सांसें थमीं, समंदर में बढ़ा 'मोंथा' का क़हर! भारत के 3 राज्यों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा ख़तरा
बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफ़ान 'मोंथा' अब और भी ख़तरनाक रूप ले चुका है और तेज़ी से भारतीय तट की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, यह तूफ़ान मंगलवार देर शाम या आधी रात तक आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट से टकरा सकता है। इसको लेकर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और तटीय इलाक़ों में लोगों की सांसें थमी हुई हैं।
यह इस मौसम का पहला बड़ा तूफ़ान है, और आशंका जताई जा रही है कि यह तट से टकराने से पहले एक 'गंभीर चक्रवाती तूफ़ान' में बदल जाएगा। इस दौरान 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएँ चलने और भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है।
तूफ़ान से लड़ने की सबसे बड़ी तैयारी, सेना और NDRF अलर्ट पर
तूफ़ान के सबसे ज़्यादा ख़तरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने किसी भी तरह की जान-माल के नुक़सान को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।
- हाई अलर्ट: काकीनाडा, कोनासीमा, पश्चिम गोदावरी, एलुरु और पूर्वी गोदावरी ज़िलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
- राहत और बचाव के धुरंधर तैनात: राहत कार्यों के लिए NDRF की 30 और SDRF की 50 टीमों को तैनात किया गया है। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति के लिए मशीनें और जेनरेटर भी तैयार रखे गए हैं।
- 269 राहत शिविर तैयार: तटीय और निचले इलाक़ों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 269 पुनर्वास केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ खाना, दूध, दवाइयाँ और मेडिकल स्टाफ़ की पूरी व्यवस्था है।
- गर्भवती महिलाओं को पहुंचाया अस्पताल: सबसे अच्छी बात यह है कि आस-पास के गाँवों से लगभग 140 गर्भवती महिलाओं को पहले ही सुरक्षित रूप से अस्पतालों में शिफ़्ट कर दिया गया है।
- स्कूल-कॉलेज बंद: ख़तरे को देखते हुए बुधवार तक सभी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टियाँ घोषित कर दी गई हैं।
- मछुआरों की वापसी:यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी मछुआरा समुद्र में न छूट जाए; सभी अपनी नावों के साथ सुरक्षित लौट आए हैं।
शहरों से हटाए जा रहे हैं होर्डिंग्स, कमज़ोर तालाबों पर 24 घंटे पहरा
प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगे पुराने पेड़ों की छंटाई की जा रही है और बड़े होर्डिंग व विज्ञापन बोर्ड हटा दिए गए हैं ताकि तेज़ हवाओं में कोई दुर्घटना न हो। एलुरु ज़िले में लगभग 130 छोटे सिंचाई तालाबों को कमज़ोर घोषित कर दिया गया है, जिनकी देखभाल के लिए सरकारी कर्मचारियों और तैराकों को तैनात किया गया है। लोगों से भी तूफ़ान के गुज़रने तक अपने घरों में रहने की अपील की गई है।
इस तूफ़ान का सबसे बुरा असर आंध्र प्रदेश पर पड़ने की संभावना है, जहाँ 23 ज़िलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही, ओडिशा के दक्षिणी तटों और चेन्नई समेत तमिलनाडु के उत्तरी ज़िलों में भी आने वाले दिनों में भारी बारिश हो सकती है।