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April 11 2026 01:38 pm

SSC का बड़ा फैसला, गलत सवालों के बदले अब सभी को मिलेंगे बराबर अंक, आंसर-की के नियमों में हुआ बदलाव

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 News India Live, Digital Desk: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने अपनी भर्ती परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। साल 2026 की आगामी परीक्षाओं से आयोग ने आंसर-की (Answer Key) और ऑब्जेक्शन सिस्टम के नियमों में आमूल-चूल बदलाव कर दिया है। अब यदि परीक्षा में कोई सवाल गलत पाया जाता है या उसके विकल्प अस्पष्ट होते हैं, तो उस सवाल के अंक किसी खास वर्ग को नहीं, बल्कि परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दिए जाएंगे। आयोग के इस फैसले से लाखों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

नए 'ऑब्जेक्शन सिस्टम' से खत्म होगी विसंगति

आयोग द्वारा 10 अप्रैल 2026 को जारी नई गाइडलाइन्स के अनुसार, अब उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और छात्र-हितैषी बनाया गया है। पहले गलत सवालों को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस रहता था, लेकिन अब आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि:

गलत या अस्पष्ट सवाल: यदि विशेषज्ञ समिति मानती है कि सवाल गलत है, तो उसे हटा दिया जाएगा और उसके पूरे अंक (Full Marks) सभी अभ्यर्थियों को दिए जाएंगे।

एक से अधिक सही विकल्प: यदि किसी प्रश्न के दो विकल्प सही पाए जाते हैं, तो उन अभ्यर्थियों को पूरे अंक मिलेंगे जिन्होंने उन दोनों में से किसी भी एक सही विकल्प को चुना होगा।

आउट ऑफ सिलेबस सवाल: पाठ्यक्रम से बाहर के सवालों को भी निरस्त माना जाएगा और उनके अंक सभी को मिलेंगे।

भाषा की त्रुटि अब नहीं बनेगी बाधा

अक्सर देखा जाता था कि अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में गलती के कारण छात्र पिछड़ जाते थे। नए नियमों के तहत, यदि किसी प्रश्न के हिंदी अनुवाद में गलती है, तो उसका मूल्यांकन उस विशिष्ट भाषा के आधार पर अलग से किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अभ्यर्थी को केवल अनुवाद की त्रुटि के कारण नुकसान न उठाना पड़े। हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया है कि अगर सवाल का अर्थ स्पष्ट है, तो छोटी-मोटी टाइपिंग की गलतियों को नजरअंदाज किया जा सकता है।

क्वालिटी ऑफ ऑब्जेक्शन पर फोकस

अब अभ्यर्थियों के लिए केवल आपत्ति दर्ज कराना काफी नहीं होगा। नई गाइडलाइन के अनुसार, आपत्ति की संख्या मायने नहीं रखेगी, बल्कि आपत्ति की गुणवत्ता (Quality of Objection) और उसके साथ संलग्न किए गए 'वैध प्रमाण' (Valid Proof) ही निर्णायक होंगे। यदि एक भी छात्र सटीक प्रमाण के साथ आपत्ति दर्ज करता है, तो उसका लाभ पूरी परीक्षा देने वाले छात्रों को मिलेगा। इससे फर्जी और बिना सिर-पैर की आपत्तियों पर लगाम लगेगी और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

CGL, CHSL और MTS पर होगा सीधा असर

यह नया नियम SSC की सभी प्रमुख परीक्षाओं जैसे CGL 2026, CHSL 2026, MTS और GD कांस्टेबल पर लागू होगा। इसके साथ ही आयोग ने 2026 भर्ती चक्र के लिए एक 'स्लाइडिंग मैकेनिज्म' (Sliding Mechanism) भी पेश किया है, जिससे रिक्त पदों को भरने में तेजी आएगी और वेटिंग लिस्ट का इंतजार खत्म होगा। जानकारों का मानना है कि इन बदलावों से मुकदमेबाजी कम होगी और योग्य उम्मीदवारों का चयन अधिक निष्पक्ष तरीके से हो सकेगा।