (ASK) में सूचना: परिवार का कोई सदस्य मूल मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक का आधार कार्ड और अपना स्वयं का पहचान पत्र लेकर नजदीकी आधार केंद्र या स्थानीय रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर मृत्यु की प्रविष्टि को मैन्युअली सत्यापित करवा सकता है।
बैंक, पेंशन और अन्य संस्थानों में आधार का उपयोग और निपटान
मृत्यु के बाद आधार का उपयोग तुरंत बंद करने से पहले परिवार को कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं:
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बैंक खाते और नॉमिनी क्लेम: मृतक के बैंक खातों में जमा राशि निकालने, एफडी तुड़वाने या क्लेम सेटलमेंट के लिए बैंक मृतक के आधार और मृत्यु प्रमाण पत्र की स्व-प्रमाणित प्रति मांगते हैं।
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बीमा (Insurance) और ईपीएफओ (EPFO): जीवन बीमा, पीएफ और ग्रेच्युटी क्लेम के दौरान केवाईसी मिलान के लिए मृतक के आधार रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है।
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पैन कार्ड और आईटीआर (ITR): आयकर विभाग में अंतिम रिटर्न (लीगल हायर के रूप में) दाखिल करने के लिए भी आधार विवरण की जरूरत पड़ती है। एक बार सभी वित्तीय निपटान पूरे हो जाएं, तो संबंधित विभागों में भी मृत्यु की सूचना दर्ज हो जाती है।
मृतक के आधार दस्तावेजों का अंतिम सुरक्षित रखरखाव
सभी कानूनी, बैंक और बीमा क्लेम पूरे हो जाने के बाद मृतक के आधार कार्ड, पैन कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र की 5-10 सत्यापित कॉपियों को परिवार के मुख्य सदस्य को अपनी सुरक्षित फाइल में सहेज कर रखना चाहिए। भविष्य में पैतृक संपत्ति के बंटवारे, वसीयत के क्रियान्वयन या जमीन-जायदाद के नामांतरण (दाखिल-खारिज) के दौरान पुराने रिकॉर्ड के मिलान के लिए इस दस्तावेज की आवश्यकता पड़ सकती है। किसी भी अज्ञात व्यक्ति या गैर-सरकारी संस्था को मृतक का पहचान पत्र सौंपने से बचें।