दिन भर रहते हैं थके-थके और चिड़चिड़े? हार्वर्ड के प्रोफेसर ने बताया खुशहाल सुबह का 'गोल्डन रूटीन'
क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सुबह बिस्तर से उठने का मन ही नहीं करता? और अगर उठ भी जाएं, तो दिन भर शरीर में थकान, मन में उदासी और काम में फोकस की कमी बनी रहती है। अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। लेकिन इसका समाधान आपकी अलार्म की 'स्नूज़' बटन में नहीं, बल्कि सुबह की कुछ आदतों में छिपा है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर, आर्थर ब्रूक्स, ने अपना एक खास मॉर्निंग रूटीन बनाया है, जिसे वह अपनी सफलता, खुशी और दिन भर की बेजोड़ एनर्जी का राज मानते हैं। चलिए जानते हैं, इस 'सुपर प्रोडक्टिव' रूटीन की 5 आसान आदतें, जिन्हें अपनाकर आप भी अपनी सुबह को शानदार बना सकते हैं।
1. सूरज से पहले जागना: शांति का पहला मंत्र
प्रोफेसर ब्रूक्स रोज़ सुबह 4:30 बजे के आसपास उठ जाते हैं। उनका मानना है कि सुबह का यह शांत समय दिमागी फोकस, याददाश्त और क्रिएटिविटी को बढ़ाने का सबसे बेहतरीन समय होता है। जब बाकी दुनिया सो रही होती है, तब आपके पास बिना किसी शोर-शराबे के अपने दिन की शुरुआत करने का मौका होता है।
2. 15 मिनट में एक्सरसाइज़ शुरू: एनर्जी का डबल डोज़
उठने के सिर्फ 15 मिनट के अंदर, प्रोफेसर ब्रूक्स एक घंटे की एक्सरसाइज़ करते हैं, जिसमें कार्डियो और वेट ट्रेनिंग दोनों शामिल होती है। वह कहते हैं, "मैं हफ्ते के सातों दिन एक्सरसाइज़ करता हूँ। इससे मेरा मूड बेहतर होता है और शरीर में दिन भर एनर्जी बनी रहती है।"
3. मन की शांति के लिए 20 मिनट: मेडिटेशन या जर्नलिंग
शरीर के साथ-साथ मन को भी चार्ज करना ज़रूरी है। प्रोफेसर ब्रूक्स रोज़ाना मेडिटेशन करते हैं। वह कहते हैं कि यह उन्हें अपनी आत्मा से जुड़ने और मन को शांत रखने में मदद करता है।
अगर आपको मेडिटेशन पसंद नहीं, तो चिंता की कोई बात नहीं। प्रोफेसर ब्रूक्स का सुझाव है कि आप रोज़ 20-30 मिनट जर्नलिंग (डायरी लिखना) भी कर सकते हैं। अपने विचारों और भावनाओं को कागज़ पर उतारने से भी वही मानसिक शांति मिलती है।
4. नाश्ता ऐसा, जो पेट भी भरे और ताकत भी दे
सही नाश्ता दिन भर की एनर्जी का फ्यूल होता है। प्रोफेसर ब्रूक्स अपने नाश्ते में 60 ग्राम प्रोटीन ज़रूर लेते हैं। वह अक्सर ग्रीक योगर्ट (बिना चीनी वाला) में व्हे प्रोटीन, अखरोट और कुछ बेरीज़ मिलाकर खाते हैं। इससे उनका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और फालतू चीज़ें खाने का मन नहीं करता।
5. सबसे ज़रूरी काम, सबसे पहले!
सुबह की इस ताज़गी और एनर्जी को सोशल मीडिया स्क्रॉल करने में बर्बाद न करें। प्रोफेसर ब्रूक्स इस समय का इस्तेमाल अपने सबसे ज़रूरी और क्रिएटिव कामों को करने में करते हैं। वह कहते हैं, "जब मैं ऐसा करता हूँ, तो मुझे दो घंटे में इतना शानदार आउटपुट मिलता है, जो दिन के बाकी समय में शायद ही मिले।"
आप भी बना सकते हैं अपना रूटीन:
प्रोफेसर ब्रूक्स कहते हैं कि आपको हूबहू यही रूटीन अपनाने की ज़रूरत नहीं है। आप इसे अपनी लाइफस्टाइल और ज़रूरतों के हिसाब से बदल सकते हैं। लेकिन एक disciplined मॉर्निंग रूटीन होना, आपकी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने की गारंटी है।