चक्रवात अर्नब का बिहार में तांडव: खेतों में बिछी धान की खड़ी फसलें

चक्रवात अर्नब का बिहार में तांडव: खेतों में बिछी धान की खड़ी फसलें

बंगाल की खाड़ी से उठे खतरनाक चक्रवाती तूफान 'अर्नब' (Cyclone Arnab) का असर अब पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ बिहार के कई जिलों में भी पूरी तरह से दिखने लगा है। चक्रवात के प्रभाव से राज्य के दर्जनों जिलों में लगातार हो रही झमाझम बारिश और तेज ठंडी हवाओं ने आम जनजीवन के साथ-साथ कृषि जगत को झकझोर कर रख दिया है। खेतों में इस समय धान की फसल पूरी तरह पककर तैयार खड़ी थी और कटाई का दौर चल रहा था, लेकिन अचानक आए इस मौसम के बदलाव और तेज आंधी-तूफान के कारण बड़े पैमाने पर धान की खड़ी फसलें जमीन पर गिरकर बर्बाद हो गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा के चलते बिहार के अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि महीनों की मेहनत और पूंजी एक ही झटके में बर्बाद होती नजर आ रही है। इसके साथ ही बेमौसम बारिश और ठंडी हवाओं के अचानक प्रवेश से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे राज्य में समय से पहले ही कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है।

धान की पकी हुई फसलें खेतों में बिछीं, अन्नदाताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट

बिहार के ग्रामीण इलाकों में किसानों के लिए यह साल का वह समय होता है जब वे अपनी सालभर की मेहनत का फल यानी धान की फसल को घर लाने की तैयारी करते हैं। लेकिन चक्रवात 'अर्नब' के असर से हुई मूसलाधार बारिश और तेज हवा के थपेड़ों ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। कई जिलों में खेतों में लहलहाती धान की बालियां पानी में डूब चुकी हैं और भारी वजन तथा हवा के कारण पौधे जमीन पर पूरी तरह लेट गए हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जो फसलें पानी में डूब गई हैं, उनके दाने काले पड़ने लगेंगे और उनमें अंकुरण होने की आशंका बढ़ जाएगी, जिससे पैदावार की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। जिन किसानों ने कर्ज लेकर या साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर खेती की थी, उनके सामने अब बैंक का कर्ज चुकाने और परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

मौसम में अचानक आए बदलाव से बढ़ी कड़ाके की ठंड और कंपकंपी

अक्टूबर के आखिरी दिनों में सामान्यतः हल्की गुलाबी ठंड का अहसास होता है, लेकिन चक्रवाती तूफान के कारण हुई लगातार बारिश और उत्तर दिशा से आ रही सर्द हवाओं ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। दिन के समय भी सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं और आसमान में काले बादलों का डेरा जमा हुआ है। तापमान में अचानक 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट आने के कारण लोगों को अपने बक्से से गर्म स्वेटर, जैकेट और रजाई निकालने पर मजबूर होना पड़ा है। सुबह और शाम के समय चलने वाली ठंडी हवाओं ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी है, जिससे विशेष रूप से बुजुर्गों और छोटे बच्चों को मौसमी बीमारियों, सर्दी-खांसी और वायरल फीवर से बचने के लिए खास एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है।

आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम केंद्र की चेतावनी, किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन लगातार यह अपील कर रहा है कि किसान इस खराब मौसम के दौरान खुले खेतों में न जाएं और वज्रपात (आकाशीय बिजली) से अपना बचाव करें। कृषि विभाग की ओर से किसानों को सलाह दी गई है कि जिन क्षेत्रों में कटाई हो चुकी है, वे अपनी कटी हुई फसल को तुरंत सुरक्षित स्थानों या पक्के शेड के नीचे ढंककर रखें ताकि और अधिक नुकसान से बचा जा सके। सरकार और जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द जमीनी स्तर पर हुए फसल नुकसान का आकलन (Crop Loss Survey) कराएं ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा और राहत पहुंचाई जा सके।

संकट की इस घड़ी में सरकार से मदद की आस लगाए बैठे हैं बिहार के किसान

प्रकृति के इस कहर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किस तरह अनियोजित और अचानक आने वाले चक्रवाती तूफान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाते हैं। बिहार के अन्नदाता एक बार फिर कुदरत की मार के आगे लाचार नजर आ रहे हैं, जिनकी निगाहें अब सरकार और प्रशासन की तरफ टिकी हैं। किसानों की मांग है कि विशेष सर्वे कराकर उन्हें जल्द से जल्द आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वे इस भारी नुकसान के उबर सकें। इस बीच, आम नागरिकों को भी इस बदलते और सर्द मौसम में अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखने और अनावश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी गई है ताकि इस आपदा के दौर में सुरक्षित रहा जा सके।