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April 18 2026 04:57 am

Bihar Police vs Supreme Court : बिहार पुलिस की बड़ी लापरवाही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाने पर नपे कई अफसर

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News India Live, Digital Desk: बिहार पुलिस एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह बहादुरी नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना (Contempt) है। आरोपियों की प्राइवेसी और मानवाधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी 'गाइडलाइंस' का उल्लंघन करने के मामले में बिहार पुलिस के रवैये पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का वो आदेश? (The Privacy Rule)

सुप्रीम कोर्ट ने 'अर्नब गोस्वामी बनाम भारत संघ' और अन्य मामलों में स्पष्ट किया था कि:

पहचान छिपाना: जब तक किसी व्यक्ति पर दोष सिद्ध न हो जाए, पुलिस उसकी फोटो, नाम या निजी जानकारी मीडिया में सार्वजनिक नहीं कर सकती।

मीडिया ट्रायल पर रोक: पुलिस को निर्देश दिया गया था कि वे चार्जशीट दाखिल होने से पहले आरोपियों की 'परेड' न कराएं, क्योंकि इससे आरोपी के सम्मान के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया (Pee-Identification) पर भी असर पड़ता है।

बिहार पुलिस से कहाँ हुई चूक?

ताजा मामले में बिहार के कई जिलों से ऐसी रिपोर्ट सामने आईं जहाँ पुलिस ने:

गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपियों की फोटो बिना चेहरा ढके सोशल मीडिया और प्रेस रिलीज में जारी कर दी।

केस की डायरी के गोपनीय हिस्से या आरोपियों के कबूलनामे (Confessions) को मीडिया में लीक कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों को नजरअंदाज किया जिसमें कहा गया था कि जांच के दौरान 'सेलेक्टिव लीक' से बचना चाहिए।

कोर्ट का कड़ा रुख और पुलिस की सफाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार और डीजीपी (DGP) से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद पुलिस मैनुअल में बदलाव क्यों नहीं किया गया?

कार्रवाई: सूत्रों के अनुसार, इस लापरवाही के लिए कुछ थानों के प्रभारियों और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

पुलिस का तर्क: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे 'जनता में विश्वास जगाने' और 'अपराधियों में खौफ पैदा करने' के लिए ऐसा करते हैं, लेकिन कोर्ट ने इसे 'अराजकता' करार दिया है।

अब क्या होगा बदलाव?

इस विवाद के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी (SP) को नए निर्देश जारी किए हैं:

अब प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी को मीडिया के सामने पेश नहीं किया जाएगा।

सोशल मीडिया पोस्ट में आरोपी के चेहरे को 'ब्लर' (धुंधला) करना अनिवार्य होगा।

केवल वही जानकारी दी जाएगी जिससे जांच प्रभावित न हो।