Bihar Politics : जब नतीजों से पहले नीतीश के एक ट्वीट ने सबको चौंका दिया
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाज़ा लगाना बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के लिए भी मुश्किल होता है। हर चुनाव अपने साथ एक नई कहानी लेकर आता है, जिसमें सस्पेंस, ड्रामा और अचानक आने वाले मोड़ होते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा उस वक़्त का है जब पूरे बिहार की साँसें चुनाव के नतीजों पर अटकी हुई थीं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी।
वो दिन, जब सब नतीजों का इंतज़ार कर रहे थे
सोचिए, माहौल कैसा होगा। एक तरफ वोटों की गिनती शुरू होने वाली है, कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टियों की जीत के दावे कर रहे हैं और दूसरी तरफ, आरजेडी (RJD) पूरे आत्मविश्वास से कह रही है कि इस बार बिहार में बदलाव तय है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है।टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल पर बहस चल रही थी और पटना से लेकर दिल्ली तक हर किसी की नज़र बस नतीजों पर टिकी थी। इस गहमागहमी और तनाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया।
यह कोई सामान्य राजनीतिक बयान नहीं था। यह ट्वीट था देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने का। नीतीश कुमार ने अपने ट्वीट में लिखा, "भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व० पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
एक ट्वीट और हज़ार मतलब
अब आप सोचेंगे कि इसमें क्या ख़ास बात है? किसी पूर्व प्रधानमंत्री को याद करना तो एक सामान्य शिष्टाचार है। लेकिन राजनीति में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। एक ऐसे समय में जब आपकी सीधी टक्कर एक ऐसे गठबंधन से है जो कांग्रेस के साथ है, और आपकी अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी, नेहरू की नीतियों की अक्सर आलोचना करती है, तब आपका नेहरू को इस तरह याद करना कई सवाल खड़े करता है।
इस एक ट्वीट ने सियासी अटकलों का बाज़ार गर्म कर दिया। लोग इसके अलग-अलग मतलब निकालने लगे। क्या नीतीश कुमार अपनी सहयोगी बीजेपी को कोई संदेश देना चाह रहे थे? क्या वो नतीजों को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता में थे और भविष्य के लिए अपने रास्ते खुले रखना चाहते थे? या फिर यह सिर्फ एक संयोग था कि चुनाव के नतीजों का दिन और नेहरू की जयंती एक ही दिन पड़ गए थे?ये सवाल उस वक़्त हर किसी के मन में थे।
दोनों तरफ से थे जीत के दावे
एक तरफ जहाँ नीतीश कुमार के इस कदम ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के खेमे में जश्न का माहौल था। आरजेडी के नेता मनोज झा जैसे लोग पूरे यकीन के साथ कह रहे थे कि सारे एग्जिट पोल गलत साबित होंगे और बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बदलाव के लिए वोट दिया है।उनका दावा था कि दोपहर तक सब कुछ साफ़ हो जाएगा और महागठबंधन की सरकार बनेगी।
यह पूरा माहौल किसी थ्रिलर फिल्म जैसा था, जहाँ हर पल एक नया मोड़ आ रहा था। एक तरफ नतीजों का इंतज़ार, दूसरी तरफ आरजेडी का आत्मविश्वास और इन सबके बीच नीतीश कुमार का वो ट्वीट, जो आज भी बिहार की राजनीति के सबसे दिलचस्प पन्नों में से एक है। ये घटनाएं बताती हैं कि बिहार की राजनीति कितनी अप्रत्याशित है, जहाँ एक छोटा सा कदम भी बड़ी सियासी कहानी लिख देता है।