शोर PK का, बेस RJD का... बांकीपुर में जीत की नहीं, अब नंबर 2 की इस दिलचस्प जंग के क्या हैं मायने
बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव बेहद रोमांचक और त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो चुका है। राजधानी पटना के दिल में बसी इस वीआईपी सीट पर मुख्य मुकाबला जहां सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच माना जा रहा था, वहीं अब जमीनी समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं। चुनावी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यह है कि यहां मुकाबला जीत-हार से ज्यादा नंबर दो की पोजीशन हासिल करने का बन चुका है। प्रशांत किशोर (PK) की जन सुराज पार्टी के भारी-भरकम प्रचार और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के परंपरागत वोट बैंक के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है।
प्रशांत किशोर के हाईटेक प्रचार ने बढ़ाई विपक्षी खेमे की धड़कन
चुनावी मैदान में उतरी जन सुराज पार्टी ने बांकीपुर के शहरी और शिक्षित मतदाताओं को साधने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रशांत किशोर की टीम का डिजिटल मैनेजमेंट, आक्रामक चुनाव प्रचार और युवाओं को जोड़ने की रणनीति जमीन पर साफ दिखाई दे रही है। पीके के इस जोरदार 'शोर' ने पारंपरिक राजनीति करने वाले दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खासकर सत्ता विरोधी वोटों और युवाओं के बीच जन सुराज अपनी पैठ बनाने का दावा कर रही है, जिससे मुख्य विपक्षी दल की बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है।
आरजेडी के कोर वोट बैंक की परीक्षा, कैडर बेस को बचाने की चुनौती
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अपने मजबूत सांगठनिक ढांचे और पारंपरिक 'माय' (MY) समीकरण के भरोसे मैदान में डटी हुई है। बांकीपुर के कई इलाकों में आरजेडी का काडर बेस बेहद मजबूत है, जिसे हिला पाना किसी भी नई पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही जन सुराज हवा बनाने में कामयाब दिख रही हो, लेकिन पोलिंग बूथ तक वोटर को ले जाने का हुनर और संगठित वोट बैंक आज भी आरजेडी के पास है। ऐसे में आरजेडी के सामने अपने इस अभेद्य किले और बेस वोट को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।
नंबर 2 की रेस क्यों बन गई प्रतिष्ठा की लड़ाई
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है, इसलिए पहले पायदान की लड़ाई के समानांतर नंबर दो पर रहने की होड़ सबसे ज्यादा दिलचस्प हो गई है। अगर जन सुराज यहां दूसरे नंबर पर आती है, तो यह बिहार की भविष्य की राजनीति में प्रशांत किशोर के एक बड़े विकल्प के रूप में उभरने पर मुहर लगा देगा। वहीं, अगर आरजेडी दूसरे स्थान पर मजबूत बनी रहती है, तो यह साबित होगा कि जमीन पर आज भी तेजस्वी यादव का जादू कायम है और नई पार्टियां उनका वोट बैंक नहीं काट पा रही हैं। इस नंबर 2 की जंग ने बांकीपुर के हर बूथ के सियासी समीकरण को उलझा दिया है।