AI की दुनिया में बड़ा धमाका, अब क्लॉड बनेगा डॉक्टरों का सुपर हेल्पर
News India Live, Digital Desk: आजकल हम हर जगह AI यानी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का जिक्र सुनते हैं। चाहे होमवर्क करना हो या ईमेल लिखना, हम अक्सर ChatGPT का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब यही AI अस्पतालों में बैठकर डॉक्टरों के काम को आसान बनाने और मरीज़ों की जान बचाने की तैयारी कर रहा है?
AI की रेस में जानी-मानी कंपनी 'एंथ्रोपिक' (Anthropic) ने एक नया टूल लॉन्च किया है, जिसका नाम है "क्लॉड फॉर हेल्थकेयर" (Claude for Healthcare)। यह सीधे तौर पर ChatGPT को कड़ी टक्कर देने के लिए बनाया गया है, लेकिन इसका मकसद सिर्फ़ बातें करना नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान की बारीकियों को समझना है।
डॉक्टरों का काम कैसे होगा आसान?
हम सब जानते हैं कि डॉक्टरों के पास समय की बहुत कमी होती है। उन्हें न सिर्फ़ मरीज़ देखने होते हैं, बल्कि रिपोर्ट बनाना और ढेर सारा 'कागज़ी काम' (Documentation) भी करना पड़ता है। 'क्लॉड' इसी बोझ को कम करने का काम करेगा। यह डॉक्टर की बताई हुई बातों और रिपोर्ट्स का चंद सेकंड में सटीक विश्लेषण कर सकता है। इससे डॉक्टर का ध्यान पूरी तरह मरीज़ के इलाज पर रहेगा।
सुरक्षा और गोपनीयता पर जोर
हेल्थकेयर के क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता होती है 'डेटा प्राइवेसी' की। किसी मरीज़ की निजी जानकारी सार्वजनिक न हो, इसके लिए क्लॉड को विशेष सुरक्षा मानकों (जैसे HIPAA) के हिसाब से तैयार किया गया है। यह सुरक्षा के मामले में दूसरे सामान्य AI मॉडल्स से ज़्यादा भरोसा जगाता है।
बीमारियों की पहचान और दवाओं पर रिसर्च
चिकित्सा की भाषा बहुत जटिल होती है। हर छोटी-छोटी मेडिकल टर्मिनोलॉजी (Medical Terminology) को समझना आसान नहीं होता। एंथ्रोपिक का यह नया टूल बड़ी-बड़ी मेडिकल रिपोर्ट्स को पढ़कर उनमें से काम की बातें निकाल सकता है। साथ ही, वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल नई दवाओं की खोज (Drug Discovery) और जटिल रिसर्च को सरल बनाने में भी कर सकेंगे।
क्या यह डॉक्टरों की जगह ले लेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि AI कभी डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता, हाँ, वह उनका एक बहुत ही काबिल सहायक ज़रूर बन सकता है। एक डॉक्टर का अनुभव और मानवीय भावनाएं कोई मशीन नहीं ला सकती, लेकिन जब डॉक्टर की बुद्धि के साथ क्लॉड जैसी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' मिल जाएगी, तो इलाज में होने वाली छोटी-मोटी मानवीय भूलों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।