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April 13 2026 02:13 am

झारखंड पुलिस में बड़ा वेतन घोटाला DGP तदाशा मिश्रा का कड़ा फरमान 10 साल के सैलरी रिकॉर्ड खंगालेगी स्पेशल टीम

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News India Live, Digital Desk: झारखंड पुलिस विभाग में करोड़ों रुपये के 'अवैध वेतन निकासी' मामले ने महकमे की नींव हिला दी है। बोकारो और हजारीबाग में सामने आए वित्तीय गबन के बाद, राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। डीजीपी ने शनिवार (11 अप्रैल 2026) को एक अभूतपूर्व आदेश जारी करते हुए सभी जिलों और पुलिस की तमाम इकाइयों में पिछले 10 वर्षों (2016-2026) के वेतन भुगतान और निकासी की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

1. जांच का दायरा: बोकारो और हजारीबाग से पूरे प्रदेश तक

यह कार्रवाई बोकारो जिले में हुए उस सनसनीखेज खुलासे के बाद हुई है, जिसमें पुलिस विभाग के एक लेखाकार (Accountant) को करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

गबन का तरीका: आरोपियों ने फर्जी बैंक खातों और मृत या सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के नाम पर वेतन की राशि निकालकर उसे निजी खातों में ट्रांसफर किया था।

विस्तृत ऑडिट: अब डीजीपी के आदेश पर सभी जिलों के एसपी, रेल पुलिस और पुलिस मुख्यालय की लेखा शाखा को पिछले एक दशक का 'वेतन भुगतान डेटा' प्रस्तुत करना होगा।

2. डीजीपी का सख्त निर्देश: "दोषी बख्शे नहीं जाएंगे"

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक प्रशासनिक जांच नहीं, बल्कि वित्तीय शुद्धिकरण (Financial Cleansing) का अभियान है।

नोडल अधिकारी की नियुक्ति: इस वृहद जांच के लिए आईजी स्तर के अधिकारी की देखरेख में एक विशेष ऑडिट टीम गठित की जा रही है।

जवाबदेही तय: यदि किसी जिले में वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो उसके लिए न केवल क्लर्क, बल्कि संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) की भी जवाबदेही तय की जाएगी।

3. सस्पेंस: डीजीपी की नियुक्ति पर भी है टकराव?

जहाँ एक ओर डीजीपी भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी अपनी नियुक्ति को लेकर राजभवन, केंद्र सरकार और यूपीएससी के बीच कानूनी पेच फंसा हुआ है।

नियुक्ति विवाद: यूपीएससी और गृह मंत्रालय ने तदाशा मिश्रा की डीजीपी पद पर नियुक्ति को 'नियमों के विरुद्ध' बताते हुए सवाल खड़े किए थे, क्योंकि उन्हें उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले 2 साल का सेवा विस्तार देकर नियमित डीजीपी बनाया गया था।

हालांकि, राज्य सरकार इस नियुक्ति को पूरी तरह संवैधानिक मानती है और इसी अधिकार क्षेत्र के तहत डीजीपी वर्तमान में पुलिस प्रशासन के महत्वपूर्ण निर्णय ले रही हैं।

4. पुलिसकर्मियों में खलबली

10 साल की सैलरी जांच के आदेश से पुलिस महकमे के उन बाबुओं और लेखाकारों में खलबली मच गई है, जो वर्षों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में पुराने रिकॉर्ड्स को 'अपडेट' करने की होड़ लग गई है।

अभिभावकों और युवाओं के लिए जानकारी:

इस जांच का असर उन पुलिसकर्मियों पर नहीं पड़ेगा जिनका वेतन रिकॉर्ड सही है। यह कार्रवाई केवल भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट को रोकने के लिए की जा रही है।

