Bihar Rajya Sabha Election : तेजस्वी जी, साथ आइए अख्तरुल ईमान ने AIMIM के लिए मांगा समर्थन बिहार की राजनीति में नई सुगबुगाहट
News India Live, Digital Desk: बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष और अमौर से विधायक अख्तरुल ईमान ने एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने विपक्षी एकता और बीजेपी को रोकने के नाम पर तेजस्वी यादव (RJD) से समर्थन की गुहार लगाई है। बिहार की राजनीति में अक्सर एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले तेजस्वी यादव और अख्तरुल ईमान के बीच अब राज्यसभा चुनाव को लेकर 'मैत्रीपूर्ण' संवाद की कोशिशें शुरू हो गई हैं। अख्तरुल ईमान ने स्पष्ट किया है कि बीजेपी को राज्यसभा में मजबूती मिलने से रोकने के लिए धर्मनिरपेक्ष ताकतों का एकजुट होना जरूरी है।
1. अख्तरुल ईमान की मुख्य मांगें
अख्तरुल ईमान ने मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव और महागठबंधन से निम्नलिखित अपील की है:
एक सीट पर समर्थन: AIMIM चाहती है कि उनकी पार्टी का एक प्रतिनिधि राज्यसभा जाए, ताकि सीमांचल और अल्पसंख्यकों की आवाज संसद के उच्च सदन में बुलंद हो सके।
बदले की राजनीति छोड़ें: ईमान ने कहा, "पुराने गिले-शिकवे भूलकर तेजस्वी जी को बड़ा दिल दिखाना चाहिए। अगर वे हमें समर्थन देते हैं, तो इससे एकता का संदेश जाएगा।"
बीजेपी को रोकना लक्ष्य: उन्होंने तर्क दिया कि अगर वोट बंटते हैं, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा।
2. सीमांचल का कार्ड और 2024-25 की टीस
अख्तरुल ईमान का यह बयान रणनीतिक माना जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले आरजेडी ने एआईएमआईएम के 5 में से 4 विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था, जिससे दोनों पार्टियों के बीच कड़वाहट पैदा हो गई थी।
अब ईमान ने याद दिलाया कि सीमांचल के लोगों ने हमेशा महागठबंधन का साथ दिया है, इसलिए अब उनकी बारी है कि वे एआईएमआईएम की दावेदारी का सम्मान करें।
3. राज्यसभा का गणित और पेच
बिहार में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए संख्या बल के हिसाब से:
महाबंधन (RJD, Congress, वाम दल): इनके पास अपने दम पर कुछ सीटें जीतने का बहुमत है।
AIMIM: अख्तरुल ईमान के पास वर्तमान में केवल एक विधायक (वे स्वयं) हैं। बिना आरजेडी या अन्य दलों के समर्थन के उनका राज्यसभा पहुँचना असंभव है।
4. आरजेडी (RJD) का रुख
फिलहाल तेजस्वी यादव या आरजेडी के किसी बड़े नेता ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, आरजेडी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपने कोटे की सीटों पर किसी बाहरी (विशेषकर ओवैसी की पार्टी) को समर्थन देने के मूड में नहीं है, क्योंकि वे खुद अपने वरिष्ठ नेताओं को समायोजित करने की कोशिश कर रहे हैं।