Big Blow to Rajasthan : हाड़ौती कांग्रेस के नेता भरत सिंह कुंदनपुर का निधन, एक जुझारू आवाज़ खामोश

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हाड़ौती(Hadoti) क्षेत्र और राजस्थान की राजनीति के लिए यह एक बेहद दुखद दिन है. कोटा के प्रसिद्ध और निडर कांग्रेस नेता भरत सिंह कुंदनपुर (Bharat Singh Kundanpur) का निधन हो गया है. उनका निधन राजस्थान की राजनीति में एक युग के अंत जैसा है, क्योंकि वे अपनी बेबाक टिप्पणियों और मुद्दों पर सीधी बात करने के लिए जाने जाते थे. उनका चले जाना कांग्रेस पार्टी और पूरे प्रदेश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है.

कौन थे भरत सिंह कुंदनपुर?
भरत सिंह कुंदनपुर, कुंदनपुर के शाही परिवार से ताल्लुक रखते थे और लंबे समय से कांग्रेस पार्टी के वफादार सिपाही रहे. वह एक वरिष्ठ नेता और विधायक रह चुके थे, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी जनसेवा और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित कर दी.

  • निडर और बेबाक: भरत सिंह को अक्सर 'बेबाक नेता' के रूप में जाना जाता था. वह बिना किसी झिझक के अपनी ही पार्टी की सरकारों की गलतियों को भी उजागर करते थे. उन्होंने भ्रष्टाचार और गलत नीतियों के खिलाफ हमेशा मुखर आवाज़ उठाई, जिससे उनकी एक अलग पहचान बनी.
  • क्षेत्रीय पकड़: हाड़ौती क्षेत्र में उनकी ज़बरदस्त पकड़ थी. वह कोटा ज़िले की सांगोद विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके थे और अपने क्षेत्र की समस्याओं के लिए हमेशा संघर्षरत रहते थे.
  • एक मिसाल: उन्होंने हमेशा नैतिकता की राजनीति को प्राथमिकता दी, जो आजकल के दौर में कम ही देखने को मिलती है.

भरत सिंह कुंदनपुर के निधन की खबर से कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई है. मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और इसे पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है. उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गाँव कुंदनपुर में किया जाएगा, जहाँ उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे. उनके विचार और उनकी निडरता हमेशा राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनता के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी. राजस्थान की राजनीति ने एक सच्चा, जुझारू और जनहितैषी नेता खो दिया है.