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April 18 2026 07:42 am

Bihar Police Alert : अब थानों में नहीं चलेगा सीमा विवाद का बहाना Zero FIR पर DGP का सख्त आदेश,जानें क्या है नई SOP

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News India Live, Digital Desk: बिहार के थानों में अब पीड़ित को यह कहकर नहीं लौटाया जा सकेगा कि "यह हमारे क्षेत्र का मामला नहीं है।" बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने 'जीरो एफआईआर' को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत जारी इस आदेश का मकसद अपराध की सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए कानूनी कार्रवाई शुरू करना है। डीजीपी ने साफ कर दिया है कि जीरो एफआईआर दर्ज करने में किसी भी तरह की कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

क्या है 'जीरो एफआईआर' और डीजीपी का नया आदेश?

जब कोई अपराध किसी थाने के भौगोलिक अधिकार क्षेत्र से बाहर घटित होता है, लेकिन पीड़ित पास के किसी भी थाने में उसकी सूचना देता है, तो उसे 'जीरो एफआईआर' के रूप में दर्ज करना अनिवार्य है।

मौखिक या डिजिटल: अब शिकायतकर्ता मौखिक रूप से या डिजिटल माध्यम से भी सूचना दे सकता है। मौखिक सूचना को पुलिस अधिकारी लिखकर सुनाएगा और उस पर हस्ताक्षर लेगा।

3 दिन की मोहलत: यदि सूचना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई है, तो सूचनादाता को 3 दिन के भीतर थाने जाकर आवेदन पर हस्ताक्षर करने होंगे।

नि:शुल्क प्रति: एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी एक कॉपी शिकायतकर्ता को तुरंत और मुफ्त में दी जाएगी।

निगरानी के लिए 'नोडल यूनिट' और सख्त मॉनिटरिंग

इस व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने कड़े इंतजाम किए हैं:

SCRB बना नोडल इकाई: राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB) जीरो एफआईआर के डेटाबेस की निगरानी करेगा।

रजिस्टर मेंटेनेंस: हर थाने में दो अलग प्रपत्र (फॉर्म) होंगे— एक अपने थाने में दर्ज जीरो एफआईआर के लिए और दूसरा अन्य थानों से प्राप्त एफआईआर के लिए।

एसपी करेंगे समीक्षा: थाने से लेकर एसपी कार्यालय तक इसका रिकॉर्ड रहेगा। हर महीने की पहली छमाही में एसपी इन मामलों की समीक्षा करेंगे कि एफआईआर को संबंधित थाने में समय पर ट्रांसफर किया गया या नहीं।

महिला पुलिस अधिकारी: यदि सूचना किसी महिला द्वारा दी जाती है, तो उसे महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही दर्ज किया जाएगा (BNSS की धाराओं के अनुरूप)।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अक्सर देखा जाता था कि गंभीर अपराधों (जैसे लूट, एक्सीडेंट या छेड़खानी) के मामलों में पुलिस 'क्षेत्र' (Jurisdiction) के विवाद में उलझी रहती थी, जिससे अपराधी को भागने का मौका मिल जाता था और साक्ष्य मिट जाते थे। नई एसओपी से अब CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम) की मदद से जीरो एफआईआर को तत्काल संबंधित जिले या राज्य के थाने को भेजा जा सकेगा।