गाँव की सरकार में बड़ा बदलाव राजस्थान में बनेंगी नई पंचायतें, सरपंच से लेकर वार्ड पंच तक ,अब बढ़ेंगी सीटें
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के गांवों में आजकल चर्चा का माहौल गरम है। गाँव की चौपालों पर एक ही बात हो रही है कि "सुना है, अपनी पंचायत बदलने वाली है?" अगर आपने भी ऐसी कोई उड़ती-उड़ती खबर सुनी है, तो आपको बता दें कि यह खबर बिल्कुल पक्की है।
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण इलाकों में विकास की रफ़्तार बढ़ाने और प्रशासन को लोगों के और करीब लाने के लिए ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन (Reorganization of Gram Panchayats) की तैयारी शुरू कर दी है। आसान भाषा में कहें तो, जहाँ आबादी बढ़ गई है, वहां बड़ी पंचायतों को तोड़कर नई और छोटी पंचायतें बनाई जाएंगी।
इसका सीधा मतलब है—अब राजस्थान में सरपंचों और वार्ड पंचों की कुर्सियां बढ़ने वाली हैं।
क्यों पड़ी इसकी ज़रूरत?
हम सब देखते हैं कि कई बार एक ग्राम पंचायत का दायरा इतना बड़ा हो जाता है कि सरपंच जी के लिए हर ढाणी और हर मोहल्ले तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। आबादी बढ़ने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ भी सब तक नहीं पहुँच पाता। इसी समस्या को सुलझाने के लिए पंचायती राज विभाग ने परिसीमन (Delimitation) का मन बनाया है।
खबर है कि जहाँ भी जनसंख्या का घनत्व बढ़ा है, वहां नई पंचायतें बनाने का रास्ता साफ़ हो गया है।
किसको होगा फायदा?
यह खबर दो तरह के लोगों के लिए बहुत खास है:
- आम जनता: जब पंचायत छोटी होगी, तो बजट का पैसा कम लोगों में बंटेगा। यानी आपके गाँव की सड़क, नाली और पानी की समस्या जल्दी सुनी जाएगी। आपको छोटे-छोटे काम के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
- भावी नेता जी: जो लोग गाँव की राजनीति में सक्रिय हैं और चुनाव लड़ने का सपना देखते हैं, उनके लिए मौके बढ़ जाएंगे। नई पंचायत बनने का मतलब है—एक नया सरपंच पद और ढेर सारे नए वार्ड पंच पद। यानी अब ज्यादा लोगों को 'गाँव की सरकार' चलाने का मौका मिलेगा।
क्या प्रक्रिया होगी?
ऐसा नहीं है कि रातों-रात सब बदल जाएगा। प्रशासन इसके लिए पूरा सर्वे करवाएगा।
- सबसे पहले देखा जाएगा कि किस पंचायत में कितनी आबादी है।
- फिर यह तय होगा कि किस गाँव को किस पंचायत में जोड़ना सही रहेगा।
- इसके बाद आम जनता से सुझाव और आपत्तियां (Suggestions and Objections) भी मांगी जाएंगी। अगर आप नहीं चाहते कि आपका गाँव दूसरी पंचायत में जाए, तो आपको अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।
जयपुर समेत कई जिलों पर असर
खासकर जयपुर, जोधपुर और अन्य बड़े जिलों के आसपास के ग्रामीण इलाकों में, जहाँ शहरीकरण तेजी से हुआ है, वहां इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। वहां सीटों की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो सकती है।
तो अगर आप भी अपने गाँव के विकास को लेकर चिंतित थे या राजनीति में कदम रखने की सोच रहे थे, तो तैयार हो जाइये। राजस्थान के गांवों का नक्शा जल्द ही बदलने वाला है!