Bihar Politics : नीतीश के सिपहसालारों ने संभाली कमान, सम्राट चौधरी और नितिन नवीन हुए एक्टिव

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News India Live, Digital Desk: राजनीतिक उठापटक और शपथ ग्रहण की रस्मों के बाद अब बिहार में असली 'काम-काज' का वक्त शुरू हो गया है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की कैबिनेट के मंत्रियों ने आज अपने-अपने सरकारी दफ्तरों का रुख किया और विधिवत तरीके से अपनी कुर्सियां संभाल ली हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा जिन चेहरों की है, वो हैं— सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary), नितिन नवीन (Nitin Nabin) और जेडीयू के अनुभवी नेता श्रवण कुमार (Shrawan Kumar)। आज पटना के सचिवालय में गहमा-गहमी का माहौल था, हर तरफ फूलों के गुलदस्ते और समर्थकों की भीड़ नज़र आई।

आइये, आसान भाषा में जानते हैं कि कुर्सी संभालते ही इन मंत्रियों ने क्या संकेत दिए हैं और आपके लिए इसका क्या मतलब है।

सम्राट चौधरी: "जनता की सेवा ही धर्म है"
बिहार के दिग्गज नेता सम्राट चौधरी, जो अपने तेज-तर्रार बयानों के लिए जाने जाते हैं, आज बिल्कुल अलग अंदाज में दिखे। उन्होंने अपने विभाग का चार्ज लेते ही अफसरों के साथ पहली बैठक की। उनका सन्देश साफ़ था—लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि 'डबल इंजन' की सरकार बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उनके चेहरे पर नई जिम्मेदारियों का आत्मविश्वास साफ़ झलक रहा था।

नितिन नवीन: शहरों की सूरत बदलने की तैयारी
नितिन नवीन, जिन्हें अक्सर यूथ और मॉडर्न सोच वाला नेता माना जाता है, उन्होंने भी आज अपना कार्यभार ग्रहण किया। कुर्सी पर बैठते ही उन्होंने फाइलों पर हस्ताक्षर किए और संकेत दिया कि अटके हुए प्रोजेक्ट्स अब तेजी से पूरे होंगे। अगर आप शहर में रहते हैं, तो उम्मीद कर सकते हैं कि सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में अब तेजी देखने को मिलेगी।

श्रवण कुमार: गांव और गरीब पर फोकस
पुराने और तपे हुए नेता श्रवण कुमार ने भी अपने विभाग में एंट्री ली। पूजा-पाठ और रस्मो-रिवाज के साथ उन्होंने कुर्सी संभाली। श्रवण कुमार हमेशा से ग्रामीण विकास और जमीनी कामों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने साफ़ कहा कि नीतीश कुमार का जो 'सात निश्चय' का सपना है, उसे ज़मीन पर उतारना ही उनका पहला और आखिरी मकसद है।

अब आगे क्या?
जनता के तौर पर हमारे लिए अच्छी खबर यह है कि अब 'सरकार' फुल फॉर्म में आ गई है। जब मंत्री एक्टिव होते हैं, तो नीचे के अधिकारी भी सतर्क हो जाते हैं। उम्मीद है कि जिन सरकारी कामों के लिए आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, अब उनमें थोड़ी फुर्ती आएगी।

कुल मिलाकर, आज का दिन बिहार के लिए 'शुभ संकेत' वाला रहा। मंत्री जी तो कुर्सी पर बैठ गए हैं, अब देखना है कि 'विकास की गाड़ी' कितनी तेज दौड़ती है!