बिहार के भ्रष्ट सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर के ठिकानों पर एसवीयू की ताबड़तोड़ छापेमारी, एक साथ 5 ठिकानों पर रेड से मचा हड़कंप

बिहार के भ्रष्ट सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर के ठिकानों पर एसवीयू की ताबड़तोड़ छापेमारी, एक साथ 5 ठिकानों पर रेड से मचा हड़कंप

बिहार की राजधानी पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे बड़े और निर्णायक अभियानों के बीच विजिलेंस यानी विशेष निगरानी इकाई ने एक बार फिर से एक बहुत बड़ी और कड़क कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बार एसवीयू के रडार पर एक ऐसा भ्रष्ट सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर आया है जिसने अपनी सरकारी नौकरी की आड़ में अकूत संपत्ति का साम्राज्य खड़ा कर लिया था, और जैसे ही सुबह-सुबह जांच एजेंसी की टीमें उसके अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दाखिल हुईं, वैसे ही पूरे प्रशासनिक और तकनीकी महकमे में भारी खलबली मच गई। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही राज्य सरकार के इशारे पर की गई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जनता के पैसों पर डाका डालने वाले किसी भी अधिकारी को अब बख्शा नहीं जाएगा। एक साथ पांच अलग-अलग टीमों द्वारा की जा रही इस समन्वित छापेमारी में इंजीनियर के घर से लेकर उसके दफ्तर और रिश्तेदारों के ठिकानों तक को खंगाला जा रहा है, जिससे आने वाले समय में कई और बड़े और चौंकाने वाले वित्तीय खुलासे होने की पूरी संभावना बनती नजर आ रही है।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में कसा गया शिकंजा

प्राप्त पुख्ता खुफिया जानकारी और शुरुआती गोपनीय जांच के आधार पर विशेष निगरानी इकाई को यह पुख्ता सबूत मिल चुके थे कि इस सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर ने अपनी वैध आय के स्रोतों से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित कर रखी है। सरकारी सेवा में रहते हुए किस प्रकार से टेंडर मैनेज करने, कमीशनखोरी करने और अवैध रूप से धन कमाने का खेल खेला गया था, उसकी एक-एक परत अब एसवीयू की फाइलों में दर्ज हो रही है। जब किसी लोक सेवक पर इस तरह के गंभीर आरोप लगते हैं और जांच एजेंसी अपनी रेड का जाल बिछाती है, तो अकूत संपत्तियों के दस्तावेज सामने आना स्वाभाविक हो जाता है, और इस मामले में भी शुरुआती घंटों के भीतर ही करोड़ों की चल-अचल संपत्तियों के सुराग हाथ लग चुके हैं। इंजीनियर के नाम पर खरीदी गई बेनामी जमीनें, आलीशान मकान, महंगी गाड़ियां और बैंकों में भारी-भरकम निवेश के कागजात इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कैसे उसने अपनी ताकत का दुरुपयोग करके अथाह धन-दौलत इकट्ठा की थी।

एक साथ पांच जगहों पर एसवीयू की टीमों का ताबड़तोड़ एक्शन

विशेष निगरानी इकाई ने इस सुनियोजित और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम देने के लिए बेहद करीने से रणनीति बनाई थी, जिसके तहत एक ही समय में इंजीनियर के पटना स्थित आवास, पैतृक गांव, आधिकारिक कार्यालय और अन्य ठिकानों पर पांच अलग-अलग टीमों ने एक साथ दस्तक दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से आरोपी अधिकारी को संभलने का या साक्ष्यों को छिपाने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिल पाया, और विजिलेंस के अधिकारी एक-एक कमरे की तलाशी लेने में जुट गए। अलमारियों से लेकर लॉकर तक और दस्तावेजों से लेकर डिजिटल गैजेट्स तक हर चीज को बारीकी से खंगाला जा रहा है ताकि वित्तीय अनियमितताओं के डिजिटल और लिखित प्रमाण सुरक्षित किए जा सकें। इस छापेमारी के दौरान स्थानीय पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी यह सुनिश्चित कर रही थी कि कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और कानूनी नियमों के दायरे में ही पूरी हो, जिससे जांच को अदालत में पूरी मजबूती के साथ टिकाया जा सके।

ठेकेदारी और कमीशनखोरी के काले कारोबार का पर्दाफाश

प्रारंभिक छानबीन में यह बात भी तेजी से सामने आ रही है कि इस सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर का नाता राज्य में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और निर्माण परियोजनाओं के ठेकों के आवंटन में भारी गड़बड़ी से रहा है। ठेकेदारों से मिलकर किस तरह से बिल पास कराने के एवज में भारी भरकम घूस वसूली जाती थी और सरकारी खजाने को चूना लगाया जाता था, उसकी पूरी कुंडली एसवीयू के हाथ लग चुकी है। भ्रष्टाचार के इन दीमकों ने किस प्रकार से महकमे की छवि को धूमिल करने का काम किया है, उसकी यह बानगी राज्य के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए भी एक बहुत बड़ा और सख्त चेतावनी संदेश है। विजिलेंस के अधिकारी अब इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रहे हैं कि इस खेल में इस इंजीनियर के अलावा और कौन-कौन से बड़े अधिकारी या सिंडिकेट के लोग शामिल थे, जो इस काले कारोबार को पर्दे के पीछे से संचालित कर रहे थे।

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस का कड़ा और सख्त संदेश

बिहार में जिस तरह से लगातार भ्रष्ट अधिकारियों और लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और विशेष निगरानी इकाई द्वारा ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है, उससे साफ जाहिर है कि सरकार इस बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इस सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर के यहां चल रही यह मैराथन रेड न केवल प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है बल्कि आम जनता के बीच भी एक सकारात्मक संदेश दे रही है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। जैसे-जैसे एसवीयू की यह छापेमारी और दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस बात का खुलासा होगा कि कुल कितनी संपत्ति जप्त की गई है और आरोपी को कानून के किस शिकंजे के तहत सजा दिलाई जाएगी। इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया है कि चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, जब कानून का शिकंजा कसता है तो काले कारनामों की दीवारें ढहनी ही पड़ती हैं।