अमेरिका में भारतीयों को बड़ा झटका! ट्रंप सरकार ने बदला वर्क परमिट का नियम, 5 साल की जगह अब सिर्फ 18 महीने की वैधता
अमेरिका में काम करने और ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों के लिए एक बुरी खबर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने वर्क परमिट के एक अहम नियम को इतना सख्त कर दिया है कि इससे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी. सरकार ने वर्क परमिट (जिसे 'रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज़' या EAD कहते हैं) की वैधता को 5 साल से घटाकर सीधे 18 महीने कर दिया है.
इसका सीधा मतलब है कि जिन लोगों को पहले एक बार वर्क परमिट मिलने पर 5 साल तक काम करने की आजादी थी, अब उन्हें हर डेढ़ साल में इसे रिन्यू कराने के झंझट से गुजरना होगा. यह फैसला शरणार्थियों, शरण चाहने वालों और खास तौर पर ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लोगों पर भारी पड़ेगा, जिनमें भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है.
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह फैसला देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है. अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के मुताबिक, वर्क परमिट की अवधि कम करने से कर्मचारियों की ज्यादा बार जांच हो सकेगी. इससे धोखाधड़ी को पकड़ने और देश के लिए खतरा बनने वाले लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी.
USCIS के निदेशक जोसेफ एडलो ने एक हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि विदेशियों की लगातार जांच करना जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अमेरिका में काम करने वाले लोग देश की सुरक्षा के लिए खतरा न बनें या अमेरिका-विरोधी विचारधारा को बढ़ावा न दें.
सबसे बड़ी मार भारतीय कामगारों पर
भले ही सरकार सुरक्षा का हवाला दे रही हो, लेकिन इस फैसले की सबसे बड़ी मार उन हजारों भारतीयों पर पड़ेगी जो सालों से ग्रीन कार्ड मिलने की लंबी कतार में लगे हैं.
- क्यों हैं भारतीय सबसे बड़े प्रभावित?
कई भारतीय पेशेवर एच-1बी वीजा पर काम करते हुए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं. इस प्रक्रिया में सालों लग जाते हैं. इस इंतजार के दौरान, उन्हें अमेरिका में कानूनी रूप से काम करते रहने के लिए इसी EAD वर्क परमिट का सहारा लेना पड़ता है. अब जहां पहले उन्हें 5 साल की फुर्सत मिलती थी, वहीं अब हर साल उन्हें इसे रिन्यू कराने का डर और झंझट लगा रहेगा. - नौकरी जाने का खतरा बढ़ा
आव्रजन वकीलों के अनुसार, अब कर्मचारियों को अपनी वर्क परमिट की समय सीमा खत्म होने से कई महीने पहले ही नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा. अगर USCIS की तरफ से इस प्रक्रिया में थोड़ी भी देरी हुई, तो कर्मचारी काम करने का कानूनी अधिकार खो सकता है, जिसका सीधा मतलब है नौकरी से हाथ धो बैठना.
किन भारतीयों पर होगा सबसे ज़्यादा असर?
- वो निवेशक जो निवेश से जुड़े EB-5 ग्रीन कार्ड प्रोग्राम के तहत आवेदन कर चुके हैं.
- वो भारतीय कर्मचारी जिनका I-140 (ग्रीन कार्ड के लिए एक स्टेप) स्वीकृत हो चुका है और वे अपनी स्थिति बदलने का इंतजार कर रहे हैं.
- अमेरिकी नागरिकों के जीवनसाथी या माता-पिता, जो ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में हैं.
फिलहाल, इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर नहीं पड़ेगा जो एच-1बी वीजा पर सीधे किसी कंपनी में काम करने के लिए अमेरिका आ रहे हैं, क्योंकि उनका वर्क परमिट उनके वीजा से जुड़ा होता है.