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March 13 2026 07:14 am

ग्लोबल ऑयल मार्केट में महा-राहत: IEA जारी करेगा 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल, मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारत ने किया फैसले का स्वागत

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नई दिल्ली/पेरिस: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण युद्ध और सप्लाई चेन टूटने से मचे हाहाकार के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इतिहास का सबसे बड़ा कदम उठाया है। वैश्विक तेल बाजार में कीमतों को काबू करने और आपूर्ति संकट को दूर करने के लिए IEA ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन (40 करोड़) बैरल कच्चा तेल जारी करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है। भारत ने एक सक्रिय भागीदार के रूप में इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है।

IEA के इतिहास की सबसे बड़ी 'ऑयल रिलीज'

पेरिस स्थित इस संगठन ने बुधवार (11 मार्च) को घोषणा की कि वह बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने सदस्य देशों के रिजर्व से इतनी बड़ी मात्रा में तेल रिलीज करेगा। यह कदम 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जारी किए गए 182.7 मिलियन बैरल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ गया है।

IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा, "हम तेल बाजार में जिस चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह बहुत बड़े पैमाने की है। सदस्य देशों ने एक अभूतपूर्व सामूहिक कार्रवाई के साथ इसका जवाब दिया है।" हालांकि, तेल किस गति और स्थान से रिलीज होगा, इसका विस्तृत विवरण अभी साझा नहीं किया गया है।

भारत का रुख: स्थिरता के लिए हर संभव कदम को तैयार

भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर IEA के इस निर्णय का स्वागत किया है। मंत्रालय ने कहा, "एक सहयोगी सदस्य के रूप में भारत आपूर्ति में मौजूदा व्यवधानों के बीच इस फैसले की सराहना करता है।" नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि सरकार मध्य पूर्व की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए आवश्यकतानुसार उचित उपाय करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

G7 देशों का समर्थन और जापान की अगुवाई

इस ऐतिहासिक फैसले को IEA के सभी 32 सदस्य देशों और G7 देशों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने पहले ही अपने भंडार का उपयोग शुरू करने की घोषणा कर दी है।

जापान की पहल: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एलान किया है कि उनका देश 16 मार्च से लगभग 80 मिलियन बैरल ईंधन रिलीज करके इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

क्यों पड़ी इतने बड़े भंडार की जरूरत?

मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण कच्चे तेल के उत्पादन और समुद्री रास्तों (जैसे स्ट्रेट ऑफ हर्मोज) पर खतरा मंडरा रहा है। तेल उत्पादक देशों ने भंडारण की कमी और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण उत्पादन कम करना शुरू कर दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। IEA के इस 40 करोड़ बैरल तेल के बाजार में आने से कीमतों में गिरावट आने और सप्लाई सुचारू होने की पूरी उम्मीद है।