MVA में बड़ी दरार? शरद पवार को राज्यसभा भेजने पर अड़ गई थी उद्धव सेना, सीक्रेट डील के डर से मचा बवाल

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News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर 'महाविकास अघाड़ी' (MVA) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने के संकेत मिल रहे हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, शरद पवार (Sharad Pawar) के निर्विरोध राज्यसभा चुने जाने के पीछे एक लंबी और तनावपूर्ण सियासी लड़ाई छिपी थी। खबर है कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की पार्टी शिवसेना (UBT) पवार को समर्थन देने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थी और इसके पीछे एक बड़ा 'डर' और 'अविश्वास' काम कर रहा था।

क्यों नाराज है ठाकरे परिवार?

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के भीतर इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि शरद पवार की पार्टी (NCP-SP) भरोसेमंद सहयोगी नहीं रह गई है। विवाद की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

विलय की अटकलें: शिवसेना (UBT) के नेताओं को डर है कि शरद पवार का गुट भविष्य में फिर से अजीत पवार के गुट के साथ मिल सकता है, जिससे गठबंधन कमजोर होगा।

आदित्य ठाकरे का स्टैंड: आदित्य ठाकरे ने स्पष्ट रूप से कहा कि रोटेशन के हिसाब से यह सीट शिवसेना की थी। उन्होंने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि अब उन्हें अपने उम्मीदवार के लिए 2028 तक इंतजार करना होगा।

कांग्रेस का दबाव: कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अंत तक अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने पर अड़े थे, लेकिन कांग्रेस द्वारा पवार को समर्थन देने के ऐलान के बाद वे अकेले पड़ गए और उन्हें पीछे हटना पड़ा।

पवार का सियासी दांव और 'मातोश्री' की बेबसी

राज्यसभा की इस इकलौती सीट के लिए सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल ने 'मातोश्री' जाकर उद्धव ठाकरे से लंबी मुलाकात की थी। चर्चा है कि दो घंटे की बातचीत के बावजूद उद्धव टस से मस नहीं हुए थे। हालांकि, गठबंधन की मजबूरी और दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद अंततः पवार के नाम पर मुहर लगी।

भविष्य पर संकट के बादल?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह खटास आगामी विधानसभा चुनावों में भारी पड़ सकती है। शिवसेना (UBT) के नेताओं का खुला बयान कि "NCP-SP भरोसेमंद नहीं है", यह संकेत देता है कि MVA में 'ऑल इज वेल' सिर्फ कागजों पर है।