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April 29 2026 03:09 am

Bihar Township Policy: नीतीश-सम्राट सरकार का किसानों को तोहफा 11 नई टाउनशिप में मिलेगी 55% विकसित जमीन, 10 गुना

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News India Live, Digital Desk: बिहार की नीतीश-सम्राट सरकार ने राज्य के शहरीकरण को एक नई दिशा देते हुए किसानों और जमीन मालिकों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने एक ऐसी क्रांतिकारी 'लैंड पूलिंग पॉलिसी' (Land Pooling Policy) को मंजूरी दी है, जिसमें किसान अब केवल अपनी जमीन देने वाले नहीं, बल्कि विकास के सीधे हिस्सेदार बनेंगे। सरकार ने घोषणा की है कि राज्य में विकसित की जाने वाली 11 सैटेलाइट टाउनशिप में किसानों से ली गई जमीन का 55 प्रतिशत हिस्सा उन्हें विकसित प्लॉट के रूप में वापस कर दिया जाएगा। इस फैसले से बिहार के ग्रामीण अंचलों में समृद्धि की एक नई लहर दौड़ने की उम्मीद है।

जमीन आपकी, विकास सरकार का: 'लैंड पूलिंग' का मास्टर प्लान नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने स्पष्ट किया है कि सरकार अब पुरानी अधिग्रहण नीति के बजाय 'टाउन प्लानिंग स्कीम' (TPS) पर काम कर रही है। इस मॉडल के तहत, सरकार किसानों से अविकसित जमीन लेगी और वहां चौड़ी सड़कें, बिजली, सीवर, ड्रेनेज और पार्कों का जाल बिछाएगी। विकास कार्य पूरा होने के बाद, कुल जमीन का 55 फीसदी हिस्सा नियमित और कीमती प्लॉट के रूप में मूल मालिकों को लौटा दिया जाएगा। शेष 45 फीसदी जमीन का उपयोग सड़कों (22%), पार्क और सुविधाओं (5%), और गरीबों के आवास (3%) के लिए किया जाएगा।

मुआवजा नहीं, मुनाफे की साझेदारी: 10 गुना तक बढ़ेगी वैल्यू सरकार का तर्क है कि किसानों को मिलने वाली 55 प्रतिशत विकसित जमीन की कीमत, उनकी मूल अविकसित जमीन के मुकाबले 5 से 10 गुना तक अधिक होगी। सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि इस नीति से किसानों को बिचौलियों और 'लैंड माफिया' के चंगुल से बचाया जा सकेगा। जो किसान इस पार्टनरशिप मॉडल में शामिल नहीं होना चाहते, उनके लिए सरकार ने बाजार दर से 4 गुना अधिक मुआवजा या 'ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स' (TDR) का विकल्प भी खुला रखा है, जिसे वे बाजार में बेचकर तुरंत नकद हासिल कर सकते हैं।

इन 11 शहरों की बदलेगी सूरत, 'पाटलिपुत्र सिटी' पर टिकी नजरें इस योजना के तहत पटना के पास पुनपुन में करीब 81,000 एकड़ में 'पाटलिपुत्र सिटी' बसाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा और अन्य प्रमुख शहरों के आसपास ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएंगी। सरकार ने इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर फिलहाल रोक (Moratorium) लगा दी है ताकि योजनाबद्ध तरीके से शहरों को बसाया जा सके। 31 मार्च 2027 तक पहले चरण की जमीनों का चयन फाइनल कर लिया जाएगा।

पारदर्शिता का वादा: लॉटरी से होगा प्लॉट का आवंटन किसानों के मन में किसी भी प्रकार का संशय न रहे, इसके लिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। विकसित प्लॉटों का आवंटन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाएगा और इसका पूरा नक्शा राजस्व विभाग के पास डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। सम्राट चौधरी ने कहा कि यह मॉडल बिहार को दिल्ली और मुंबई जैसी आधुनिक कॉलोनियों की तर्ज पर विकसित करेगा, जहां चौड़ी सड़कें और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। अब बिहार का किसान अपनी जमीन खोएगा नहीं, बल्कि आधुनिक शहर का मालिक बनेगा।