फिल्म मेकर्स को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका ,विजय जन नायकन की अर्जी सुनने से किया इंकार
News India Live, Digital Desk : फिल्म इंडस्ट्री और कोर्ट-कचहरी का नाता काफी पुराना है। अक्सर किसी फिल्म की रिलीज, नाम या सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट को लेकर विवाद अदालतों तक पहुँच जाते हैं। ऐसा ही कुछ हाल ही में तमिल फिल्म 'विजय जन नायकन' (Vijay Jana Nayagan) के साथ हुआ, लेकिन इस बार मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुँच गया था।
ताज़ा खबर यह है कि फिल्म के निर्माताओं को सुप्रीम कोर्ट से निराशा हाथ लगी है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि कोर्ट ने आखिर कहा क्या है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
दरअसल, फिल्म के प्रोड्यूसर किसी मामले को लेकर (संभवतः सेंसर बोर्ड या रिलीज से जुड़ी दिक्कतों के चलते) सीधे सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंच गए थे। वे चाहते थे कि कोर्ट इस पर तुरंत सुनवाई करे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस याचिका (Plea) पर विचार करने से ही इंकार कर दिया।
कोर्ट का कहना एकदम साफ़ था। उन्होंने निर्माताओं से कहा कि आप सीधे हमारे पास आने के बजाय पहले उचित मंच पर जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया है कि वे अपनी समस्या लेकर संबंधित हाई कोर्ट (High Court) का दरवाजा खटखटाएं। कोर्ट का मानना था कि हर मामले में सीधे शीर्ष अदालत में कूदना (Article 32 के तहत) सही प्रक्रिया नहीं है, जब तक कि कोई बहुत बड़ा संवैधानिक पेच न फंसा हो।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि फिल्म पर कोई रोक लग गई है, बल्कि इसका मतलब यह है कि लड़ाई अभी लंबी चलेगी। अब 'विजय जन नायकन' के मेकर्स को वापस जाना होगा और हाई कोर्ट में अपनी अर्जी लगानी होगी।
वहाँ से जो फैसला आएगा, उसके आधार पर ही फिल्म का भविष्य तय होगा। ज़ाहिर है, इस कानूनी दांव-पेंच में फिल्म की रिलीज या प्रमोशन शेड्यूल पर थोड़ा असर जरूर पड़ सकता है। फैंस जो इस फिल्म का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, उन्हें अब हाई कोर्ट की सुनवाई पर नज़र रखनी होगी।
जैसे ही इस मामले में कोई नया मोड़ आएगा, हम आपको जरूर अपडेट करेंगे। तब तक, सिनेमा के शौकीन बस दुआ कर सकते हैं कि ये कानूनी पचड़े जल्द सुलझ जाएं!