Bihar Politics : नीतीश बने श्रवण कुमार तो तेजस्वी दुर्योधन, प्रशांत किशोर के इस बयान से बिहार में आया भूचाल
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में अपने बयानों से भूचाल लाने वाले प्रशांत किशोर (पीके) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपनी 'जन सुराज' पदयात्रा के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया है, जिसने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस बार पीके ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की है, तो वहीं लालू परिवार और खासकर तेजस्वी यादव पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।
नीतीश कुमार की तारीफ, बताया 'श्रवण कुमार'
जो प्रशांत किशोर कल तक नीतीश कुमार के सबसे बड़े आलोचकों में से एक थे, आज उन्हीं के सुर बदले-बदले से नज़र आए। उन्होंने नीतीश कुमार को एक अच्छा इंसान बताते हुए उनकी तुलना 'श्रवण कुमार' से कर डाली। पीके ने कहा कि नीतीश कुमार की छवि बिल्कुल श्रवण कुमार जैसी है, लेकिन उनकी मजबूरी यह है कि उनके कंधे पर जो कांवड़ है, उसके एक तरफ 'भस्मासुर' और दूसरी तरफ 'राक्षस' बैठे हैं, जो बिहार को लूट रहे हैं।
तेजस्वी पर सबसे बड़ा हमला, कहा 'दुर्योधन'
नीतीश की तारीफ के बाद पीके ने अपना निशाना सीधे तेजस्वी यादव पर साधा और उनकी तुलना महाभारत के 'दुर्योधन' से कर दी। उन्होंने तेजस्वी पर तंज कसते हुए कहा, "नीतीश कुमार के बगल में आजकल जो लड़का बैठता है, वो कोई श्रवण कुमार नहीं, दुर्योधन है। वो अपने चाचा (नीतीश) की कुर्सी छीनने के चक्कर में है, उनकी सेवा करने के लिए नहीं।" पीके ने आगे कहा कि चाचा की सेवा करनी है तो जंगल में जाकर करो, कुर्सी के बगल में बैठकर सेवा नहीं होती, वहां तो सत्ता का लोभ होता है।
लालू-राबड़ी को दिया 'श्राप' जैसा बयान
प्रशांत किशोर यहीं नहीं रुके। उन्होंने लालू-राबड़ी के 15 साल के शासनकाल को बिहार की बर्बादी का कारण बताते हुए एक बेहद विवादित और भावुक बयान दे डाला। उन्होंने कहा, "मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि किसी माँ-बाप को मेरे जैसा बेटा न दे, जो 15 साल सत्ता में रहने के बाद भी अपने माँ-बाप के लगाए गए आरोपों को गलत साबित न कर सके।" उन्होंने कहा कि अगर मेरे माता-पिता पर कोई 'जंगलराज' का आरोप लगाता, तो मैं अपनी पूरी ज़िंदगी लगाकर यह साबित कर देता कि यह आरोप झूठा है।
प्रशांत किशोर के इन बयानों ने साफ कर दिया है कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले वह बिहार में एक नया राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह नीतीश कुमार के प्रति नरम रुख अपनाकर जेडीयू के वोटरों को एक संदेश दे रहे हैं, तो वहीं तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोलकर आरजेडी के खिलाफ खुद को एक मज़बूत विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। इस 'महाभारत' वाले बयान के बाद बिहार की सियासत और भी दिलचस्प होनी तय है।