Bihar workers protest : सुपौल में कचरे का पहाड़ और सड़कों पर बदबू पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ सफाईकर्मियों का हल्ला बोल
News India Live, Digital Desk: बिहार के सुपौल नगर परिषद के सभी सफाईकर्मी आज उग्र तेवर के साथ हड़ताल पर चले गए हैं। शहर के मुख्य चौक-चौराहों से लेकर गलियों तक कचरा उठाव पूरी तरह बंद है। सफाईकर्मियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके नेताओं और कर्मचारियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया है, जिसके विरोध में उन्होंने 'काम बंद' का एलान कर दिया है।
विवाद की जड़: पुलिस पर 'बर्बरता' का आरोप
हड़ताल का मुख्य कारण रविवार देर रात पुलिस द्वारा की गई छापेमारी और मारपीट बताई जा रही है:
घर में घुसकर मारपीट: सफाईकर्मियों का आरोप है कि रविवार रात पुलिस ने बिहार लोकल बॉडीज फेडरेशन के प्रदेश संगठन महामंत्री मो. असजद आलम के घर का गेट तोड़कर जबरन प्रवेश किया।
नेताओं की गिरफ्तारी: पुलिस ने असजद आलम, आउटसोर्सिंग प्रबंधक डीके मिश्रा समेत छह कर्मियों को हिरासत में ले लिया। कर्मियों का कहना है कि उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट भी की गई।
शुरुआती विवाद: बताया जा रहा है कि रविवार को वार्ड संख्या 22 में नाले की सफाई के दौरान किसी स्थानीय विवाद के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की थी।
सफाईकर्मियों की मुख्य मांगें
आक्रोशित सफाईकर्मी मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा राघव के आवास पर जमा हुए और स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल खत्म नहीं होगी:
हिरासत में लिए गए सभी नगर परिषद कर्मियों को तुरंत रिहा किया जाए।
सदर थानाध्यक्ष और संबंधित एसआई (SI) को तत्काल पद से हटाया जाए।
दोषी पुलिसकर्मियों पर निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।
शहर के हालात: बीमारियों का खतरा
हड़ताल के पहले ही दिन सुपौल शहर की स्थिति नारकीय हो गई है:
जगह-जगह गंदगी: अस्पताल रोड, स्टेशन रोड और मुख्य बाजारों में कूड़े का ढेर लगा है।
महामारी का डर: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर हड़ताल लंबी चली तो शहर में संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं।
राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी: बिहार लोकल बॉडीज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर सुपौल के कर्मियों को न्याय नहीं मिला, तो पूरे बिहार के नगर निकायों में काम ठप कर दिया जाएगा