बाढ़ से फसल बर्बाद हुई तो मिलेगा मुआवजा: बिहार के किसानों के पास 25 अक्टूबर तक मौका, ऐसे करें तुरंत आवेदन

बाढ़ से फसल बर्बाद हुई तो मिलेगा मुआवजा: बिहार के किसानों के पास 25 अक्टूबर तक मौका, ऐसे करें तुरंत आवेदन

बिहार में मानसूनी सीजन के दौरान गंगा, कोसी, गंडक, बागमती और कमला बलान जैसी नदियों के उफान और अप्रत्याशित भारी बारिश के चलते जिन किसानों की फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो गई हैं, उनके लिए राज्य सरकार ने राहत का बड़ा पिटारा खोल दिया है। बिहार कृषि विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ित अन्नदाताओं के लिए 'कृषि इनपुट अनुदान योजना' के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस विशेष राहत योजना के जरिए किसानों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से वित्तीय सहायता भेजी जाएगी। प्रभावित किसानों को 25 अक्टूबर तक आधिकारिक कृषि पोर्टल पर अपना दावा दर्ज कराने का समय दिया गया है, ताकि समय रहते सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर दिवाली और छठ महापर्व से पहले उनके खातों में मुआवजे की राशि ट्रांसफर की जा सके।

राज्य के विभिन्न जिलों में खरीफ मौसम के दौरान धान, मक्का, दलहन, तिलहन और बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करने वाले किसान बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हुए थे। खेतों में हफ्तों तक पानी जमा रहने के कारण तैयार फसलें सड़ गईं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। सरकार ने डिजिटल निगरानी और स्थानीय राजस्व अधिकारियों के जरिए क्षति का प्रारंभिक सर्वे पूरा करने के बाद इस पोर्टल को सक्रिय किया है, ताकि कोई भी वास्तविक पीड़ित किसान मुआवजे के अधिकार से वंचित न रहे।

प्रति हेक्टेयर कितना मिलेगा अनुदान: सिंचित, असिंचित और बारहमासी फसलों की दरें

कृषि इनपुट अनुदान के तहत राज्य सरकार ने विभिन्न श्रेणियों की फसलों और भूमि की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग मुआवजा राशि निर्धारित की है। यदि किसी किसान की फसल असिंचित (Unirrigated) क्षेत्र में नष्ट हुई है, तो उसे 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, सिंचित (Irrigated) क्षेत्र में लगी फसल के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान राशि प्रदान करेगी।

सब्जियों और बागवानी फसलों के अलावा बारहमासी (Perennial) यानी बहुवर्षीय फसलों जैसे केला, गन्ना, पपीता और पान के नुकसान पर किसानों को 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का उच्चतम अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही, जिन क्षेत्रों में बाढ़ के साथ आई बालू या गाद की परत 3 इंच से अधिक जम गई है और खेत खेती योग्य नहीं रहे हैं, वहां बालू हटाने के लिए 12,200 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से विशेष सहायता का प्रावधान रखा गया है। यह अनुदान एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक के वास्तविक नुकसान के लिए ही देय होगा, जबकि न्यूनतम सहायता राशि 1,000 रुपये तय की गई है।

किन किसानों को मिलेगा योजना का लाभ: रैयत और गैर-रैयत दोनों के लिए नियम

इस बार कृषि विभाग ने पारदर्शिता और समावेशिता सुनिश्चित करते हुए वास्तविक खेती करने वाले दोनों वर्गों—रैयत (स्वयं की भूमि के मालिक) और गैर-रैयत (बटाईदार या पट्टे पर खेती करने वाले किसान)—को इस योजना के दायरे में शामिल किया है। रैयत किसानों को आवेदन करते समय अपने नाम की जमीन का अद्यतन एलपीसी (Land Possession Certificate) या चालू वित्तीय वर्ष की जमीन की ऑनलाइन लगान रसीद पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

वहीं, गैर-रैयत किसानों के लिए प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाया गया है। बटाईदार किसानों को एक स्व-घोषणा पत्र (Self Declaration) देना होता है, जिसे संबंधित पंचायत के वार्ड सदस्य या किसान सलाहकार द्वारा सत्यापित और हस्ताक्षरित किया जाना अनिवार्य है। यदि कोई किसान रैयत और गैर-रैयत दोनों श्रेणियों में आता है, तो वह भी आवेदन कर सकता है, बशर्ते कुल मिलाकर उसका दावा 2 हेक्टेयर की सीमा के भीतर ही रहे। आवेदन के लिए किसान का बैंक खाता आधार से लिंक (Aadhaar Seeded) और डीबीटी के लिए सक्रिय होना अनिवार्य है।

आधिकारिक पोर्टल से ऐसे करें आवेदन: स्टेप-बाय-स्टेप रजिस्ट्रेशन गाइड

कृषि इनपुट अनुदान के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और ऑनलाइन है। किसान अपने मोबाइल, नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या वसुधा केंद्र के माध्यम से आसानी से फॉर्म सबमिट कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, कृषि विभाग, बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट dbtagriculture.bihar.gov.in पर जाएं। होमपेज पर दिए गए 'ऑनलाइन आवेदन करें' सेक्शन में 'कृषि इनपुट अनुदान योजना (बाढ़/अतिवृष्टि)' के लिंक पर क्लिक करें।

इसके बाद स्क्रीन पर 13 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या (Farmer Registration ID) दर्ज करने का विकल्प आएगा। सर्च बटन दबाते ही किसान का नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर और बैंक विवरण स्क्रीन पर अपने आप प्रदर्शित हो जाएंगे। अब किसान को प्रभावित फसल का नाम, नुकसान का प्रकार (सिंचित/असिंचित), जमीन का खाता नंबर, खेसरा नंबर, थाना नंबर और कुल प्रभावित रकबा (डिसमिल में) दर्ज करना होगा। इसके बाद निर्धारित फॉर्मेट में जमीन की रसीद या स्व-घोषणा पत्र को स्कैन करके अपलोड करें। विवरणों को अच्छी तरह जांचने के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी (OTP) को दर्ज कर फाइनल सबमिशन करें और प्राप्त रसीद का प्रिंटआउट निकालकर अपने पास सुरक्षित रख लें।

25 अक्टूबर के बाद क्या होगी जांच प्रक्रिया और कब तक मिलेगा पैसा

25 अक्टूबर को आवेदन की समय सीमा समाप्त होते ही कृषि विभाग का फील्ड वेरिफिकेशन तंत्र सक्रिय हो जाएगा। किसानों द्वारा भरे गए आवेदनों का सत्यापन कृषि समन्वयक (Agriculture Coordinator), किसान सलाहकार और अंचल स्तर के राजस्व कर्मचारियों द्वारा भौतिक निरीक्षण (Physical Verification) के आधार पर किया जाएगा। यदि सत्यापन में दावा सही पाया जाता है, तो रिपोर्ट सीधे जिला कृषि पदाधिकारी के अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी।

अनुमोदन मिलते ही पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली के जरिए सहायता राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। यदि किसी किसान के आवेदन में कोई विसंगति मिलती है, तो उसे सुधार का सीमित समय दिया जाएगा, लेकिन गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर क्लेम करने वालों के आवेदन सीधे निरस्त कर दिए जाएंगे। समय सीमा में अब महज कुछ ही दिन शेष हैं, इसलिए बाढ़ प्रभावित किसान किसी अंतिम तिथि की तकनीकी हड़बड़ी का इंतजार किए बिना तुरंत अपना ऑनलाइन दावा दर्ज कराएं।