Bihar Politics : राबड़ी देवी से छिन जाएगा घर? नीतीश सरकार ने भेजा अल्टीमेटम, RJD खेमे में सन्नाटा
News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति और 'सरकारी बंगले' का रिश्ता बहुत पुराना है। जब भी सत्ता बदलती है, सबसे पहली लड़ाई कुर्सी की नहीं, बल्कि 'मकान' की होती है। एक बार फिर पटना का सियासी पारा इसी मुद्दे पर चढ़ गया है। इस बार निशाने पर हैं विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और उनकी माताजी, पूर्व सीएम राबड़ी देवी (Rabri Devi) का आवास।
नीतीश सरकार के डिप्टी सीएम और बीजेपी के फायरब्रांड नेता सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने अब आरजेडी को खुली चुनौती दे दी है।
मामला क्या है?
बात हो रही है पटना के पॉश इलाके में स्थित उस वीवीआईपी बंगले की, जिस पर आरजेडी (RJD) का कब्जा है। सम्राट चौधरी का कहना है कि सरकार बदलते ही सरकारी सुविधाओं के हकदार भी बदल जाते हैं। उन्होंने आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस बंगले में वे रह रहे हैं, उसे खाली करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
सम्राट का तीखा बयान: "अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा"
हमेशा अपने सिर पर 'मुरैठा' बांधने वाले सम्राट चौधरी ने अपनी ठेठ शैली में कह दिया है कि सरकारी संपत्ति किसी के "बाप-दादा की जागीर" नहीं होती। उनका साफ इशारा है कि तेजस्वी यादव अब डिप्टी सीएम नहीं हैं, तो उन्हें उस हिसाब से ही सुविधाओं का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कड़े शब्दों में कहा, "बिहार में कानून का राज है। जो नियम हैं, उसका पालन सबको करना होगा। चाहे वो कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो। अगर प्यार से नहीं मानेंगे, तो सरकार जानती है कि काम कैसे कराया जाता है।"
क्या जबरदस्ती खाली कराया जाएगा?
अभी तक यह साफ नहीं है कि क्या सरकार सच में बुलडोजर या पुलिस भेजेगी, लेकिन सम्राट चौधरी के तेवर बता रहे हैं कि नीतीश सरकार इस बार नरमी बरतने के मूड में बिल्कुल नहीं है। इसे 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले आरजेडी पर 'मनोवैज्ञानिक दबाव' (Psychological Pressure) बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
RJD की चुप्पी
फिलहाल, राबड़ी आवास की तरफ से इस पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन बिहार में सबको पता है कि "लालू परिवार" आसानी से हार मानने वालों में से नहीं है। यह 'बंगला लड़ाई' आने वाले दिनों में और तीखी हो सकती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या तेजस्वी खुद चाबी सौंपते हैं या प्रशासन को दरज़वा खटखटाना पड़ता है!