Bollywood kids Struggles : मसाबा गुप्ता ने बताया, कैसे बचपन में ही उन्हें नाजायज साबित करने की होड़ लगी थी

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News India Live, Digital Desk: Bollywood kids Struggles : हम अक्सर सितारों की चमक-दमक देखते हैं। हमें लगता है, "यार, इनकी लाइफ कितनी सही है!" मसाबा गुप्ता को ही देख लीजिए आज वो एक मशहूर फैशन डिज़ाइनर हैं, एक्ट्रेस हैं और एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जी रही हैं। वो बेहद बिंदास और मजबूत नजर आती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मजबूती के पीछे एक ऐसा बचपन छिपा है जिसे खरोंचने पर आज भी आंसू निकल आते हैं?

हाल ही में मसाबा ने अपने अतीत का एक ऐसा पन्ना खोला, जिसे पढ़कर या सुनकर किसी को भी गुस्सा आ जाए। इंटरव्यू के दौरान वो अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाईं और रो पड़ीं।

"सिर्फ ये साबित करने के लिए कि मेरे बाप का नाम नहीं है..."

मसाबा, दिग्गज अभिनेत्री नीना गुप्ता और वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स की बेटी हैं। 80 और 90 के दशक में जब नीना गुप्ता ने बिन ब्याही माँ बनने का फैसला किया था, तो समाज ने उन्हें बहुत ताने दिए थे। लेकिन इसका सबसे बुरा असर मसाबा पर पड़ा।

मसाबा ने कांपती आवाज में बताया कि जब वे स्कूल में थीं, तब कुछ लोगों (प्रेस या समाज के ठेकेदारों) ने उनका बर्थ सर्टिफिकेट (Birth Certificate) लीक कर दिया था। सोचिए, एक छोटी बच्ची की पर्सनल जानकारी सरेआम कर दी गई। और यह सब क्यों किया गया? सिर्फ यह दुनिया को "सबूत" के साथ दिखाने के लिए कि मसाबा एक "इलीगल चाइल्ड" (नाजायज बच्ची) हैं और उनके पिता का नाम डॉक्यूमेंट्स में नहीं है।

बचपन की मासुमियत पर हमला

जरा उस बच्ची की जगह खुद को रखकर सोचिए। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों और होमवर्क की टेंशन लेते हैं, उस उम्र में मसाबा को यह एहसास दिलाया जा रहा था कि उनका अस्तित्व ही गलत है। मसाबा ने बताया कि यह घटना उनके दिमाग पर बहुत गहरा असर कर गई थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि दुनिया उनके पीछे क्यों पड़ी है।

नीना गुप्ता ने उन्हें बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन घर की चारदीवारी के बाहर की दुनिया बहुत क्रूर थी।

आज भी नहीं भरा वो जख्म

भले ही आज मसाबा सफल हैं और लोग उनकी तारीफ करते हैं, लेकिन बचपन का वो घाव पूरी तरह नहीं भरा है। बात करते-करते उनके आंसू यह बता रहे थे कि शब्दों के तीखे बाण शरीर के घाव से ज्यादा गहरा असर छोड़ते हैं। आज समाज बदल रहा है, लेकिन मसाबा की यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि किसी की निजी जिंदगी, खासकर एक बच्चे की पहचान को तमाशा बनाना कितना गलत है।