मैथिली ठाकुर का बेबाक अंदाज और भारतीय राजनीति की हकीकत
अपनी सुरीली और मनमोहक आवाज से देश-विदेश के करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली लोकप्रिय लोक और शास्त्रीय गायिका मैथिली ठाकुर ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सामाजिक व्यवस्था और राजनीति को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जो सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गई हैं। बहुत कम उम्र में अपनी गायकी के दम पर बुलंदियों को छूने वाली मैथिली ठाकुर केवल अपने कलात्मक सफर के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि वह देश के सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी बेबाक राय रखने के लिए पहचानी जाती हैं। हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान जब देश की सबसे पुरानी और गहरी जड़ों वाली समस्या यानी 'जाति व्यवस्था' और राजनीति के अंतर्संबंधों पर चर्चा हुई, तो उन्होंने अपने निजी अनुभवों और समाज की जमीनी हकीकत को बड़े ही सहज और तीखे अंदाज में सबके सामने रखा, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
'जब कास्ट हट जाएगा तो पॉलिटिक्स खत्म हो जाएगी'
साक्षात्कार के दौरान बातचीत करते हुए मैथिली ठाकुर ने देश की चुनावी और सामाजिक राजनीति पर सीधी चोट करते हुए एक बहुत बड़ा बयान दिया। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि हमारे देश में राजनीति का पूरा ढांचा कहीं न कहीं जाति (Caste) के ताने-बाने पर टिका हुआ है और यदि इस समाज से पूरी तरह से जाति का भेद और सोच हट जाए, तो देश से पारंपरिक राजनीति भी स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आज के दौर में भी जब लोग किसी व्यक्ति को देखते हैं, तो उसकी योग्यता या काम देखने से पहले उसकी जाति और गोत्र की थाह लेने की कोशिश करते हैं। मैथिली का यह मानना है कि जब तक राजनीति का आधार जाति और धर्म बना रहेगा, तब तक समाज का वास्तविक और संपूर्ण विकास होना बहुत कठिन है। उनके इस बयान ने एक बार फिर से इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या भारतीय लोकतंत्र कभी जातिगत समीकरणों से पूरी तरह से ऊपर उठ पाएगा या नहीं।
अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए क्या बोलीं गायिका
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए मैथिली ठाकुर ने अपने व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर करियर के दौरान समाज के इस कड़वे सच का सामना करने के अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक कलाकार के रूप में जब वह देश के अलग-अलग कोनों में मंच पर परफॉर्म करने जाती हैं, तो उन्हें हर वर्ग और हर तबके के लोगों से बेशुमार प्यार मिलता है, जहाँ संगीत की कोई जाति नहीं होती। संगीत एक ऐसी भाषा है जो दिलों को जोड़ती है, न कि उन्हें बांटती है। लेकिन इसके बावजूद, जब वे सामाजिक और सार्वजनिक जीवन के अन्य पहलुओं को देखती हैं, तो उन्हें यह महसूस होता है कि लोग आज भी छोटी-छोटी और संकीर्ण पहचानों में जकड़े हुए हैं। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों से लेकर आज तक के सफर में यह महसूस किया है कि कैसे लोग हर चीज में अपनी पहचान और जाति की तलाश करने लगते हैं, जो एक प्रगतिशील समाज के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।
युवा पीढ़ी की सोच और बदलाव की एक नई उम्मीद
मैथिली ठाकुर के इस बेबाक बयान के बाद देश के युवाओं और बुद्धिजीवियों के बीच इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। आज की युवा पीढ़ी जो सोशल मीडिया और आधुनिक शिक्षा के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रही है, वह भी इस बात को समझ रही है कि देश को मजबूत बनाने के लिए जातिगत भेदभाव और संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठना बेहद जरूरी है। एक लोकप्रिय युवा आइकन होने के नाते मैथिली का यह संदेश समाज के हर वर्ग तक एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ रहा है। उनका यह मानना है कि जब तक हमारे भीतर से यह जात-पात और अपना-पराया का भेद खत्म नहीं होगा, तब तक हम विश्व पटल पर एक एकजुट और सशक्त राष्ट्र के रूप में पूरी क्षमता के साथ उभर नहीं पाएंगे। संगीत के सुरों से लोगों को जोड़ने वाली यह युवा कलाकार अब अपनी बातों से समाज के दिलों में भी एकता और समानता का एक नया सुरफूंकने का प्रयास कर रही है, जिसकी आज के दौर में सबसे ज्यादा जरूरत है।