अमृतसर से बड़ी अपडेट 328 पावन स्वरूपों का हिसाब मांग रही थी संगत, अब अधिकारियों पर कसा शिकंजा
News India Live, Digital Desk : हम सभी जानते हैं कि सिखों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिर्फ़ एक धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि "जागृत जोत" यानी साक्षात गुरु हैं। सोचिए, अगर गुरु साहिब के एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पूरे 328 पावन स्वरूप गायब हो जाएं, तो संगत के दिल पर क्या बीतेगी? यह मुद्दा पिछले काफी समय से पंजाब और देश-विदेश में बसे सिखों के लिए गहरे दर्द का कारण बना हुआ था।
लेकिन अब, एक लंबी कानूनी लड़ाई और सड़कों पर चले संघर्ष के बाद, इंसाफ की एक किरण दिखाई दी है। अमृतसर पुलिस ने आखिरकार इस मामले में केस (FIR) दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह कहानी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रकाशन विभाग से जुड़ी है। कुछ समय पहले एक ऑडिट में यह बात सामने आई थी कि रिकॉर्ड से 328 पवित्र स्वरूप कम हैं। सवाल बहुत बड़ा था—क्या ये किसी लापरवाही से हुआ, या इन्हें कहीं गलत तरीके से ले जाया गया?
सिख जत्थेबंदियां और संगत लगातार यह मांग कर रही थीं कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना था कि यह कोई मामूली चोरी नहीं, बल्कि "अदब" (सम्मान) और बेअदबी का मामला है।
हाई कोर्ट ने दिखाया रास्ता
जब मामला पुलिस और प्रशासन के बीच अटकता दिखा, तो बात पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंची। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को समझा और सख्त आदेश दिए। उसी आदेश के बाद अब अमृतसर के थाना ई-डिवीजन में एफआईआर दर्ज की गई है।
संगत में जगी उम्मीद
यह एफआईआर सिर्फ़ एक कानूनी कागज़ नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की भावनाओं की जीत है जो धूप, बारिश और ठंड में इंसाफ के लिए धरने पर बैठे थे। अब उम्मीद की जा रही है कि पुलिस जांच करेगी कि आखिर वो पावन स्वरूप कहां गए? किसके इशारे पर यह सब हुआ? और इसमें कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल थे?
हालांकि, रास्ता अभी भी लंबा है, लेकिन पहला और सबसे ज़रूरी कदम उठा लिया गया है। सच का सामने आना बहुत ज़रूरी है ताकि भविष्य में ऐसी कोताही दोबारा न हो।