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यहाँ झारखंड पुलिस विभाग में हुए बड़े वित्तीय घोटाले के खुलासे और डीजीपी के सख्त आदेश पर आधारित न्यूज़ रिपोर्ट अमर उजाला की विशिष्ट क्राइम और प्रशासनिक शैली में प्रस्तुत है: झारखंड पुलिस में बड़ा 'वेत रडार पर जिले और इकाइयां रांची। झारखंड पुलिस विभाग में करोड़ों रुपये के 'अवैध वेतन निकासी' मामले ने महकमे की नींव हिला दी है। बोकारो और हजारीबाग में सामने आए वित्तीय गबन के बाद राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। डीजीपी ने शनिवार (11 अप्रैल 2026) को एक अभूतपूर्व आदेश जारी करते हुए सभी जिलों और पुलिस की तमाम इकाइयों में पिछले 10 वर्षो जिसमें पुलिस विभाग के एक लेखाकार (Accountant) को करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गबन का तरीका: आरोपियों ने फर्जी बैंक खातों और मृत या सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के नाम रेल पुलिस और पुलिस मुख्यालय की लेखा शाखा को पिछले एक दशक का 'वेतन भुगतान डेटा' प्रस्तुत करना होगा। 2. डीजीपी का सख्त निर्देश: "दोषी बख्शे नहीं जाएंगे" डीजीपी तदाशा मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि यह केव बल्कि वित्तीय शुद्धिकरण (Financial Cleansing) का अभियान है। नोडल अधिकारी की नियुक्ति: इस वृहद जांच के लिए आईजी स्तर के अधिकारी की देखरेख में एक विशेष ऑडिट टीम गठित की जा रही है। जवाबदेही तय: यदि कि तो उसके लिए न केवल क्लर्क बल्कि संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) की भी जवाबदेही तय की जाएगी। 3. सस्पेंस: डीजीपी की नियुक्ति पर भी है टकराव? जहाँ एक ओर डीजीपी भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं वहीं दूसरी ओर उनकी अपनी नियुक्ति को लेकर राजभवन केंद्र सरकार और यूपीएससी के बीच कानूनी पेच फंसा हुआ है। नियुक्ति विवाद: यूपीएससी और गृह मंत्रालय ने तदाशा मिश्रा की डीजीपी पद पर नियुक्ति को 'नियमों के विरुद्ध' बताते हुए सवाल खड़े किए थे क्योंकि उन्हें उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले 2 साल का सेवा विस्तार देकर नियमित डीजीपी बनाया गया था। हालांकि राज्य सरकार इस नियुक्ति को पूरी तरह संवैधानिक मानती है और इसी अधिकार क्षेत्र के तहत डीजीपी वर्तमान में पुलिस प्रशासन के महत्वपूर्ण निर्णय ले रही हैं। 4. पुलिसकर्मियों में खलबली 10 साल की सैलरी जांच जो वर्षों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार कई जिलों में पुराने रिकॉर्ड्स को 'अपडेट' करने की होड़ लग गई है। अभिभावकों और युवाओं के लिए जानकारी: इस जांच का असर उन पुलिसकर्मियों पर नहीं पड़ेगा जिनका वेतन रिकॉर्ड सही है। यह कार्रवाई केवल भ्रष्टा DGP Tadasha Mishra salary enquiry order बोकारो पुलिस वेतन घोटाला 2026 तदाशा मिश्रा डीजीपी नियुक्ति विवाद झारखंड पुलिस भ्रष्टाचार जांच Jharkhand Police Salary Scam Investigation 10 years salary probe Jharkhand Police DGP Jharkhand Tadasha Mishra Latest News Bokaro Police Accountant Arrested Jharkhand Police Financial Audit 2016-2026. भ्रष्टाचार के खिलाफ इस बड़ी कार्रवाई से जुड़ी हर अपडेट के लिए बने रहें। क्या आप इस जांच प्रक्रिया के चरणों या बोकारो घोटाले में अब तक हुई गिरफ्तारियों के बा

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