Brain Science: बार-बार शिकायत करने की आदत आपके दिमाग को कर रही है श्रिंक, विज्ञान ने दी बड़ी चेतावनी

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News India Live, Digital Desk:  हम अक्सर अपनी भड़ास निकालने के लिए दूसरों के सामने रोना रोते हैं या परिस्थितियों की शिकायत करते हैं। हमें लगता है कि इससे मन हल्का हो रहा है, लेकिन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) के एक शोध के अनुसार, लगातार नकारात्मकता और शिकायतें आपके मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) को छोटा कर सकती हैं।

1. हिप्पोकैम्पस पर हमला (Brain Shrinkage)

हिप्पोकैम्पस मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो याददाश्त (Memory) और समस्या समाधान (Problem Solving) के लिए जिम्मेदार होता है।

असर: लगातार शिकायत करने से शरीर में 'कोर्टिसोल' (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है।

नतीजा: कोर्टिसोल की अधिकता हिप्पोकैम्पस के न्यूरॉन्स को नष्ट करने लगती है, जिससे आपकी सोचने-समझने की क्षमता कम होने लगती है।

2. दिमाग की 'री-वायरिंग' (Rewiring the Brain)

हमारा दिमाग बहुत लचीला होता है। जब आप बार-बार शिकायत करते हैं, तो दिमाग के न्यूरॉन्स के बीच एक खास तरह का रास्ता (Path) बन जाता है।

आदत का विज्ञान: अगली बार जब कोई छोटी सी समस्या आएगी, तो आपका दिमाग अपने आप नकारात्मक विचार की ओर भागेगा। यानी आपका दिमाग नकारात्मकता के लिए 'हार्ड-वायर्ड' हो जाता है।

3. 'सेकंड हैंड कंप्लेनिंग' का खतरा

जैसे 'पैसिव स्मोकिंग' खतरनाक है, वैसे ही दूसरों की शिकायतें सुनना भी आपके लिए हानिकारक है।

मिरर न्यूरॉन्स: जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बैठते हैं जो लगातार रोता रहता है, तो आपके दिमाग के 'मिरर न्यूरॉन्स' उसी भावना को कॉपी करने लगते हैं। इससे आपकी ऊर्जा भी कम होने लगती है और आप बिना वजह तनाव महसूस करने लगते हैं।

[Image showing a stressed person surrounded by negative thought bubbles]

4. कोर्टिसोल: शरीर का दुश्मन

जब आप शिकायत करते हैं, तो आपका दिमाग 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है।

शारीरिक नुकसान: इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, ब्लड शुगर लेवल हाई हो जाता है और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर पड़ने लगती है। लंबे समय में यह हृदय रोगों का कारण बन सकता है।

5. इस आदत को कैसे बदलें? (Expert Tips)

ग्रैटिट्यूड (Gratitude): दिन में कम से कम 3 ऐसी चीजें सोचें जिनके लिए आप शुक्रगुजार हैं। यह कोर्टिसोल को 23% तक कम कर सकता है।

सॉल्यूशन ओरिएंटेड बनें: समस्या पर चर्चा करने के बजाय उसके समाधान (Solution) पर बात करें।

नेगेटिव लोगों से दूरी: जो लोग हमेशा नकारात्मक बातें करते हैं, उनके साथ बिताए जाने वाले समय को सीमित करें।