सहरसा के सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर विजय कुमार के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत एक बार फिर निगरानी अनुसंधान ब्यूरो (Special Vigilance Unit - SVU) की टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सहरसा जिले में तैनात ग्रामीण कार्य विभाग के सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर (Superintending Engineer) विजय कुमार के विभिन्न ठिकानों पर एसवीयू की विशेष टीमों ने एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। सुबह-सुबह अचानक हुई इस कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। गोपनीय सूत्रों से मिली जानकारी और आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के पुख्ता सबूत मिलने के बाद अदालत से सर्च वारंट हासिल करके इस रेड को अंजाम दिया गया है। इंजीनियर के पटना, सहरसा और अन्य पैतृक ठिकानों से करोड़ों रुपए की अचल संपत्ति, बेनामी जमीन के दस्तावेज, लग्जरी गाड़ियां और भारी मात्रा में आभूषण मिलने की सूचना है, जिससे विभाग के भीतर भूचाल आ गया है।
#1. सहरसा से लेकर पटना तक विजिलेंस का शिकंजा: एक साथ कई ठिकानों पर रेड
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार, सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर विजय कुमार के खिलाफ लंबे समय से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही थीं। उनके द्वारा वैध स्रोतों से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की पुख्ता सूचना के बाद एसवीयू ने एक विशेष गोपनीय जांच बैठाई थी। जांच में आरोपों के सही पाए जाने के बाद निगरानी ब्यूरो ने कानूनी शिकंजा कसते हुए उनके पटना स्थित आवास, सहरसा के सरकारी और निजी ठिकानों के साथ-साथ अन्य करीबियों के ठिकानों पर एक साथ एक ही समय में धावा बोल दिया। विजिलेंस की अलग-अलग टीमों ने जब सुबह-सुबह इन ठिकानों पर दस्तक दी, तो इंजीनियर और उनके परिवार के होश उड़ गए। टीम दस्तावेज खंगालने के साथ-साथ बैंक खातों और लॉकर्स की भी बारीकी से जांच कर रही है।
#1. अकूत संपत्ति का खुलासा: करोड़ों की जमीन और बेनामी संपत्तियों के मिले कागजात
प्रारंभिक जांच और छापेमारी के दौरान विजिलेंस अधिकारियों के हाथ जो दस्तावेज लगे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। इंजीनियर विजय कुमार के नाम पर पटना के पॉश इलाकों में आलीशान फ्लैट, सहरसा में महंगी जमीनें, कई कमर्शियल प्लॉट और पारिवारिक सदस्यों के नाम पर दर्जनों बैंक खाते होने का खुलासा हुआ है। इसके अलावा, टीम को महंगी घड़ियां, सोने-चांदी के जेवरात और कई लग्जरी गाड़ियों के कागजात भी मिले हैं। अधिकारी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि एक सरकारी पद पर रहते हुए इतनी कम अवधि में इतने बड़े पैमाने पर संपत्तियां कैसे खड़ी की गईं। इन सभी बेनामी संपत्तियों का बाजार मूल्य करोड़ों रुपए में आंका जा रहा है, और विजिलेंस की टीम हर एक दस्तावेज की वीडियोग्राफी कराकर अपने कब्जे में ले रही है।
#1. बिहार में लगातार बढ़ रहा है भ्रष्ट अधिकारियों पर विजिलेंस का दबाव
बिहार सरकार और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान से प्रशासनिक महकमे में गहरी दहशत का माहौल है। हाल के दिनों में कई बड़े इंजीनियरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों पर इस तरह के छापे मारे गए हैं, जिससे यह साफ संदेश दिया गया है कि जनता के पैसों की लूट खसोट करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सहरसा में सुप्रीटेंडिंग इंजीनियर पर हुई इस कार्रवाई के बाद से महकमे के अन्य अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। आम जनता और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए मांग की है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्तियों को जब्त करके उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
#1. आगे की कानूनी कार्रवाई और विजिलेंस की जांच का दायरा
विजिलेंस सूत्रों का कहना है कि छापेमारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद् बरामद दस्तावेजों, कैश और जेवरात की आधिकारिक सूची जारी की जाएगी। इसके बाद इंजीनियर विजय कुमार को पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है या फिर हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के एंगल की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) या प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी मामले के दस्तावेज सौंपे जा सकते हैं। इस बड़ी रेड ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलने वालों का अंत आखिरकार सलाखों के पीछे ही होता है।